भारत के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में बसा एक छोटा-सा लेकिन बेहद सुंदर और मनमोहक शहर है पहलगाम (Pahalgam). यह स्थान जम्मू और कश्मीर राज्य के अनंतनाग जिले में स्थित है. यह समुद्र तल से लगभग 7,200 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है. यहां की वादियां, बर्फ से ढके पहाड़, कल-कल करती नदियां और हरे-भरे चरागाह मन को सुकून देते हैं.
यहां की लिद्दर नदी पहलगाम की जीवनरेखा है. यह नदी अपने ठंडे और साफ पानी के लिए मशहूर है. यहां लोग रिवर राफ्टिंग का मजा लेते हैं. वहीं बात करें बेताब वैली की तो इस घाटी का नाम फिल्म "बेताब" के नाम पर रखा गया, जिसकी शूटिंग यहां हुई थी. यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी सपने से कम नहीं. वहीं अरु वैली ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय है और यहां से कोलाहोई ग्लेशियर तक भी जाया जा सकता है. यहां स्थित चंदनवारी अमरनाथ यात्रा का प्रारंभिक बिंदु यही है. यहां गर्मियों में भी यहां बर्फ देख सकते हैं.
कश्मीरी दम आलू, रिस्टा, गुश्ताबा, और कहवा जैसी चीजें यहां के खाने में प्रमुख हैं. पहलगाम में कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबे हैं जहां आप पारंपरिक कश्मीरी खानपान का स्वाद ले सकते हैं.
पहलगाम सालभर सुंदर रहता है, लेकिनबर्फबारी का आनंद लेने के लिए दिसंबर से मार्च के बीच का समय बेस्ट रहता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ 72 घंटे में पूरा हुआ, लेकिन भारत लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी के साथ गया था. उन्होंने इसे नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. पाकिस्तान पर आतंकवाद समर्थन का आरोप लगाया. तीनों सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई और स्वदेशी हथियारों की सफलता पर जोर दिया.
आज सबसे पहले हम आपको 'पहलगाम आतंकी हमले' की बरसी पर. उस खौफनाक, दर्दनाक और पूरे देश को कभी ना भूलने वाला जख्म देने वाली घटना का फ्लैशबैक दिखाएंगे... जिसने नाम और धर्म पूछकर निहत्थे, निर्दोष और मासूम लोगों बेरहमी से कत्ल कर दिया... महिलाओं के सामने उनकी मांग का सिंदूर पोंछ डाला... और बेहद खूबसूरत बैसरन घाटी को लहूलुहान कर दिया था। एक साल बाद इस कायराना करतूत की अनचाही यादें लोगों के जेहन में बिल्कुल ताजा हैं.. और इसकी टीस हिन्दुस्तान कभी भूल नहीं सकता.
कहते हैं हर जख्म भरने के लिए वक्त लगता है. एक साल पहले पहलगाम भी एक गहरे जख्म से गुजरा था. लेकिन क्या अब वो जख्म भर पाए हैं. आइए जानते हैं वहां के हालात.
पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद भी असर कायम है. टूरिस्ट की संख्या घटी है, बैसरन घाटी अब भी बंद है और सुरक्षा व्यवस्था सख्त बनी हुई है. QR कोड वेरिफिकेशन और बढ़ी निगरानी के बीच पर्यटन धीरे-धीरे लौट रहा है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा.
पहलगाम आतंकी हमले को एक साल बीत चुका है, लेकिन उस दिन का दर्द आज भी लोगों के दिलों में ताजा है. पर्यटकों को बचाने की कोशिश में जान गंवाने वाले आदिल हुसैन शाह की कहानी आज भी हर किसी को भावुक कर देती है. परिवार के लिए जिंदगी अब पहले जैसी नहीं रही.
पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरे हो गए. आज ही के दिन पिछले साल बैसरन घाटी में आतंकियों ने 25 हिंदुओं को उनका धर्म पूछकर मार दिया था. जिसके बाद फिर जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर किया. पीएम मोदी ने पहली बरसी पर मृतकों को श्रद्धांलि दी और कहा कि निर्दोष लोगों की मौत को भुलाया नहीं जा सकता.
Pahalgam attack anniversary: पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पूरा देश उन 26 बेकसूर नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, जिन्होंने आतंकवाद की क्रूरता में अपनी जान गंवाई थी. पहलगाम के प्रवेश द्वार पर, 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 26 (पर्यटकों और स्थानीय निवासियों) की याद में एक नया 'शहीद स्मारक' बनाया गया है, देखिए पहलगाम से ग्राउंड रिपोर्ट.
पंजाब में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात इंडियन आर्मी ने अपनी हवाई क्षमताओं को आधुनिक संचार प्रणाली 'आकाशतीर' से जोड़कर सरहद को अभेद्य बना दिया है.
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर कानपुर के शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या का दर्द फिर छलक उठा. उस आतंकी हमले में शादी के दो महीने के बाद ही पति शुभम द्विवेदी को खो चुकीं कानपुर की ऐशान्या ने बताया कि उन्होंने कई बार सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने के लिए समय मांगा, लेकिन अब तक मुलाकात नहीं हो सकी.
पहलगाम आतंकी हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी पर एक बड़ा खुलासा हुआ है. इंडियन एयरफोर्स ने मई 2025 में पाकिस्तान की एक बैलिस्टिक मिसाइल को हरियाणा के ऊपर हवा में ही मार गिराया था.
पहलगाम अटैक के 365 दिन पूरे हो गए. 1 वर्ष का ये समय कुछ परिवारों के लिए अत्यंत पीड़ा का समय रहा है. बीते एक वर्षों में जम्मू-कश्मीर में उम्मीद लौट रही है, लेकिन ये गुजरा समय न भरने वाला जख्म दे गया है.
पहलगाम हमले के एक साल बाद उस खूनी साजिश का मास्टरमाइंड साजिद जट्ट बेनकाब हो गया है. आजतक की इस एक्सक्लूसिव जांच में आतंकी की पहली तस्वीर और उसके पाकिस्तान में छिपे होने के पक्के दस्तावेज सामने आए हैं. लश्कर और TRF का यह मोस्ट वांटेड आतंकी 'अज्ञात हमलावरों' के डर से पाकिस्तान में नाम, हुलिया और पहचान बदलकर छिपता फिर रहा है. जांच में पता चला है कि ISI की मदद से वह सलीम लंगड़ा और 'हबीबुल्लाह तबस्सुम' जैसी नकली पहचान के साथ सेफ हाउस में लो-प्रोफाइल जिंदगी जी रहा है.
पहलगाम हमले के कथित मास्टरमाइंड साजिद जट्ट की पहचान सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक वो पाकिस्तान में नाम और हुलिया बदलकर छिपा है. जांच में फर्जी पहचान पत्र और अलग-अलग ठिकानों की जानकारी सामने आई है, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है.
कल पहलगाम हमले की बरसी है और आजतक एक्सक्लूजिव जानकारी मिली है. पहलगाम हमले का मास्टमाइंड नाम, पता और हुलिया बदलकर पाकिस्तान में छिपता फिर रहा है. NIA ने पहलगाम हमले की जांच के बाद अदालत में हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है उसमें हमलों का मास्टरमाइंड लश्कर/TRF के मोस्ट वांटेड आतंकी साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह साजिद को बताया गया है. आज तक की तहकीकात में पता चला है कि साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्ला साजिद का असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है. इस आतंकी पर NIA ने 10 लाख का इनाम रखा हुआ है.
पहलगाम के बैसरन में हुए भीषण आतंकी हमले के एक साल बाद, आज भी जख्म ताजा हैं. लेकिन 'चरवाहों की घाटी' अब धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़ी हो रही है. सुरक्षा के नए प्रोटोकॉल के बीच पर्यटक एक बार फिर उम्मीद बनकर पहुंचने लगे हैं.
पहलगाम में स्थित बैसरन घाटी पर हुए आतंकी हमले के बाद सरकार ने घाटी के कई सारे जो पर्यटन स्थल थे उन्हें सुरक्षा एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया था. पिछले एक साल में हालांकि कई सारे फिर से खोल दिए गए हैं. उनमें पहलगाम के कई सारे हैं, जिन्हें बंद किया गया था, वो खोल दिए गए हैं. लेकिन बैसरन घाटी अभी बंद है. जहां सरकार की तरफ से कड़ी सुरक्षा लगाई गई हैं.
पहलगाम आतंकी घटना को आज पूरा एक साल हो गया है. इस वक्त हम पहलगाम की मेन मार्किट में हैं, जो कि पहलगाम की एक पहचान है. इसलिए भी क्योंकि बॉलीवुड की कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है. ये मार्किट स्प्रिंग टूरिज्म की जान माना जाता था. ये वो समय है जब यहां टूरिस्ट आते थे. लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद से यहां टूरिज्म में काफी कमी देखने को मिल रही है.
पहलगाम हमले के करीब एक साल बाद, भारत हमले के पीड़ितों का शोक मना रहा है. इस बीच इंडियन आर्मी ने पाकिस्तान को एक तल्ख मैसेज भेजा है. यह भी याद दिलाया गया है कि अगर सीमाएं लांघी जाती हैं, क्या नतीजे होते हैं.
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में पर्यटकों को बचाते हुए मारे गए आदिल हुसैन शाह की पत्नी गुलनाज अख्तर एक साल बाद भी संघर्ष कर रही हैं. उन्होंने कहा कि उनके बिना जिंदगी अधूरी और मुश्किल हो गई है.
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकवादियों ने पर्यटकों पर गोलीबारी की, जिसमें 26 निर्दोष लोग मारे गए. इनमें 25 भारतीय पर्यटक और एक स्थानीय pony rider शामिल थे.
कश्मीर के पहलगाम हमले पर लश्कर-ए-तैयबा कमांडर अबू मूसा कश्मीरी के बयान ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उसने दावा किया कि इस हमले से पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय हैसियत बढ़ी और उसे अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता का मौका मिला. 26 लोगों की मौत वाले इस हमले को लेकर पहले से लगे आरोप अब और मजबूत हुए हैं. इससे पाकिस्तान की नीतियों, मंशा और वैश्विक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.