हीटवेव की सीमा तब पूरी होती है जब किसी मौसम केंद्र का अधिकतम तापमान मैदानी इलाकों में कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय इलाकों में 37 डिग्री और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है. गर्मी के मौसम में जब मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर होता है तब हवा काफी गर्म हो जाती है, जिसके कारण लू लगने का खतरा बना रहता है (Heatwaves).
इस मौसम में भारत के दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में हीटवेव का खतरा बना रहता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) इस बीच रेड अलर्ट जारी करता रहता है.
दिल्ली, चंडीगढ़ और इन राज्यों के अन्य प्रमुख शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है.
यूरोप में बढ़ती भीषण गर्मी अब जानलेवा साबित हो रही है. 2026 की गर्मियों में 50 हजार से अधिक लोगों की मौत का अनुमान है, जिनमें करीब 32 हजार मौतें जलवायु परिवर्तन से जुड़ी हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, जीवाश्म ईंधन का बढ़ता इस्तेमाल तापमान को खतरनाक बना रहा है. बुजुर्गों के साथ युवाओं की जान पर भी गर्मी का खतरा बढ़ रहा है.
तुर्की की मशहूर सॉल्ट लेक में पानी की कमी ने चिंता बढ़ा दी है. कम बारिश और भूजल के ज्यादा इस्तेमाल से झील लगभग सूख गई. अब इसका असर फ्लेमिंगो के रहने की जगह, नमक के कारोबार और पर्यटन पर पड़ सकता है.
दुनिया में गर्मी का पैटर्न तेजी से बदल रहा है. 60 साल पहले साल में औसतन 5 हीट स्टॉर्म आती थीं, अब यह आंकड़ा 102 है. सबसे बड़ी हीट स्टॉर्म 367 दिन तक चली और धरती के 85% हिस्से तक पहुंची.
धरती पर खतरा सिर्फ बढ़ते तापमान तक सीमित नहीं है. हवा में गैसों की बढ़ती मात्रा, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ता समुद्र का जलस्तर हालात की गंभीरता दिखाते हैं. नई रिपोर्ट में 7 क्लाइमेट संकेत रिकॉर्ड स्तर पर मिले हैं.
स्लोवेनिया में कभी दो ग्लेशियर थे, लेकिन अब एक पूरी तरह गायब हो चुका है. आखिरी ग्लेशियर को बचाने के लिए बर्फ पर कंकड़ तक बिछाया गया, फिर भी पिघलना नहीं रुका. इसका असर नदियों और पीने के पानी पर भी पड़ सकता है.
15 अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और हिमपात ने मौसम का मिजाज बदल दिया है. उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ी है, जबकि महाराष्ट्र जैसे पश्चिमी हिस्सों में अक्टूबर में भी गर्मी बनी हुई है. दिल्ली में मूसलाधार बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया है. आइए जानते हैं आज 16 अक्टूबर को देश के अलग-अलग राज्यों में मौसम कैसा रहेगा.
समुद्र में बढ़ती गर्मी अब दुनिया के मौसम को बदलने का संकेत दे रही है. सुपर-डुपर अल-नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और अक्टूबर से दिसंबर के बीच समुद्र का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री तक ज्यादा पहुंचने का अनुमान है.
गर्मी बढ़ी, बारिश कम हुई और यूरोप की खेती का हिसाब बिगड़ गया. गेहूं, मक्का और जौ समेत अनाज का उत्पादन तेजी से घटा है. नए आकलन में किसानों को करीब €3.2 अरब के नुकसान का अनुमान लगाया गया है.
सुपर अल नीनो से अफ्रीका में गर्मी जानलेवा हो सकती है. अगले छह महीनों में नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड में करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है. सबसे ज्यादा खतरा नाइजीरिया को है, जहां 31,400 मौतें हो सकती हैं.
गर्मी बढ़ी तो स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर पिघलने लगे. 2026 में 5% से ज्यादा बर्फ खत्म हुई और 5 साल में करीब 20% बर्फ जा चुकी है. फिलहाल पिघली बर्फ पानी दे रही है, लेकिन आगे यही पानी कम पड़ सकता है.
इस बार अल-नीनो सिर्फ मौसम का मिजाज नहीं बदलेगा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में जानलेवा गर्मी बढ़ा सकता है. वैज्ञानिकों ने अगले कुछ महीनों में 4.5 लाख से ज्यादा अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है, जिसमें भारत भी शामिल है.
गर्मी अब सिर्फ ज्यादा नहीं, लंबी भी हो रही है. दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव पहले दस्तक दे रही हैं और देर से खत्म हो रही हैं. 45 साल के डेटा ने गर्मी के बदलते पैटर्न की एक नई तस्वीर सामने रखी है.
रिकॉर्ड गर्मी सिर्फ थर्मामीटर तक सीमित नहीं रही. अगस्त में यूरोप के कई हिस्सों में मिट्टी की नमी घटी, नदियों का जल प्रवाह कम हुआ और समुद्र का तापमान भी बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
अल-नीनो की बढ़ती ताकत ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. प्रशांत महासागर का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और अब 2027 में रिकॉर्ड गर्मी के साथ कई तरह के एक्सट्रीम मौसम का खतरा मंडरा रहा है.
सुपर अल-नीनो ने रिकॉर्ड स्तर की गर्मी बढ़ा दी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अभी पीक पर भी नहीं पहुंचा है. इसकी बढ़ती ताकत 2026-27 में वैश्विक तापमान, मौसम और भारत समेत कई देशों में बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है.
पाकिस्तान के सिंध में 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती गर्मी के बीच खजूर की तुड़ाई जारी है. खैरपुर के मजदूर सुबह से ही काम में जुट जाते हैं, लेकिन बढ़ता तापमान खेती और उनकी रोजी-रोटी दोनों के लिए चुनौती बन रहा है.
सर्दी आने वाली है, लेकिन इस बार ठंड का तेवर बदला-बदला हो सकता है. अल-नीनो मजबूत हुआ तो पारा सामान्य से ऊपर रह सकता है. चिंता यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि इसका असर 2027 की गर्मी को भी ज्यादा तेज बना सकता है.
ब्रिटेन में गुरुवार को इस साल का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जब पश्चिमी लंदन में तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह इस साल की पांचवीं हीटवेव का हिस्सा है, जो देश में लगातार बढ़ती गर्मी को दर्शाता है.
इंग्लैंड का करीब 71.3% हिस्सा सूखे की चपेट में है. कम बारिश और बढ़ती गर्मी ने पानी, खेती और वन्यजीवों पर असर डाला है. 4.5 करोड़ लोग प्रभावित हैं. 2.7 करोड़ लोगों पर पानी के इस्तेमाल की पाबंदी हैं.
यूरोप में इस सीजन की पांचवीं हीटवेव आने वाली है, जिससे ब्रिटेन और फ्रांस में तापमान तेजी से बढ़ने का अनुमान है. दक्षिण-पूर्वी फ्रांस में तापमान 40 डिग्री और इंग्लैंड में 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. 2026 अब तक दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल है.
नॉर्थ कोरिया में गर्मी बढ़ी तो सरकार ने लोगों को कुत्ते के मांस का सूप पीने की सलाह दे दी. दावा है कि यह पारंपरिक डिश शरीर को ताकत देती है. तेज गर्मी कम करने में मदद करती है.