महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को सत्ता का मालिक नहीं, जनता का नौकर बनकर काम करना चाहिए. उन्होंने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना के प्रतिनिधियों से साफ कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी जनता की सेवा और जमीन से जुड़ा नेतृत्व होना चाहिए.
ठाणे में 4 अगस्त को आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला में शिंदे ने यह बात कही. यह कार्यशाला रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी ने पूर्व सांसद आनंद परांजपे की पहल पर आयोजित की थी. इस दौरान शिंदे ने एक जमीनी कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री बनने तक के अपने सफर के अनुभव भी साझा किए.
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एकनाथ शिंदे ने खुद को बताया "चीफ सर्वेंट"
एकनाथ शिंदे ने कहा, मेरे लिए मुख्यमंत्री का मतलब चीफ सर्वेंट है. उन्होंने कहा कि पद अस्थायी होते हैं, लेकिन समर्पित पार्टी कार्यकर्ता की पहचान जीवनभर रहती है. उन्होंने प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि वे जनता के बीच उपलब्ध रहें, लोगों के फोन उठाएं और स्थानीय शिकायतों का तुरंत समाधान करें. शिंदे ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि जनता के नौकर हैं, सत्ता के मालिक नहीं.
बालासाहेब ठाकरे को एक नाथ शिंदे ने किया याद
एकनाथ शिंदे ने शहरी विकास के मुद्दे पर भी जोर दिया. शिंदे ने कहा कि नगर निकायों को बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा. इस दौरान उन्होंने शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को याद करते हुए कहा कि वह नागरिक और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर करीबी नजर रखते थे.
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एकनाथ शिंदे ने कहा कि विकास परियोजनाओं में बिना जरूरत पेड़ों की कटाई से बचना चाहिए. साथ ही बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान को भी शामिल करना चाहिए, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौती का मुकाबला किया जा सके.