भारतीय शेयर बाजार में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है. बीते सप्ताह जहां सेंसेक्स-निफ्टी बुरी तरह क्रैश हुए नजर आए, तो अगले ही दिन तगड़ी छलांग भी लगाई. इन बीच लंबे समय बाद बाजार में लौटे विदेशी निवेशकों का मूड फिर से खराब हो गया है और सितंबर महीने में जोरदार बिकवाली करने के बाद अक्तूबर महीने में अब तक बाजार से मोटी रकम निकाल चुके हैं. ताजा आंकड़े को जोड़कर देखें, तो साल 2026 में अब तक FPIs की बिकवाली का आंकड़ा 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है.
अक्टूबर में अब तक इतनी निकासी
पीटीआई की रिपोर्ट में डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, बताया गया है कि भारतीय शेयर से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर महीने में अब तक इक्विटी से 44,166 करोड़ रुपये की निकासी की है, जिसे जोड़कर 2026 में अब तक एफपीआई आउटफ्लो 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है. इससे पहले सितंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों के बिकवाली की थी और उस महीने 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे.
बढ़ता जा रहा निकासी का आंकड़ा
गौरतलब है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लंबे समय बाद जुलाई अगस्त में भारतीय बाजार में वापसी करते हुए नजर आए थे. NSDL डेटा के अनुसार, FPI ने जुलाई में भारतीय इक्विटी में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जबकि इसके अगले महीने अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये भारतीय शेयरों में लगाए थे. लेकिन फिर सितंबर से इनके पैसे निकालने की रफ्तार तेज हुआ और अक्टूबर में बढ़ती दिखाई दे रही है.
आंकड़ों के अनुसार, हालिया बिकवाली के साथ 2026 में भारतीय इक्विटी से एफपीआई की निकासी 3.04 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो बीते पूरे साल की बिकवाली से कहीं ज्यादा है. बता दें कि 2025 के दौरान एफपीआई बिकवाली का आंकड़ा पूरे साल में 1.66 लाख करोड़ रुपये रहा था.
FPIs का मूड खराब होने के कारण
अब बात करते हैं कि आखिर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार से की जाने वाली इस ताबड़तोड़ बिकवाली का कारण क्या है? तो पीटीआई की रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने इसकी पीछे पहला कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, दूसरा कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और तीसरा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के हाई पर पहुंचना बताया है. इसके अलावा चौथा बड़ा कारण बताते हुए कहा है कि उत्तर एशियाई बाजारों में AI के नेतृत्व में आई तेजी से अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित हो रही है.
इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैकक के को-फाउंडर वेदांत गुप्ते का कहना है कि खाड़ी देशों से तेल सप्लाई जोखिम, डॉलर का भारतीय रुपये की तुलना में और मजबूत होने के साथ ही यूएस बॉन्ड यील्ड के हाई पर पहुंचने, क्रूड प्राइस हाइक समेत AI आधारित बाजारों की तेजी भले ही भारत-विशिष्ट कमजोरी का संकेत नहीं देते हैं, लेकिन उन बाजारों की ओर पूंजी के प्रवाह को दर्शाते हैं जहां ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक वर्तमान में अधिक मजबूत है.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि भारतीय बाजार के इस साल के खराब प्रदर्शन का मुख्य कारण एफपीआई द्वारा बड़े पैमाने पर की गई बिकवाली रही, जिसके चलते निफ्टी ने 2026 में अब तक 13.87 प्रतिशत का नकारात्मक रिटर्न दिया है. उनका कहना है कि एफपीआई के दृष्टिकोण से देखें, तो भारत से पैसा निकालना तर्कसंगत था, क्योंकि 10 साल के अमेरिकी बान्ड यील्ड पर रिस्क फ्री रिटर्न 5.2% से अधिक था. विजयकुमार ने आगे कहा कि अगर US Bond Yield हाई पर बने रहते हैं, तो एफपीआई बिकवाली जारी रखेंगे.