अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक एक बड़ा फैसला लिया और बीते शनिवार को ग्राहम अधिनियम के तहत रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को टालने का ऐलान कर दिया. इससे रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार भारत और चीन पर 100% टैरिफ का खतरा भी टल गया. लेकिन, ट्रंप के रूस को लेकर बदले इस रवैये ने बड़े सवाल खड़े कर दिए, तो Donald Trump के मंत्री अपनी-अपनी सफाई देते हुए नजर आ रहे हैं. पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने राष्ट्रपति के इस फैसले का बचाव किया, तो वहीं अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भी आगे आ गए. इस बीच दोनों ही मंत्रियों ने भारत को लेकर भी बड़े दावे किए हैं.
लगने वाला था 100% टैरिफ, फिर पलटी बाजी
बीते दिनों ही डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सीनेट से पास हुए 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' पर साइन किए थे, जो रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने के साथ ही ट्रंप को रूस के सबसे बड़े तेल-गैस खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की परमिशन देता है. इनमें सबसे आगे भारत और चीन जैसे देश हैं. सिर्फ इतना ही नहीं रूस से आने वाले कुछ सामानों पर 500% तक टैरिफ का प्रावधान भी इसमें शामिल है.
सब कुछ सेट था, लेकिन बीते शनिवार को अचानक ट्रंप प्रशासन की ओर से जारी एक कार्यकारी आदेश में ग्राहम एक्ट के तहत रूस पर लगाए जाने वाले कई प्रमुख प्रतिबंधों और टैरिफ प्रावधानों को छूट दे दी गई. इससे भारत-चीन पर 100% टैरिफ का खतरा भी टल गया. यहां बता दें कि ग्राहम एक्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में कुछ प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार भी मिलता है. हालांकि, तमाम मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो ट्रंप के पांव पीछे खींचने के पीछे कई बड़े कारण हैं.
US में बढ़ता एनर्जी प्राइस: ईरान युद्ध और ग्लोबल क्रूड सप्लाई में रुकावटों के चलते अमेरिकी में भी तेल-गैस की कीमतों में आग लगी नजर आई है. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ऊर्जा कीमतों पर अतिरिक्त दबाव के पक्ष में नही है.
ग्लोबल इकोनॉमी की स्थिति: अमेरिका ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंतित है, दरअसल, रूसी प्रतिबंधों के बाद भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातकों पर भारी टैरिफ लगाने से इंटरनेशनल ट्रेड पर असर पड़ता और इससे सीधे अमेरिकी इकोनॉमी भी प्रभावित होती.
ट्रंप के मंत्रियों की ये सफाई
Donald Trump ने रूस को प्रतिबंधों से छूट दी, तो अभी तक ग्राहम एक्ट को लेकर बड़े-बड़े बयान देने वाले उनके मंत्री भी सफाई देते हुए नजर आए. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्रंप के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अमेरिकी प्रशासन रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों के व्यापक आर्थिक प्रभावों की समीक्षा के लिए 60 दिन तक का समय लेना चाहता है. इसके जरिए राष्ट्रपति ट्रंप यह समझना चाहते हैं कि रूस पर प्रतिबंध लगाने और अन्य देशों पर टैरिफ लगाने का ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या असर होगा.
रुबियो के बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भी ट्रंप के फैसले के बचाव में उतरे और उन्होंने इसके पीछे तर्क देते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने प्रतिबंधों को खत्म नहीं किया है और कानून राष्ट्रपति को स्थिति का आकलन करने के लिए 60 दिन का समय देता है. उन्होंने कहा कि सिर्फ डीजल पर लगा प्रतिबंध ही हटाया गया है.
भारत को लेकर क्या बोले ट्रंप के मंत्री?
डोनाल्ड ट्रंप के रूस पर बैन लगाने के कदम से पीछे हटने के फैसले का बचाव करने के साथ ही उनके दोनों मंत्रियों ने भारत को लेकर भी बड़ी बात कही. एक ओर जहां मार्को रुबियो ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में मची उथल-पुथल का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार कई संघर्षों के दबाव में हैं, जिनमें US-Iran War, Hormuz Strait Tension और सऊदी अरब पर हूथी विद्रोहियों के हमले शामिल हैं. इससे वैश्विक तेल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं.
रुबियो के मुताबिक, ऐसे में भारत जैसे देश हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है और रूस से काफी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं, सिर्फ एक दिन में उनके लिए स्थिति बदलना मुश्किल है. संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार हैं.
स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका चाहता था कि यूरोपीय देश रूस के सबसे बड़े तेल खरीदार भारत और चीन पर सेकेंडरी सैंक्शन लगाएं, लेकिन यूरोपीय सहयोगियों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया. इसे लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका जब यूरोपीय देश खुद रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखे हुए हैं, तो अमेरिका को मॉस्को पर दबाव डालने का बोझ क्यों उठाना चाहिए.