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'क्लाइंट जाएं तो जाएं, वीकेंड पर काम नहीं होगा'... इस ऑफिस का रूल वायरल

क्या कोई कंपनी अपने कर्मचारियों की छुट्टी बचाने के लिए क्लाइंट्स छोड़ सकती है? एक बिजनेसवुमन ने ऐसा करके दिखाया. अब उनकी लिंक्डइन पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है.

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क्लाइंट गए, लेकिन फैसला नहीं बदला ( सांकेतिक तस्वीर-Pexel)
क्लाइंट गए, लेकिन फैसला नहीं बदला ( सांकेतिक तस्वीर-Pexel)

आज की कॉर्पोरेट दुनिया में जहां कई कंपनियों में देर रात तक काम करना और वीकेंड पर भी लैपटॉप खोलना आम बात हो गई है, वहीं एक बिजनेसवुमन ने बिल्कुल उल्टा फैसला लिया. उन्होंने साफ कह दिया कि शाम 6 बजे के बाद उनकी कंपनी में कोई काम नहीं होगा और वीकेंड पर कर्मचारियों को ऑफिस के लिए परेशान नहीं किया जाएगा. इस फैसले की वजह से कुछ क्लाइंट्स ने उनकी कंपनी छोड़ दी, लेकिन उन्होंने अपने नियम नहीं बदले. अब उनकी लिंक्डइन पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है.

मुंबई में जन्मीं सारा शैम चौथी पीढ़ी की बिजनेसवुमन हैं. उनका परिवार करीब 130 साल पुराने एंटीक कारोबार से जुड़ा है. बाद में उन्होंने दुबई की लग्जरी इंटीरियर डिजाइन कंपनी Jea की सह-स्थापना की. हाल ही में उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी कंपनी के वर्क कल्चर को लेकर एक पोस्ट लिखी, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा.

पहले खुद भी देर रात तक करती थीं काम

सारा ने बताया कि करियर की शुरुआत में उन्हें लगता था कि अच्छा काम वही होता है, जिसके लिए रातभर ऑफिस में बैठना पड़े. डेडलाइन पूरी करने के लिए वह देर रात तक काम करती थीं. कई बार बच्चों के साथ डिनर छूट जाता था और शनिवार-रविवार भी ऑफिस के काम में निकल जाता था.

लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि सबसे अच्छे डिजाइन और नए आइडिया हमेशा उन कर्मचारियों से आए, जिन्हें पूरा वीकेंड आराम करने और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिला.

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देखें पोस्ट

'क्रिएटिविटी नल नहीं, कुआं है'

अपनी पोस्ट में सारा ने लिखा, "क्रिएटिविटी नल की तरह नहीं है, जिसे जब चाहो खोल दो और पानी आने लगे. यह एक कुएं की तरह है. अगर उसे लगातार खाली करते रहेंगे और आराम नहीं देंगे, तो वह सूख जाएगा."

उनका मानना है कि लगातार काम करने से कर्मचारी अचानक नहीं थकते, बल्कि धीरे-धीरे उनकी रचनात्मकता खत्म होने लगती है. इसका असर उनके काम की गुणवत्ता पर भी पड़ता है.

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कंपनी में बना दिए ये सख्त नियम

इसी सोच के बाद सारा ने अपनी कंपनी में कुछ नियम लागू कर दिए.

सुबह 9 बजे काम शुरू होता है.
शाम 6 बजे ऑफिस बंद हो जाता है.
हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम होता है.
वीकेंड पर कोई कॉल या मीटिंग नहीं होती.
रविवार को कोई डेडलाइन नहीं रखी जाती.

अगर किसी प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो कर्मचारियों से ओवरटाइम कराने के बजाय एक और डिजाइनर को टीम में शामिल किया जाता है.

क्लाइंट गए, लेकिन फैसला नहीं बदला

सारा ने बताया कि उनके इस फैसले की वजह से कुछ क्लाइंट्स ने कंपनी छोड़ दी. उन्हें ऐसी टीम चाहिए थी, जो शनिवार-रविवार भी फोन उठाए और देर रात तक काम करे. लेकिन सारा ने साफ लिखा कि मैंने क्लाइंट्स को जाने दिया, लेकिन अपने नियम नहीं बदले.

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सोशल मीडिया पर हो रही तारीफ

सारा की लिंक्डइन पोस्ट पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी. कई यूजर्स ने कहा कि भारत समेत दुनिया भर में कंपनियों को अब वर्क-लाइफ बैलेंस को गंभीरता से लेना चाहिए. कुछ लोगों ने लिखा कि अच्छी क्रिएटिविटी और बेहतर नतीजे तभी मिलते हैं, जब कर्मचारियों को पर्याप्त आराम और निजी जिंदगी के लिए समय मिले.

सारा शैम की यह पोस्ट ऐसे समय में वायरल हुई है, जब दुनिया भर में लंबे वर्किंग ऑवर्स, बर्नआउट और वर्क-लाइफ बैलेंस पर बहस चल रही है. उनकी कहानी एक सवाल छोड़ जाती है.क्या बेहतर काम के लिए ज्यादा घंटे जरूरी हैं, या फिर आराम करने वाली टीम ही सबसे अच्छा काम करती है?

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