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कितनी गर्मी सह सकती है इंसान की बॉडी? हीट स्ट्रोक कितना खतरनाक

इंसानी शरीर सामान्य रूप से 37°C तापमान रखता है. 45°C से ऊपर गर्मी और उमस में शरीर ठंडा नहीं हो पाता. 40-43°C कोर टेम्प्रेचर पर हीट स्ट्रोक होता है. कुछ घंटों में मौत का खतरा बढ़ जाता है.

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गर्मी ज्यादा हो रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि इंसानी शरीर कितना तापमान सह सकता है. (Photo: Getty)
गर्मी ज्यादा हो रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि इंसानी शरीर कितना तापमान सह सकता है. (Photo: Getty)

गर्मी के मौसम में जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर पहुंच जाता है, तो लोग डर जाते हैं. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि मानव शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता सीमित है. इससे ऊपर जाने पर शरीर का तापमान कंट्रोल सिस्टम फेल होने लगती है, जिससे हीट स्ट्रोक और मौत का खतरा हो जाता है. 

मानव शरीर का सामान्य कोर टेम्प्रेचर यानी अंदरूनी तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रहता है. शरीर पसीने, सांस और ब्लड सर्कुलेश के जरिए खुद को ठंडा रखता है. 

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वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, वेट बल्ब टेम्प्रेचर (Wet Bulb Temperature) सबसे महत्वपूर्ण माप है. यह तापमान और नमी दोनों को ध्यान में रखता है. पुराने रिसर्च (Sherwood और Huber, 2010) के अनुसार 35°C वेट बल्ब टेम्प्रेचर में 6 घंटे तक रहने पर शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता. 

हाल के शोध (2022-2025) बताते हैं कि वास्तविक सीमा इससे भी कम है. स्वस्थ युवाओं के लिए 30-31°C वेट बल्ब टेम्प्रेचर पर ही शरीर ठंडा नहीं हो पाता है. सूखी गर्मी में यह सीमा और कम (25-28°C) हो सकती है.

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Human body heat tolerance

45 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर तापमान पड़ने पर क्या होता है?

जब हवा का तापमान 45°C पार कर जाता है, खासकर उमस के साथ, तो शरीर पर बहुत दबाव पड़ता है. 

  • शुरुआती प्रभाव: पसीना ज्यादा आने लगता है. दिल की धड़कन तेज हो जाती है. थकान, चक्कर, सिरदर्द और मांसपेशियों में ऐंठन शुरू हो सकती है. 
  • हीट स्ट्रोक: शरीर का कोर टेम्प्रेचर 40°C या उससे ऊपर पहुंचने पर हीट स्ट्रोक होता है. लक्षण हैं - तेज बुखार, उल्टी, भ्रम, बेहोशी, पसीना बंद होना और दौरे पड़ना.
  • 45-47°C पर: अगर नमी ज्यादा हो तो शरीर का ठंडा होने का तरीका लगभग बंद हो जाता है. रक्त गाढ़ा हो जाता है. किडनी और दिल पर बोझ बढ़ता है. मस्तिष्क को नुकसान पहुंच सकता है.

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कितने तापमान और कितने समय में मौत हो सकती है?

  • कोर बॉडी टेम्प्रेचर 40.5-41°C: हीट स्ट्रोक शुरू, तुरंत इलाज जरूरी.
  • 42-43°C: मस्तिष्क, लीवर, किडनी और दिल को स्थायी नुकसान. कई घंटों तक यह स्थिति रहने पर मौत का खतरा बहुत ज्यादा.
  • 43°C से ऊपर: ज्यादातर मामलों में घातक. मौत का समय व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, नमी और एक्सपोजर पर निर्भर करता है.

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि 45°C+ तापमान और हाई ह्यूमेडिटी में कुछ घंटों (2-6 घंटे) के लगातार एक्सपोजर से स्वस्थ व्यक्ति को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है. बुजुर्गों, बच्चों, हृदय रोगियों और मोटापे वाले लोगों में यह समय और कम होता है. क्लासिक हीट स्ट्रोक में मौत दर 10-65% तक हो सकती है.

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किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, हृदय-किडनी रोगी, डायबिटीज वाले और जो लोग बाहर काम करते हैं जैसे- मजदूर, किसान, खेलने वाले सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं. ग्लोबल वार्मिंग के कारण ऐसे मामले बढ़ रहे हैं.

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गर्मी से बचाव के उपाय 

  • दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलें- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक घर के अंदर रहें.
  • पानी और तरल पदार्थ खूब पिएं - सामान्य पानी, नींबू पानी, ORS या छाछ. पेशाब हल्का पीला होना चाहिए.
  • ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें - सूती कपड़े बेहतर, सिर पर टोपी या छाता इस्तेमाल करें.
  • ठंडी जगह पर समय बिताएं - पंखा, कूलर या एसी का इस्तेमाल करें. रात में खिड़कियां खोलकर घर को ठंडा करें.
  • भारी काम से बचें - व्यायाम या मेहनत दोपहर में न करें. धीरे-धीरे शरीर को गर्मी का आदी बनाएं. 
  • विशेष सावधानी - बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों पर नजर रखें। लक्षण दिखते ही डॉक्टर के पास जाएं.
  • हीट इंडेक्स चेक करें - सिर्फ तापमान नहीं, नमी के साथ फील्स लाइक तापमान देखें. 103°F+ हीट इंडेक्स पर खतरा बहुत बढ़ जाता है.

वैज्ञानिक शोध स्पष्ट बताते हैं कि 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का तापमान, खासकर उमस के साथ, इंसान के लिए बेहद खतरनाक है. शरीर कुछ देर तक लड़ सकता है, लेकिन लंबे समय तक एक्सपोजर में कोर टेम्प्रेचर बढ़ने से अंग फेल हो जाते हैं और मौत हो सकती है. सावधानी और समय पर उपाय से हर गर्मी से मौत को रोका जा सकता है. ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में खुद को और अपने परिवार को गर्मी से बचाना अब जरूरत बन गया है. 

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