तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने पिछली DMK सरकार के दौरान प्रदर्शनकारी किसानों और टीचरों के खिलाफ सभी आपराधिक मुकदमों को वापस लेने का ऐलान किया है. उन्होंने विधानसभा में पूर्व एमके स्टालिन सरकार पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ 'अमानवीय' व्यवहार करने का आरोप लगाया.
मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि मई 2021 से 2026 के बीच कई प्रदर्शनकारी किसानों और टीचरों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे. मुकदमे लंबित होने के कारण कई लोगों को आज भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
सीएम विजय ने कहा, 'ये सरकार किसानों, टीचरों और उनकी जायज मांगों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी. इस कदम से लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूती मिलेगी और आम जनता और सरकार के बीच विश्वास और गहरा होगा.'
सिपकोट और परंदूर एयरपोर्ट विरोध के मामले होंगे खत्म
मुख्यमंत्री ने किसानों को राज्य की 'रीढ़ की हड्डी' बताया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सिपकोट औद्योगिक विकास परियोजनाओं और प्रस्तावित परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों पर अमानवीय तरीके से मामले दर्ज किए गए थे.
उन्होंने आगे कहा, 'टीचरों ने भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन उन पर मामले दर्ज किए गए जो आज भी लंबित चल रहे हैं.' सरकार ने इन मुकदमों के कारण प्रभावित लोगों की मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए सभी दर्ज मामलों को वापस लेने का फैसला किया है.
नीट और NLC विरोध प्रदर्शनों के केस भी वापस लेने की मांग
तमिलनाडु सरकार के इस फैसले के बाद दूसरे राजनीतिक दलों ने भी नई मांगें रखी हैं. CPI ने विजय सरकार से नीट परीक्षा का विरोध करने वाले छात्रों और लोगों पर दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की डिमांड की है.
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वहीं, PMK ने भी मुख्यमंत्री विजय से नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन (NLC) के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामले रद्द करने की मांग की है. इस पर राज्य के कानून मंत्री निर्मल कुमार ने कहा कि सरकार इन मांगों पर विचार करेगी.