अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी मामले को लेकर देश में सियासत जारी है. कांग्रेस और विश्व हिंदू परिषद के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ी है. हाल ही में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ट्रस्ट और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे. जिसके बाद अब वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने उन पर पलटवार किया है.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा था कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह ये स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली चंदा चोरी की रिपोर्टें वाकई सच हैं.
पवन खेड़ा ने RSS के कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बनाए जाने को हास्यास्पद बताया था. इस पर पलटवार करते हुए आलोक कुमार ने पूछा कि क्या ये जिम्मेदारी पवन खेड़ा या सुप्रिया श्रीनेत को सौंप दी जानी चाहिए?
'ये साल 2027 के चुनावों की तैयारी है'
कांग्रेस नेता के तीखे हमलों का जवाब देते हुए आलोक कुमार ने कहा, 'ये जरूरी नहीं है कि ट्रस्ट में हमेशा संघ (RSS) का ही कोई व्यक्ति होना चाहिए. लेकिन संघ से होना भी अपने आप में कोई अयोग्यता या दोष नहीं है. उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए आगे कहा, 'जिन लोगों ने कभी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा था कि भगवान राम का कोई अस्तित्व ही नहीं था, वो लोग आज अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत राम भक्ति के साथ कर रहे हैं. ये कुछ और नहीं, बल्कि साल 2027 के चुनावों की तैयारी है.'
पवन खेड़ा ने उठाए थे सवाल
बता दें कि पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वो लोग हटाए जा रहे हैं जो सालों तक इसे लूटते रहे. इसके बाद पवन खेड़ा ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि वो अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते.
पवन खेड़ा ने आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाए जाने पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि कृष्ण मोहन पर पहले इस घोटाले को दबाने के आरोप हैं, ऐसे में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने के बजाय ट्रस्ट से बाहर किया जाना चाहिए था.
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कांग्रेस नेता ने की ट्रस्ट भंग करने की मांग
कांग्रेस नेता ने मांग की थी कि देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता, बल्कि पूरे ट्रस्ट को भंग करके उसका पुनर्गठन किया जाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. उन्होंने इस लूट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जवाबदेही तय करने की भी मांग की थी.