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शनि जी की आरती

शनि जी की आरती

शनि जी की आरती खासतौर पर शनिवार के दिन गाई जाती है. मान्यता है कि श्रद्धा से आरती करने पर जीवन की परेशानियां कम होती हैं और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है. पारंपरिक आरती शनिदेव के स्वरूप, उनके वाहन और उन्हें प्रिय वस्तुओं जैसे तेल और तिल का वर्णन करती है.

शनि जी की आरती
शनि जी की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव....

 

श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी।
नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
जय जय श्री शनि देव....

 

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
जय जय श्री शनि देव....

 

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
जय जय श्री शनि देव....

 

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

 

-------समाप्त-------


 

समाप्त

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