हीटवेव की सीमा तब पूरी होती है जब किसी मौसम केंद्र का अधिकतम तापमान मैदानी इलाकों में कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस, तटीय इलाकों में 37 डिग्री और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है. गर्मी के मौसम में जब मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर होता है तब हवा काफी गर्म हो जाती है, जिसके कारण लू लगने का खतरा बना रहता है (Heatwaves).
इस मौसम में भारत के दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में हीटवेव का खतरा बना रहता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) इस बीच रेड अलर्ट जारी करता रहता है.
दिल्ली, चंडीगढ़ और इन राज्यों के अन्य प्रमुख शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है.
रिकॉर्ड गर्मी सिर्फ थर्मामीटर तक सीमित नहीं रही. अगस्त में यूरोप के कई हिस्सों में मिट्टी की नमी घटी, नदियों का जल प्रवाह कम हुआ और समुद्र का तापमान भी बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
अल-नीनो की बढ़ती ताकत ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. प्रशांत महासागर का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और अब 2027 में रिकॉर्ड गर्मी के साथ कई तरह के एक्सट्रीम मौसम का खतरा मंडरा रहा है.
सुपर अल-नीनो ने रिकॉर्ड स्तर की गर्मी बढ़ा दी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अभी पीक पर भी नहीं पहुंचा है. इसकी बढ़ती ताकत 2026-27 में वैश्विक तापमान, मौसम और भारत समेत कई देशों में बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है.
पाकिस्तान के सिंध में 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती गर्मी के बीच खजूर की तुड़ाई जारी है. खैरपुर के मजदूर सुबह से ही काम में जुट जाते हैं, लेकिन बढ़ता तापमान खेती और उनकी रोजी-रोटी दोनों के लिए चुनौती बन रहा है.
सर्दी आने वाली है, लेकिन इस बार ठंड का तेवर बदला-बदला हो सकता है. अल-नीनो मजबूत हुआ तो पारा सामान्य से ऊपर रह सकता है. चिंता यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि इसका असर 2027 की गर्मी को भी ज्यादा तेज बना सकता है.
ब्रिटेन में गुरुवार को इस साल का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जब पश्चिमी लंदन में तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह इस साल की पांचवीं हीटवेव का हिस्सा है, जो देश में लगातार बढ़ती गर्मी को दर्शाता है.
इंग्लैंड का करीब 71.3% हिस्सा सूखे की चपेट में है. कम बारिश और बढ़ती गर्मी ने पानी, खेती और वन्यजीवों पर असर डाला है. 4.5 करोड़ लोग प्रभावित हैं. 2.7 करोड़ लोगों पर पानी के इस्तेमाल की पाबंदी हैं.
यूरोप में इस सीजन की पांचवीं हीटवेव आने वाली है, जिससे ब्रिटेन और फ्रांस में तापमान तेजी से बढ़ने का अनुमान है. दक्षिण-पूर्वी फ्रांस में तापमान 40 डिग्री और इंग्लैंड में 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. 2026 अब तक दुनिया का तीसरा सबसे गर्म साल है.
नॉर्थ कोरिया में गर्मी बढ़ी तो सरकार ने लोगों को कुत्ते के मांस का सूप पीने की सलाह दे दी. दावा है कि यह पारंपरिक डिश शरीर को ताकत देती है. तेज गर्मी कम करने में मदद करती है.
एक नदी सूखी तो पूरे देश पर बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा. हंगरी में डानुबे नदी का जलस्तर गिरने से न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रभावित हुआ और सरकार को लोगों से बिजली बचाने की अपील करनी पड़ी.
यूरोप में भीषण गर्मी और लू ने कई देशों के तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इटली सरकार ने 27 प्रमुख शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है. ऑस्ट्रिया में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ज्यादा तापमान है. इस गर्मी और सूखे का असर बिजली उत्पादन, परिवहन और पर्यटन पर भी पड़ा है. पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग को इस स्थिति का मुख्य कारण मानते हैं.
गर्मी का ऐसा वार कि शेरनियां भी नहीं बच पाईं. टोक्यो जू में 39 डिग्री तापमान और उमस के बीच 3 शेरनियों की मौत हो गई, जिसकी जांच अब भी जारी है.
दुनिया रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के एक नए दौर में जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार सुपर अल-नीनो पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर बनेगा, जिसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है.
हीटवेव के बाद अब जंगल की आग नई चुनौती बनकर सामने आई है. तेजी से फैलती लपटों ने हजारों लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए मजबूर कर दिया.
सिर्फ 16 दिनों में 20 हजार से ज्यादा मौतें. फ्रांस से आए नए आंकड़ों ने दिखा दिया कि हीटवेव अब सिर्फ बढ़ता तापमान नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जान लेने वाला बड़ा क्लाइमेट क्राइसिस बन चुकी है.
फ्रांस में 17 जून से 2 जुलाई के बीच 21,674 मौतें दर्ज हुईं, जो सामान्य से 5,764 अधिक हैं. स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, भीषण गर्मी ने खासकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर गंभीर असर डाला है. एक्सपर्ट्स ने भविष्य में बेहतर तैयारी, समय पर चेतावनी और जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है.
जापान में बढ़ती गर्मी ने मौसम विभाग की शब्दावली बदल दी है. 40°C पार करने वाले दिनों के लिए अब नई 'ब्रूटली हॉट डे' कैटेगरी बनाई गई है, जो लगातार बढ़ते तापमान की गंभीरता को दिखाती है.
भारत के अधिकांश हिस्सों में सूखा पड़ रहा है, लेकिन प्रशांत महासागर में मौसमी सिस्टम बन रहे हैं. अगर ये बंगाल की खाड़ी पहुंचे तो 18-25 जुलाई में मॉनसून की वापसी हो सकती है.
फ्रांस में तीन न्यूक्लियर रिएक्टर बंद करने पड़े. वजह थी बढ़ती गर्मी और नदियों का बढ़ता तापमान. अब सवाल है कि क्या भारत के परमाणु बिजलीघरों के सामने भी कभी ऐसी स्थिति आ सकती है?
IITM पुणे की नई स्टडी में खुलासा हुआ कि भारत के मॉनसून की 25% बारिश हवा में ही उड़ जाती है. पश्चिमी घाट क्षेत्र में यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है.
गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही, मौतों का आंकड़ा भी बढ़ा रही है. यूरोप में जून के आखिरी सप्ताह में 10 हजार से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज होने के बाद वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है.