भारत के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में बसा एक छोटा-सा लेकिन बेहद सुंदर और मनमोहक शहर है पहलगाम (Pahalgam). यह स्थान जम्मू और कश्मीर राज्य के अनंतनाग जिले में स्थित है. यह समुद्र तल से लगभग 7,200 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है. यहां की वादियां, बर्फ से ढके पहाड़, कल-कल करती नदियां और हरे-भरे चरागाह मन को सुकून देते हैं.
यहां की लिद्दर नदी पहलगाम की जीवनरेखा है. यह नदी अपने ठंडे और साफ पानी के लिए मशहूर है. यहां लोग रिवर राफ्टिंग का मजा लेते हैं. वहीं बात करें बेताब वैली की तो इस घाटी का नाम फिल्म "बेताब" के नाम पर रखा गया, जिसकी शूटिंग यहां हुई थी. यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी सपने से कम नहीं. वहीं अरु वैली ट्रेकिंग के लिए लोकप्रिय है और यहां से कोलाहोई ग्लेशियर तक भी जाया जा सकता है. यहां स्थित चंदनवारी अमरनाथ यात्रा का प्रारंभिक बिंदु यही है. यहां गर्मियों में भी यहां बर्फ देख सकते हैं.
कश्मीरी दम आलू, रिस्टा, गुश्ताबा, और कहवा जैसी चीजें यहां के खाने में प्रमुख हैं. पहलगाम में कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और ढाबे हैं जहां आप पारंपरिक कश्मीरी खानपान का स्वाद ले सकते हैं.
पहलगाम सालभर सुंदर रहता है, लेकिनबर्फबारी का आनंद लेने के लिए दिसंबर से मार्च के बीच का समय बेस्ट रहता है.
एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले में हाफिज सईद के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर पाकिस्तान की साजिश और उसकी भूमिका का विस्तार से जिक्र किया है.
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अमरनाथ यात्रा 2026 के पहले जत्थे को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। “बम बम भोले” और “हर हर महादेव” के गगनभेदी जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का पहला दल कश्मीर घाटी की ओर प्रस्थान कर गया।
पाकिस्तान टू-फ्रंट वॉर में फंसता दिख रहा है. एक तरफ भारत के साथ सिंधु जल संधि पर तनाव बढ़ रहा है. दूसरी तरफ अफगानिस्तान से टीटीपी हमलों की मार झेल रहा है.
हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा के अलावा बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा पर निकलते हैं. 3 जुलाई से इस साल की अमरनाथ यात्रा शुरू होने जा रही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं बाबा बर्फानी के दर्शन के साथ-साथ वहां की स्वर्ग जैसी खूबसूरत जगहों का मजा भी लें.
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने यूएन सुरक्षा परिषद से अपील की है कि वो भारत पर सिंधु जल समझौते के कथित उल्लंघन को लेकर ध्यान दे. ये समझौता 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था, जो अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद सस्पेंड कर दिया गया था. इस हमले में 26 आम नागरिक मारे गए थे.
पाकिस्तान की ग्रे लिस्ट से छूटने के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर में अपना मुख्यालय फिर से बना लिया लेकिन FATF और APG एक-दूसरे पर जवाबदेही टालते रहे. सैटेलाइट इमेजरी और ईमेल से खुली वैश्विक आतंकी फंडिंग की यह बड़ी नाकामी.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद TRF के दावे और फिर यू-टर्न ने पाकिस्तान के डिजिटल नेटवर्क की पोल खोल कर रख दी. NIA की जांच में पाकिस्तान से जुड़े IP एड्रेस, टेलीग्राम चैनल और ऑनलाइन प्रोपेगेंडा नेटवर्क भी सामने आया है. पढ़ें पूरा खुलासा.
पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है. NIA जांच में सामने आया कि आतंकियों ने धर्म पूछकर लोगों को गोली मारी थी. हमले में TRF और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ दो लोकल मददगारों की भूमिका भी उजागर हुई. पढ़ें चार्जशीट में क्या खुलासे हुए?
NIA ने लश्कर/TRF के खूंखार आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ 'लंगड़ा' को मुख्य आरोपी बनाया. लाहौर में बैठकर उसने हमले को रियल टाइम में करवाया था. उसके पैर में नकली टांग है.
थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि अगर पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देता रहा तो उसे फैसला करना होगा कि वह भूगोल का हिस्सा रहना चाहता है या इतिहास बनना चाहता है.
7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों और 11 एयरबेस पर सटीक हमले किए. 72 घंटे में भारतीय वायु रक्षा ने 450 मिसाइलें रोकीं. चीन से मिला पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम ध्वस्त हो गया.
पहलगाम हमले के एक साल बाद भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने ऑपरेशन सिंदूर को स्वर्णिम बताया. 65% स्वदेशी हथियारों से पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमला कर दिया.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने स्वदेशी तकनीक से जमीन, आकाश और जल में सुरक्षा अभेद्य की है. तेजस, प्रचंड और आत्मनिर्भर उत्पादन के दम पर भारत अब बाहरी निर्भरता छोड़कर भविष्य की हर सैन्य चुनौती के लिए तैयार हो रहा है.
पहलगाम हमले में खुफिया विफलता, सुरक्षा ऑडिट की कमी और रिस्पांस टाइम जैसी 5 बड़ी चूकें रहीं. अब सरकार ऑपरेशन सिंदूर, डिजिटल सर्विलांस और सख्त कूटनीतिक कदमों से सुरक्षा अभेद्य बना रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो.
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत ने सीमा, हवा और समुद्री सुरक्षा में तकनीक व स्वदेशी क्षमता पर जोर बढ़ाया है. जानिए अब देश की रक्षा तैयारियों में क्या बड़े बदलाव हुए हैं.
पहलगाम हमले में 3 पाकिस्तानी आतंकियों और स्थानीय मददगारों का हाथ था. हाफिज सईद-मसूद अजहर ने पाकिस्तान से साजिश रची. एनआईए जांच और ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सरकार अब सुरक्षा अभेद्य बनाकर आतंकी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म कर रही है.
पहलगाम आतंकी हमले के बाद खुफिया विफलता, सुरक्षा चूक और धीमे रिस्पॉन्स पर सवाल उठे. जानिए पांच बड़ी कमियां और भविष्य के लिए भारत ने सुरक्षा रणनीति में क्या बदलाव किए.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ 72 घंटे में पूरा हुआ, लेकिन भारत लंबी लड़ाई की पूरी तैयारी के साथ गया था. उन्होंने इसे नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. पाकिस्तान पर आतंकवाद समर्थन का आरोप लगाया. तीनों सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई और स्वदेशी हथियारों की सफलता पर जोर दिया.
आज सबसे पहले हम आपको 'पहलगाम आतंकी हमले' की बरसी पर. उस खौफनाक, दर्दनाक और पूरे देश को कभी ना भूलने वाला जख्म देने वाली घटना का फ्लैशबैक दिखाएंगे... जिसने नाम और धर्म पूछकर निहत्थे, निर्दोष और मासूम लोगों बेरहमी से कत्ल कर दिया... महिलाओं के सामने उनकी मांग का सिंदूर पोंछ डाला... और बेहद खूबसूरत बैसरन घाटी को लहूलुहान कर दिया था। एक साल बाद इस कायराना करतूत की अनचाही यादें लोगों के जेहन में बिल्कुल ताजा हैं.. और इसकी टीस हिन्दुस्तान कभी भूल नहीं सकता.
कहते हैं हर जख्म भरने के लिए वक्त लगता है. एक साल पहले पहलगाम भी एक गहरे जख्म से गुजरा था. लेकिन क्या अब वो जख्म भर पाए हैं. आइए जानते हैं वहां के हालात.
पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद भी असर कायम है. टूरिस्ट की संख्या घटी है, बैसरन घाटी अब भी बंद है और सुरक्षा व्यवस्था सख्त बनी हुई है. QR कोड वेरिफिकेशन और बढ़ी निगरानी के बीच पर्यटन धीरे-धीरे लौट रहा है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा.