अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ एक सतत और आक्रामक अभियान शुरू किया. जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के तहत पहलगाम हमले के तीन आतंकियों को डाचिगाम क्षेत्र में खत्म कर दिया गया.
यह संयुक्त अभियान था जिसमें सेना की 4 पारा, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस शामिल थीं. इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का फोकस सिर्फ प्रतिक्रिया देने से बदलकर आतंकियों, उनके सपोर्ट नेटवर्क और घुसपैठ मार्गों को व्यवस्थित रूप से खत्म करने पर आ गया.
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इंडिया टुडे द्वारा प्राप्त ऑपरेशनल रिकॉर्ड्स के अनुसार पिछले एक साल में चिनार कोर (कश्मीर) और व्हाइट नाइट कोर (जम्मू) ने लगभग 34 महत्वपूर्ण काउंटर-टेरर और एंटी-इन्फिल्ट्रेशन अभियान चलाए. ये आंकड़े अनुमानित हैं क्योंकि कई लंबे अभियानों के अलग-अलग चरणों को एक ही ऑपरेशन माना गया है.
चिनार कोर के अभियान: उत्तर और दक्षिण कश्मीर में खुफिया शिकार
चिनार कोर ने कुपवाड़ा, बारामुला, बांदीपोरा, गांदरबल, शोपियां और कुलगाम जैसे क्षेत्रों में व्यापक अभियान चलाए. अगस्त 2025 में ऑपरेशन नागनी टॉप (कलारूस, कुपवाड़ा) में संयुक्त सेना-पुलिस-बीएसएफ सर्च ऑपरेशन में एक ठिकाना तोड़ा गया और पिस्टल, मैगजीन, 12 ग्रेनेड तथा गोला-बारूद बरामद हुए.

ऑपरेशन अलाचिजाब (गुलगाम जंगल) में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया. हथियार-विस्फोटक बरामद हुए. ऑपरेशन कोटनाला (आवरा बाउल) में भी पिस्टल, यूबीजीएल, ग्रेनेड और गोला-बारूद मिले. बांदीपोरा के गुरेज सेक्टर में ऑपरेशन नौशेरा नर-IV में घुसपैठ की कोशिश के दौरान दो आतंकी मारे गए. कुलगाम में ऑपरेशन गुद्दर में एक आतंकी मारा गया जबकि एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर घायल हुए.
अक्टूबर-नवंबर में ऑपरेशन वारसुन में एके राइफल, रॉकेट लॉन्चर और गोला-बारूद बरामद हुए. ऑपरेशन अमर (मच्छल) में दो आतंकी मारे गए. ऑपरेशन पिंपल (केरन) में घुसपैठ की कोशिश नाकाम की गई. दो आतंकी मारे गए. 2026 में ऑपरेशन डिग्गी-2 (उरी) में एक पाकिस्तानी आतंकी मारा गया.
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ऑपरेशन चित्रगाम (शोपियां) में 14.5 किलो का रिमोट ट्रिगर वाला आईईडी बेअसर किया गया. ऑपरेशन केरन में पांच एके राइफल, मैगजीन और गोला-बारूद का बड़ा भंडार मिला. ऑपरेशन सिमरी में एक पाकिस्तानी नागरिक को संदिग्ध परिस्थितियों में गिरफ्तार किया गया.
ऑपरेशन चनापोरा में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी जाकिर गनई मारा गया. इन अभियानों का महत्व आतंकियों की संख्या खत्म करने में नहीं बल्कि विस्फोटक, हथियार, ठिकाने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नष्ट करने में है.

व्हाइट नाइट कोर: एलओसी सील करना और जम्मू के अंदर मिशन
जम्मू क्षेत्र में व्हाइट नाइट कोर ने पूंछ, राजौरी, किश्तवाड़ और एलओसी सेक्टरों में लगातार अभियान चलाए. सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशन त्राशी-I (किश्तवाड़) था जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के सात आतंकियों को खत्म किया गया, जिसमें कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था. यह 326 दिनों का लंबा अभियान था जिसमें कठिन ऊंचाई वाले इलाकों में एफपीवी ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, यूएवी और खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल हुआ.
ऑपरेशन शिवशक्ति में दो घुसपैठिए मारे गए. फरवरी 2026 में नथुआ टिब्बा (सुंदरबनी) में घुसपैठ नाकाम की गई. मार्च में भिंबर गली और झंगर-नौशेरा में घुसपैठ रोकी गई. पूंछ में प्राकृतिक गुफाओं से विस्फोटक बरामद हुए. ऑपरेशन गनी में आईईडी, ग्रेनेड और पिस्टल मिले. एक अभियान में हथियार सप्लायर को गिरफ्तार किया गया जिसके पाकिस्तान से लिंक थे.
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दो मोर्चों पर रणनीति और राष्ट्रीय स्तर का अभियान
ये अभियान दो स्तर की रणनीति दिखाते हैं. पहला स्तर एलओसी पर घुसपैठ रोकना है जहां खुफिया, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया से आतंकियों को अंदर आने से पहले ही रोक लिया जाता है. दूसरा स्तर अंदरूनी इलाकों में ठिकाने तोड़ना, हथियार जब्त करना, मददगारों को गिरफ्तार करना और आतंकियों को खत्म करना है.
चिनार कोर उत्तर-दक्षिण कश्मीर के ग्रिड पर फोकस कर रहा है जबकि व्हाइट नाइट कोर जम्मू के जंगली-पहाड़ी इलाकों में सक्रिय है. इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क पर राष्ट्रव्यापी कार्रवाई की जिसमें 14 राज्यों में 80 से ज्यादा एफआईआर में 253 ऑपरेटिव गिरफ्तार हुए. यह स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित हमलों को रोकने के लिए था.

निरंतर सुरक्षा ढांचा और आगे की राह
ऑपरेशन महादेव के बाद का सुरक्षा ढांचा दिखाता है कि सेना आतंकियों के निकलने का इंतजार नहीं कर रही. खुफिया इनपुट को निगरानी से जोड़ा जा रहा है. घुसपैठ मार्गों पर नजर रखी जा रही है. मददगारों को पकड़ा जा रहा है. सबसे कठिन इलाकों में भी पीछा किया जा रहा है.
कुपवाड़ा से शोपियां और उरी से किश्तवाड़ तक यह अभियान आतंकियों को तीन चीजें नहीं देने पर आधारित है. घुसपैठ मार्ग, सुरक्षित ठिकाने और स्थानीय लॉजिस्टिक्स सपोर्ट. राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क को तोड़ने के साथ यह पूरे चेन पर लड़ाई है- सीमा और जंगलों से लेकर देश के अंदर हैंडलर्स और स्लीपर सेल्स तक.
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चिनार कोर - 15 कोर / कश्मीर

व्हाइट नाइट कोर - 14 कोर / जम्मू