Gen Z, यानी जेनरेशन Z, उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म आमतौर पर 1997 से 2012 के बीच हुआ है. यह पीढ़ी मिलेनियल्स (Millennials) के बाद आती है और इसे इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हुई पहली पीढ़ी माना जाता है. आज दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा Gen Z से जुड़ा हुआ है और इसका प्रभाव शिक्षा, रोजगार, तकनीक, मनोरंजन और उपभोक्ता बाजार जैसे कई क्षेत्रों में देखा जा रहा है.
Gen Z का बचपन और युवावस्था ऐसे समय में बीती है जब डिजिटल तकनीक तेजी से विकसित हुई. इस पीढ़ी ने इंटरनेट को केवल एक सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन के हिस्से के रूप में देखा है. मोबाइल फोन, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, वीडियो कंटेंट और सोशल मीडिया इनके जीवन का सामान्य हिस्सा रहे हैं.
भारत में Gen Z की संख्या काफी बड़ी है. यह वर्ग स्कूल, कॉलेज और शुरुआती नौकरी के दौर में है. यही कारण है कि कंपनियां, शैक्षणिक संस्थान और विभिन्न ब्रांड इस पीढ़ी को समझने और उनके अनुसार अपनी रणनीतियां तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में Gen Z की क्रय शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता और अधिक बढ़ेगी.
मनोरंजन के क्षेत्र में भी Gen Z की भूमिका महत्वपूर्ण है. यह पीढ़ी पारंपरिक मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट को भी बड़े पैमाने पर देखती है. वीडियो स्ट्रीमिंग, शॉर्ट वीडियो, ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल क्रिएटर्स की लोकप्रियता में इस पीढ़ी की बड़ी भूमिका मानी जाती है.
शिक्षा के क्षेत्र में भी Gen Z ने ऑनलाइन लर्निंग, डिजिटल क्लासरूम और वर्चुअल कोर्सेज के दौर को करीब से देखा है. कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा का विस्तार हुआ, जिसका सबसे अधिक प्रभाव इसी पीढ़ी पर पड़ा.
रोजगार के क्षेत्र में Gen Z अब धीरे-धीरे कार्यबल का हिस्सा बन रही है. कई युवा उच्च शिक्षा पूरी कर चुके हैं, जबकि कई अभी पढ़ाई कर रहे हैं.
बुलेटिन में बात करेंगे GEN Z वोटर्स की... जिन पर अचानक से हर पार्टी का फोकस बढ़ गया है. जंतर मंतर में प्रदर्शन के बाद यूपी चुनाव जेन-जी की पहली प्रयोगशाला बनने जा रहा है. इसीलिए युवाओं को अपने पाले में करने के लिए पार्टियां तरह तरह के हथकंडे अपना रही हैं. देखें विशेष.
भारत के विभिन्न राज्यों में जेन-अल्फा पीढ़ी के बच्चे शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं. उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में छात्र-छात्राएं खराब हॉस्टल भोजन, शिक्षक कमी, स्कूल सुविधाओं की कमी और बस किराया बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.
जिस वक्त देश में आज़ादी का जश्न मन रहा है, उसी वक्त अलग-अलग जगहों पर देश का युवा अपने-अपने तरीके से प्रदर्शन कर रहा है. हमने जंतर-मंतर देखा, हमने रांची देखा. लेकिन क्या सिर्फ प्रदर्शन कर रहा युवा ही बदलाव मांग रहा है? ऐसा नहीं है इस देश का हर युवा, जिसे Gen-Z कहा जा रहा है वो कई तरह के बदलाव चाहता है. कई तरह की आज़ादी चाहता है. क्यूंकि उसके लिए आज़ादी के मायने कुछ और ही हैं.
आज दस्तक, कैसे, सभी पॉलिटिकल पार्टियों के लिए, Gen Z गरज भी बन गए हैं, और मजबूरी भी. 2027 में देश के 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. और इन चुनावी राज्यों में Gen Z वोटर्स एक बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं. अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर, नई पीढ़ी, जिस तरह से सजग और मुखर नज़र आ रही है, सियासी पार्टियों को मैसेज बहुत क्लीयर है, जहां Gen Z वहां पलड़ा भारी. ऐसे में सीएम योगी 2027 की लड़ाई के लिए, Gen Z को लुभाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं. देखें...
कहीं नारा लग रहा है कि कलेक्टर साहब का आना होगा. कहीं नारे लगाए जाते हैं कि मांगें हमारी सुननी होगी. ये वो बच्चे हैं जिन्हें नागरिक शास्त्र का पाठ पढ़ाया जाता है. लेकिन ये पहली बार उन पाठों का प्रयोग भी कर रहे हैं. ये वो बच्चे हैं जिन्होंने आंदोलन के बारे में पढ़ा है. लेकिन पहली बार खुद आंदोलन कर रहे हैं. अब दो चीजों की जरूरत है. पहली- ऐसे हर आंदोलन में छात्रों की मांग सुनी जाए. देखें...
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिल्ली से बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे आगामी चुनावों में इस सरकार को सत्ता से बाहर करें.
NEET पेपर लीक के विरोध में उतरे युवाओं ने आंदोलनों को लेकर देश के सामने एक नया आयाम पेश कर दिया है. इसमें हिस्सा लेने वालों में ज्यादातर 'जेन जी' (Gen Z) मतलब 'जनरेशन जेड' से थे. इनके पावर को मद्देनजर रखते हुए ही सभी सियासी दल इस वर्ग को लुभाने में जुटा हुआ है. इसी पर आधारित है सो सॉरी की ये स्वतंत्रता दिवस पर खास पेशकश.
लखनऊ के जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में घटिया भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और शिक्षकों की कमी से नाराज छात्रों ने सड़क पर उतरकर चक्का-जाम किया. समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने मौके पर पहुंचकर छात्रों की मांगें सुनीं और जल्द समाधान का ठोस आश्वासन देकर प्रदर्शन खत्म कराया.
आज विशेष में बात करेंगे GEN Z वोटर्स की... जिन पर अचानक से FOCUS बढ़ गया है.. अचानक से ऐसा लगता है कि GEN Z इस देश के POLITICAL DISCOURSE में आ गया है.. और ये सब हुआ है दिल्ली के जंतर मंतर और रांची के GEN Z PROTEST से... इस देश की राजनीतिक पार्टियों को अचानक से अब युवा वोटर की याद आने लगी है.. लेकिन सवाल है कि युवाओं का वोट तो हर पार्टी को चाहिए.. लेकिन उनकी भागीदारी कितनी है.
हाउ इज द जोश....ओह...अब तो...हाउ इज द Gen Z. Gen Z इस समय देश का सबसे चर्चित शब्द बनता जा रहा है. और हर दल Gen Z को अपने पाले में लाने के लिए रणनीतियां बनाने में लगा है. जंतर-मंतर और झारखंड के Gen Z आंदोलन ने युवाओं की ताकत दिखा दी है. इस ताकत का पहला चुनावी अप्रेजल 2027 के यूपी चुनाव में होने वाला है. बीजेपी ने यूपी के मंत्रियों को Gen Z के साथ चौपाल लगाने को कहा है. देखें...
कंगना रनौत ने अपनी 'जेनरेशन गटर' वाली टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जंतर-मंतर पर मौजूद कुछ खास प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया था और उनका मकसद कभी भी पूरी 'जेन जी' (Gen Z) पीढ़ी का जिक्र करना नहीं था.
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. बैठक में 2027 विधानसभा चुनाव, प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और Gen-Z मतदाताओं को लेकर बीजेपी की रणनीति पर चर्चा हुई.
BSP मान रही है कि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर, सादाबाद की सभा में चले #बहन_जी_का_संदेश जैसे अभियानों से रफ्तार पकड़कर और छात्र आंदोलन के समर्थन के जरिए वह 2027 से पहले अपनी राजनीतिक जमीन फिर मजबूत करने की कोशिश कर सकती है.
आज दस्तक, क्यों सभी पॉलिटिकल पार्टियां, Gen Z पर डोरे डाल रही हैं? सबसे पहले तो आपको बता दें कि, 2027 में यूपी से लेकर, देश के 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. और इन चुनावी राज्यों में Gen Z वोटर्स एक बड़ी ताकत बनकर उभर रहे हैं. अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर, नई पीढ़ी, जिस तरह से सजग और मुखर नज़र आ रही है, सियासी पार्टियों को मैसेज बहुत क्लीयर है, जहां Gen Z वहां पलड़ा भारी. देखें दस्तक.
बहुत दिनों बाद बेरोजगारों...नौकरियों का मुद्दा राजनीति के केंद्रबिंदु आ चुका है. जहां अपने राज्य की परीक्षा सुरक्षित हो. दूसरे के शासन में कहीं चूक हो तो मुद्दा उठे, छात्रों को न्याय मिले. इसकी तेजी राजनीतिक मैदान में दिख रही है. इन सबके बीच आज एक सवाल आपके सामने रखते हैं. सवाल है क्या जन गण का मन सरकारेें सुनना शुरु करेंगी? जहां जेन जी के बाद जेन अल्फा अपने हक, अधिकार को मांगने के लिए सीएम, डिप्टी सीएम, डीएम, विधायक किसी के सामने बोलने से डर नहीं रहे हैं. देखें...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में उनके जीवन, संघर्ष और सादगी की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि कोविंद ने राष्ट्रपति पद पर एक मिसाल कायम की और पद छोड़ने के बाद भी देश के लिए काम कर रहे हैं. पीएम ने युवाओं से उनकी आत्मकथा पढ़ने की अपील की. साथ ही शॉर्टकट से बचने और अनुभवों से सीखने का संदेश दिया.
सिरोंज में कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल की छात्राओं ने बस किराया बढ़ाए जाने के खिलाफ बस स्टैंड पर करीब आधे घंटे तक जोरदार नारेबाजी की. छात्राओं ने स्थानीय विधायक से किराया कम करने की मांग की और स्कूल आने-जाने में हो रही परेशानी को उजागर किया. यह प्रदर्शन यात्रियों और बस चालकों के लिए भी चौंकाने वाला था.
11 अगस्त को हमीरपुर में बच्चों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर धरना दिया, खटीमा में खराब खाने और गंदगी के खिलाफ छात्रों ने विरोध जताया, जबकि बांसवाड़ा में शिक्षकों की कमी पर तालाबंदी की गई. इन प्रदर्शनों पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके का रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने बच्चों की हिम्मत को सलाम किया है.
सी-वोटर के सर्वे में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं का विश्लेषण किया गया है. सर्वे में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माना गया, जबकि महंगाई को भी कई युवाओं ने प्राथमिकता दी.
वक्त है हर खबर से आपको खबरदार करने का। झारखंड में भर्ती धांधलियों के खिलाफ प्रदर्शन करते छात्रों को 18 दिन हो चुके हैं. रांची से दिल्ली तक सवाल पूछा जा रहा है. लेकिन हमारे देश में छात्रों के मुद्दे पर सियासत के स्वादानुसार फायदा देखकर बोला और चुप्पी साधी जाती है. वही इस बार भी हो रहा है. देखें खबरदार...
आज हम आपके लिए एक ऐसा सर्वे लेकर आए हैं... जो बताएगा कि, देश में मौजूदा समय में Gen-Z का मिजाज क्या है... इस सर्वे से आप इसलिए और कनेक्ट महसूस करेंगे क्योंकि, हर घर में Gen-Z या Gen अल्फा मौजूद हैं... और वो देश की मौजूदा सियासत को लेकर क्या सोचते हैं... उनका मूड कैसा है... पूरे देश में ये सर्वे सी-वोटर ने किया है... हर राज्य के करीब करीब हर जिले में 18 साल से 35 साल तक के युवाओं की टेलिफोनिक सर्वे के जरिए राय ली गई... इसका सैंपल साइज 1270 है... इसे 8 अगस्त को किया गया. देखें दंगल.