महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में मंजूरी नहीं मिली. 17 अप्रैल 2026 को हुए मतदान में यह प्रस्ताव अनिवार्य दो-तिहाई समर्थन हासिल नहीं कर पाया, जिसके चलते विधेयक गिर गया. महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित संशोधन और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के पक्ष में 298 मत पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया.
18 सितंबर 2023 को संसद के विशेष सत्र के पहले दिन केंद्रीय कैबिनेट ने महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दी थी (Women Reservation Bill). सबसे पहले सितंबर 1996 में एचडी देवगौड़ा की सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को संसद में पेश किया था. इसके बाद से लगभग हर सरकार ने इस विधेयक को पारित कराने की कोशिश की. मौजूदा समय में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 78 है, जो कुल सांसदों का सिर्फ 14 फीसदी है. राज्यसभा में महिला सांसदों की संख्या महज 32 है. वहीं कई राज्यों के विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से भी कम है.
यूपीए सरकार 2010 में राज्यसभा में इसे जरूर पारित कराने में सफल रही लेकिन यह विधेयक लोकसभा में लटक गया. महिला आरक्षण विधेयक पिछले 27 सालों किसी न किसी वजह अटका हुआ था.
12 सितंबर 1996 को एचडी देवगौड़ा की सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में ससंद में महिला आरक्षण विधेयक को पेश किया था (Women Reservation Bill HD Deve Gowda). उस समय यूनाइटेड फ्रंट की सरकार थी, जो 13 पार्टियों का गठबंधन था. लेकिन सरकार में शामिल जनता दल और अन्य पार्टियों के नेता महिला आरक्षण के पक्ष मे नहीं थे. जिसके कारण इस विधेयक को सीपीआई की गीता मुखर्जी की अगुवाई वाली संयुक्त समिति के समक्ष भेजा गया. इस 31 सदस्यीय संसदीय समिति में ममता बनर्जी, मीरा कुमार, सुमित्रा महाजन, नीतीश कुमार, शरद पवार, विजय भास्कर रेड्डी, सुषमा स्वराज, उमा भारती, गिरिजा व्यास, रामगोपाल योदव, सुशील कुमार शिंदे और हन्नाह मोल्लाह शामिल थे.
कई दूसरे देशों में भी कई राजनीतिक दलों ने कानून में कोटा प्रावधान निर्धारित किया है. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में महिलाओं के लिए 60 सीटें आरक्षित हैं. बांग्लादेश की संसद में महिलाओं के लिए 50 सीटें आरक्षित हैं. नेपाल की संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित हैं. तालिबान के शासन से पहले अफगानिस्तान की संसद में महिलाओं के लिए 27 फीसदी सीटें आरक्षित थीं. यूएई की फेडरल नेशनल काउंसिल (एफएनसी) में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित हैं. कई अफ्रीकी, यूरोपीय, दक्षिण अमेरिकी देशों में भी राजनीति में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है (Women Reservation Bill in Other Countries).
पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वतंत्रता और समान पहचान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल मां, पत्नी या बेटी की भूमिका तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। मनुस्मृति का हवाला देते हुए उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्रता पर जोर दिया और कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत महिलाओं के सपने, प्रतिभा और आत्मविश्वास हैं।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने परिसीमन बिल पर केंद्र सरकार की रणनीति पूरी तरह विफल होने का दावा किया है. उन्होंने बताया कि बजट सत्र में पेश हुआ यह बिल संसद में दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण 17 अप्रैल को पास नहीं हो सका और विपक्षी एकता ने सरकार को बड़ा झटका दिया.
प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान और महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष ने निशाना साधा. कांग्रेस समेत कई दलों ने इसे राजनीति और असहमति जताने वालों को निशाना बनाने की कोशिश बताया, जबकि बीजेपी ने प्रधानमंत्री के संबोधन को विकसित और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप बताया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. विपक्ष ने ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी और महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा. कांग्रेस समेत कई दलों ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक हमलों के लिए नहीं होना चाहिए. वहीं भाजपा नेताओं ने भाषण को विकसित भारत, युवाओं और महिला सशक्तीकरण का स्पष्ट रोडमैप बताया.
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस हुई. रिजिजू ने कांग्रेस से महिला आरक्षण विधेयक का बिना शर्त समर्थन करने की अपील की, जबकि राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक 2023 में ही कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है.
देश की संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पास कराने के लिए राजनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं. शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर समर्थन मांगा है. सरकार का लक्ष्य 2029 तक महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है.
लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण और लोकसभा की सीटें बढ़ाने वाले परिसीमन बिल को मोदी सरकार पास कराने की दिशा में फिर से कदम बढ़ाने जा रही है, लेकिन इस राह में कई सियासी अड़चने हैं. ऐसे में सरकार के सामने दो विकल्प है.
संसद के मॉनसून सत्र के दूसरे सप्ताह में सरकार दो अहम विधेयक पास कराने में कामयाब हो गई है, लेकिन लोगों की निगाहें परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल पर टिका हुआ है. इन दोनों बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत चाहिए.
मोदी सरकार संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने की कवायद करती नजर आ सकती है. अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा न जुटा पाने के चलते ये पास नहीं हो सका था. तीन महीने में विपक्ष का समीकरण बिगड़ा है, जिसके दम पर सरकार अपने कदम बढ़ा सकती है.
संसद के आगामी सत्र और ऑल-पार्टी मीटिंग के बीच परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच कांग्रेस द्वारा इस बिल को समर्थन देने की चल रही खबरों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सीधा पलटवार किया है.
मोदी सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए नंबर गेम जुटाने में जुट गई है. मॉनसून सत्र से पहले बीजेपी मिशन-360 के आंकड़े को जुटाने में लगी हुई है, लेकिन अभी भी 6 कदम दूर है. ऐसे में सरकार ने 19 जुलाई को सभी दलों की बैठक बुला ली है.
मोदी सरकार एक बार फिर से मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल ला सकती है. दोनों बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत चाहिए, लेकिन बिना डीएमके के समर्थन से संभव नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डीएमकी अपने स्टैंड को बदलेगी?
पिछले कुछ महीनों में देश के बदले राजनीतिक हालात ने NDA को अपने एक अहम मकसद के करीब कर दिया है. NDA सरकार को देश में परिसीमन सुनिश्चित करने के लिए 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से पास कराना पड़ेगा. पिछले कुछ महीनों में हालात ऐसे बने हैं कि 240 सीटें जीतने वाली बीजेपी दो तिहाई बहुमत से 6 सांसद ही दूर है. हालांकि इसके लिए DMK की सहमति जरूरी है.
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण लागू करने और परिसीमन बिल के जरिए उच्च सदन में सीटें बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने यह बात महिल संगठनों से मुलाकात के बाद कही है. ऐसे में सवाल उठता है कि तीन महीने के बाद अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर क्यों यू-टर्न लिया?
इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल गिर गया था. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे.
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए सत्ता परिवर्तन ने पूरे देश का राजनीतिक समीकरण बदल दिया है. पश्चिम बंगाल की जीत के बाद तो बीजेपी के हौसले आसमान छू रहे हैं. खबर है कि केंद्र की बीजेपी सरकार मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल लाने का प्लान कर रही है.
महिला आरक्षण के बहाने बीजेपी इन दिनों विपक्षी दलों को सियासी कठघरे में खड़े करने की कवायद में जुटी है. ऐसे में बीजेपी अब नितिन नवीन की टीम के जरिए महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का ड्रीम पूरा करेगी, जिसमें पार्टी की नई कार्यकारिणी में महिलाओं को खास तवज्जे दी जाएगी.
यूपी विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र चल रहा है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर लोकसभा में संशोधन बिल गिराने के खिलाफ विशेष सत्र में निंदा प्रस्ताव पास किया जाएगा. बहस की शुरुआत करते सीएम योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला किया. शाहबानो प्रकरण और 1995 के स्टेट गेस्टहाउस कांड का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि आप सभी लोग महिला के शाप से शापित हो. देखें लंचब्रेक.
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन महिला सशक्तिकरण की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है, जबकि उनकी सरकार नारी गरिमा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में गिरने के बाद से ही बीजेपी विपक्ष पर हमलावर है. इसी कड़ी में दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने राजधानी में 'जन आक्रोश रैली' की अगुवाई की. सीएम रेखा और बीजेपी नेताओं ने मशाल जुलूस निकाला. देखें वीडियो.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए विमेन रिजर्वेशन बिल को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर संसद में बिल रोकने का आरोप लगाया. उन्होंने महिलाओं के विकास और सशक्तिकरण को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया.