मध्य प्रदेश में महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को आजतक का विशेष कार्यक्रम 'आजतक धर्म संसद' आयोजित किया गया. इसके खास सत्र 'सत्य ही शिव है' में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर आए और लोगों से महाकाल की महत्ता पर तमाम चर्चाएं कीं. उन्होंने अपने बचपन, महाकाल से जुड़े आध्यात्मिक लगाव और सिंहस्थ से जुड़े दशकों पुराने अनुभव साझा किए.
'स्वयंसेवक से सीएम तक... हर भूमिका में मिला सिंहस्थ की सेवा करने का मौका'
उन्होंने कहा कि उज्जैन में शासन या प्रशासन नहीं, बल्कि केवल भक्ति का भाव चलता है. मुख्यमंत्री ने बताया कि स्काउट-गाइड के स्वयंसेवक से लेकर विधायक और अब मुख्यमंत्री तक, उन्हें हर भूमिका में सिंहस्थ की सेवा करने का अवसर मिला है, जिसे उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद बताया.
'उज्जैन प्राचीन काल से रही है सम्राटों की नगरी'
सीएम मोहन यादव का बचपन उज्जैन में बीता है. उनसे सवाल पूछा गया कि 'जब आप यहां आते हैं, तो आपके भीतर प्रशासनिक भूमिका अधिक हावी रहती है या एक शिवभक्त का जुनून?' तो इसके जवाब में सीएम ने कहा कि, 'यहां बाबा महाकाल की नगरी में न कोई शासन है, न कोई प्रशासन. यहां हर व्यक्ति भक्ति के भाव से समर्पित है. सभी 'महाकाल महाराज की जय!' का ही नारा लगाते हैं.

इसी जवाब के विस्तार में उन्होंने उज्जैन की मान्यता से जुड़े भ्रम पर भी अपनी राय जाहिर की. उनसे पूछा गया कि 'आपसे पहले कोई भी प्रशासनिक पद पर बैठा व्यक्ति यहां आकर स्थायी रूप से नहीं रहा' तो सीएम ने कहा कि, यह कुछ भ्रम वाली बात है. बल्कि उज्जैन में तो केवल प्रशासन नहीं, शासन करने वाले भी रहे हैं. जितने समर्थ राजा उज्जैन में हुए, उतने शायद दुनिया में कहीं नहीं हुए.
सम्राट विक्रमादित्य, राजा भोज, उदयादित्य, ये सभी उज्जैन से जुड़े रहे. सम्राट अशोक भी यहां लगभग 10 वर्ष तक युवराज के रूप में रहे. उस समय पाटलिपुत्र में सम्राट रहते थे और उज्जैन में युवराज का निवास होता था.
बाद के समय में महाराज सिंधिया और महादजी सिंधिया का जो साम्राज्य दिखाई देता है, उसकी राजधानी भी उज्जैन रही. राणोजी और महादजी सिंधिया के समय में भी उज्जैन का विशेष महत्व था. खैर, कभी-कभी कुछ बातें चल पड़ती हैं, जिनका कोई इलाज नहीं होता. वैसे भी 1947 के बाद राजा-महाराजाओं का स्वरूप समाप्त हो गया, लेकिन परमात्मा की कृपा से हमने इस भ्रम को दूर करने का प्रयास किया. हमने स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है.
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'हम सब महाकाल की संतान तो पिता से डर कैसा'
उन्होंने कहा कि 'जब हम सब इस ब्रह्मांड में बाबा महाकाल की संतान हैं. जब हम उनके पुत्र समान हैं, तो फिर पिता से कैसा भय? पिता का स्नेह और आशीर्वाद तो सदैव मिलता है. भगवान हमारे माता-पिता के समान हैं. उनकी छत्रछाया में रहकर और अधिक ऊर्जा मिलती है, आनंद मिलता है. फिर डर किस बात का?
आगे सीएम मोहन यादव ने बताया कि, वह 1980 के दशक में स्काउट- गाइड के स्वयंसेवक के रूप में भी कुंभ में सेवा करते थे. उस समय का अनुभव आज मुख्यमंत्री के रूप में सिंहस्थ की तैयारियों में काफी मदद करता है. उन्होंने कहा- इसके बाद 1992 के सिंहस्थ में मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय मंत्री था. उस समय केंद्रीय समिति में रहते हुए, बाबूलाल जैन, जो उस समय प्रभारी मंत्री थे, उनके साथ सिंहस्थ में सेवाएं देने का अवसर मिला.

बाद में वर्ष 2004 में उज्जैन विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनने के बाद भी सिंहस्थ में अपनी भूमिका निभाई. वर्ष 2016 में मैं उज्जैन दक्षिण विधानसभा का विधायक था. उस समय भी सिंहस्थ के आयोजन में सक्रिय रूप से कार्य किया. उज्जैन शहर में दो ही विधानसभा क्षेत्र हैं—उत्तर और दक्षिण. उस समय विधायक के रूप में जिम्मेदारी निभाई. अब बाबा महाकाल की कृपा से एक बार फिर मुख्यमंत्री के रूप में सिंहस्थ में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है. यह मेरे लिए सौभाग्य और बाबा का आशीर्वाद है.