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चार हाईकोर्ट्स को मिले 30 नए जज, लंबित मुकदमों के निपटारे में आएगी तेजी

मद्रास, कलकत्ता, कर्नाटक और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जजों की कमी दूर करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है. 30 नए जजों में 20 अधिवक्ता और 10 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं. सबसे ज्यादा 15 नियुक्तियां मद्रास हाईकोर्ट में हुई हैं. माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों से लंबित मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी और न्यायिक कामकाज का बोझ कम होगा.

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मद्रास हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा 15 जजों की नियुक्ति हुई है (सांकेतिक तस्वीर)
मद्रास हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा 15 जजों की नियुक्ति हुई है (सांकेतिक तस्वीर)

केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय ने देश के चार प्रमुख हाईकोर्ट्स में 30 नए जजों की नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है. कानून मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक इन नियुक्तियों में 20 अधिवक्ता (वकील) और 10 न्यायिक अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें जज और अतिरिक्त जज बनाया गया है. राष्ट्रपति ने इनकी नियुक्ति का परवाना जारी कर दिया है. सोमवार तक सभी के शपथ ग्रहण कर पदभार संभालने की उम्मीद है.

मद्रास हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा 15 जजों की नियुक्ति हुई है. इनमें 5 स्थायी जज और 10 अतिरिक्त जज शामिल हैं.

वरिष्ठ वकील गोविंदराजन कृष्णास्वामी, रजनीश पथियिल, रमेश नटराजन, जी के मुथुकुमार, रामकृष्ण राजेश विवेकानंदन को स्थायी जज और रविकुमार शंकरनारायणन, दिलीप कुमार नागराजन, एलप्पन मनोहरन शामिल हैं. न्यायिक अधिकारियों से पदोन्नत होकर मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज बनने वालों में डॉ पी मुरुगन, एमडी सुमति, एस अल्ली, सी तिरुमगल, षणमुगम कार्तिकेयन, मुरुगेशन बलूचामी और एन गुणसेकरन शामिल हैं. 

कलकत्ता हाईकोर्ट में नियुक्त कुल 8 अतिरिक्त जजों में वरिष्ठ वकील आर्यक दत्त, अतरूप बनर्जी, संदीप कुमार डे, पार्थ प्रतिम रॉय, सुदीप देब, अनुज सिंह, अर्जुन रे मुखर्जी और रिशाद मेदोरा शामिल हैं.

कर्नाटक हाईकोर्ट में नियुक्त होने वाले  6 अतिरिक्त जजों में वरिष्ठ वकील राघवेंद्र सीताराम श्रीवास्तव, हेमा कुलकर्णी, सुब्रमण्य रंगराव, तड़ागवाड़ी प्रकाश विवेकानंद, प्रमोद बक्केश्वर और शांति भूषण होंबेगौड़ा शामिल हैं. 

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील अमित लाहोटी को अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया है.

ये नियुक्तियां भारत के राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की सलाह से की गई हैं.

इस बड़े कदम से इन चारों राज्यों की अदालतों में जजों के खाली पदों को भरने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिलेगी.

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