हर साल मई के अंत और जून के शुरू में उत्तर भारत में भयंकर गर्मी और उमस पड़ने लगती है. तापमान 45-48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह अचानक नहीं, बल्कि खगोलीय, मौसमी और भूगर्भीय कारणों से होता है. आइए समझते हैं कि धरती से लेकर सूरज तक क्या बदलाव होते हैं.
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 23.5 डिग्री झुकी कर करती है. मई के अंत और जून के शुरू में सूर्य कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के ठीक ऊपर आ जाता है. इस समय उत्तरी गोलार्ध (जहां भारत है) सूर्य की ओर सबसे ज्यादा झुका होता है.
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान सूर्य की किरणें भारत के मैदानी इलाकों पर लगभग सीधी (90 डिग्री के करीब) पड़ती हैं. इससे जमीन प्रति वर्ग मीटर ज्यादा सौर ऊर्जा (Solar Insolation) प्राप्त करती है. दिन सबसे लंबे हो जाते हैं और रातें छोटी. नतीजा - जमीन तेजी से गर्म होती है. NASA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अध्ययनों में इसे प्री-मॉनसून मैक्सीमम हीटिंग पीरियड कहा जाता है.
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धरती पर क्या बदलाव होते हैं?
उमस क्यों बढ़ जाती है?
मई के अंत में मॉनसून की तैयारी शुरू हो जाती है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी भरी हवाएं उत्तर की ओर बढ़ने लगती हैं. इससे हवा में ह्यूमेडिटी बढ़ जाती है, लेकिन बारिश अभी नहीं होती. नतीजा - ज्यादा तापमान + ज्यादा ह्यूमेडिटी = बेहद असहनीय गर्मी. वैज्ञानिक इसे हीट इंडेक्स कहते हैं, जो असली तापमान से कहीं ज्यादा महसूस होता है.
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भारत में इतनी गर्मी क्यों?
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वैज्ञानिक शोध क्या कहते हैं?
ऑक्सफओर्ड यूनिवर्सिटी और IMD के स्टडी के अनुसार, मई-जून में सोलर रेडिएशन सबसे अधिक होता है. वेट बल्ब टेंपरेचर पर हुई स्टडीज (2022-2025) बताती हैं कि 45°C तापमान + 50-60% नमी में शरीर का तापमान नियंत्रित करना बहुत मुश्किल हो जाता है. नासा की अर्थ ऑब्जरवेटरी रिपोर्ट्स भी पुष्टि करती हैं कि Northern Hemisphere Summer Solstice (21 जून) के आसपास उत्तरी भारत में गर्मी चरम पर होती है.
जिम्मेदार कौन?
गर्मी का मुख्य जिम्मेदार प्रकृति का मौसमी चक्र है - सूर्य की स्थिति, पृथ्वी का झुकाव और मॉनसून से पहले का सूखा मौसम. लेकिन ग्लोबल वार्मिंग इसे और खतरनाक बना रहा है.
मई-जून की यह गर्मी भारत के लिए सालाना चक्र का हिस्सा है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण यह हर साल ज्यादा उग्र होती जा रही है. वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि अगर ग्लोबल वार्मिंग नहीं रोकी गई तो 45-50 डिग्री की हीटवेव सामान्य हो जाएगी.