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कब किसी को हिरासत में ले सकती है पुलिस? क्या कहता है कानून

जानते हैं उन नियमों के बारे में जिनके आधार पर पुलिस किसी को हिरासत में ले सकती है और उसके बाद उन पर कार्रवाई कर सकती है.

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दिल्ली पुलिस की ओर से 10 अक्टूबर को कई लोगों को हिरासत में लिया गया था. (Photo: PTI)
दिल्ली पुलिस की ओर से 10 अक्टूबर को कई लोगों को हिरासत में लिया गया था. (Photo: PTI)

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर की गई पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर बसों में बैठाने और पुलिस थानों में ले जाने की तस्वीरों ने हिरासत और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस छेड़ दी है. आरोप है कि कुछ लोगों को ट्रेनों से उतारकर और कुछ को उनके घरों से हिरासत में लिया गया. इससे भी नाराजगी बढ़ी है और पुलिस की कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं. रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर एक विशेष सुनवाई की, जो अपने आप में असाधारण थी. वकीलों ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन लोगों को हिरासत में लेकर शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन कर रही है, जो उन इलाकों से भी दूर थे जहां पुलिस ने प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे.

कोर्ट ने ये भी कहा कि प्रतिबंधित इलाकों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लिया जा सकता. लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और उनसे शांति बनाए रखने का वादा करने वाले बॉन्ड पर हस्ताक्षर करवाने के लिए किन कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल कर रही है?

क्या हैं कानूनी प्रावधान?

पुलिस की कार्रवाई को समझने के लिए दो कानूनी प्रावधान अहम हैं. पहला, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126, जिसके तहत किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने की कार्यवाही की जा सकती है. दूसरा, दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65, जो पुलिस के निर्देशों का पालन करने और निर्देश नहीं मानने वाले लोगों को हटाने से संबंधित है. ये दोनों प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत होने वाली एहतियातन हिरासत से अलग हैं. 

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एनएसए एक ज्यादा गंभीर कानून है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. बीएनएसएस की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने के मामले में प्रदर्शनकारियों को 24 घंटे से कम समय के लिए हिरासत में रखा जाता है. आमतौर पर प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शन स्थल से हिरासत में लेकर किसी दूसरी जगह छोड़ दिया जाता है, जो उस जगह से दूर होती है.

शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड

बीएनएसएस की धारा 126 कहती है कि अगर किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को जानकारी मिलती है कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ सकता है या ऐसा गलत काम कर सकता है जिससे इन स्थितियों के पैदा होने की आशंका हो, तो मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति से जवाब मांग सकता है. उससे पूछा जा सकता है कि उसे शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड या जमानती बॉन्ड भरने का आदेश क्यों न दिया जाए. मजिस्ट्रेट एक साल तक की अवधि के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दे सकता है.

इस प्रावधान के तहत कार्यवाही उस स्थिति में भी शुरू की जा सकती है, जब शांति भंग होने की आशंका वाली जगह मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आती हो या ऐसा करने की आशंका वाला व्यक्ति उस क्षेत्र में मौजूद हो. यह जरूरी नहीं है कि जिस जगह शांति भंग होने की आशंका है, वह भी उसी मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में हो. हालांकि, कार्यवाही शुरू करने की शक्ति का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपने आप बॉन्ड भरने का आदेश दे दिया जाए.

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क्या कहती है दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65?

दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत हर व्यक्ति को पुलिस अधिकारी के उन उचित निर्देशों का पालन करना होता है, जो वह इस कानून के तहत अपनी ड्यूटी निभाते हुए देता है.

अगर कोई व्यक्ति ऐसे निर्देश का विरोध करता है, उसे मानने से इनकार करता है या उसका पालन नहीं करता, तो पुलिस अधिकारी उसे वहां से हटा सकता है. इसके बाद उसे मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है. हालांकि, मामूली मामलों में पुलिस उसे तब छोड़ सकती है, जब उसे हटाने की जरूरत पैदा करने वाली परिस्थितियां खत्म हो जाएं.

इस प्रावधान के मुताबिक, व्यक्ति को वहां से हटाए जाने के 24 घंटे के भीतर या तो मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा या उसे रिहा करना होगा.

जिन इलाकों में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होते हैं, वहां प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और दूसरी जगह ले जाने के लिए अक्सर इस प्रावधान का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, यह प्रावधान पुलिस के उचित निर्देशों का पालन करने और ऐसा नहीं करने वाले लोगों को हटाने से संबंधित है. इसमें अपने आप किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने की प्रक्रिया तय नहीं की गई है. इसके लिए BNSS की धारा 126 के तहत अलग कार्यवाही होती है.
 

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