भारत में भी अब 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट आने की बात चल रही है. पॉलीमर नोट यानी जो प्लास्टिक जैसे दिखते हैं और कई देशों के नोट ऐसे ही हैं. अब इन नोटों को बनाने पर काम चल रहा है, लेकिन इन्हें बनाने को लेकर खास शर्त ये है कि इनमें एनिमल फैट का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर एनिमल फैट की बात क्यों आई और क्या दूसरे देशों में करेंसी बनाने में एनिमल फैट का इस्तेमाल होता है? तो जानते हैं किन-किन देशों में नोट बनाने में एनिमल फैट का इस्तेमाल होता है और इसके पीछे की वजह क्या है?
ब्रिटेन में एनिमल फैट पर हुआ था विवाद
कुछ साल पहले 2017 में ब्रिटेन में करेंसी में एनिमल फैट के इस्तेमाल को लेकर बवाल हुआ था. उस दौरान जब लोगों को पता चला कि करेंसी में एनिमल फैट है तो काफी विवाद हुआ. इसके बाद हिंदू धर्म के लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई और कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है क्योंकि इससे भावनाएं आहत होती हैं. खासकर मंदिरों में जब आप दान देते हैं और आशीर्वाद मांगते हैं, तो आपको पता होता है कि दान किया गया पैसा दूषित है.
इसके बाद बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन बाद बैंक ऑफ इंग्लैंड ने यह स्वीकार कर लिया है कि पॉलीमर के आधार में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर पेलेट्स में थोड़ी मात्रा में एनिमल फैट मौजूद होता है. हालांकि, भारी विरोध और ऑनलाइन याचिकाओं के बाद भी बैंक ऑफ इंग्लैंड ने स्पष्ट किया कि विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाला पाम ऑयल पर्यावरण के अनुकूल नहीं है और इसे बदलने की प्रक्रिया काफी महंगी पड़ेगी, इसलिए उन्होंने नोटों में एनिमल फैट के अंशों को बनाए रखने का निर्णय लिया था. यानी ब्रिटेन में करेंसी नोट में एनिमल फैट का इस्तेमाल होता है.
किन-किन देशों में होता है यूज?
वैसे सिर्फ ब्रिटेन ही एक ऐसा देश नहीं है, जहां के करेंसी नोट में एनिमल फैट मिला होता है. इसके अलावा कई ऐसे देश हैं, जिनके पॉलीमर नोट में एनिमल फैट का इस्तेमाल किया जाता है. इन देशों में ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड, कनाडा, मलेशिया, सिंगापुर जैसे कई देश शामिल हैं.
ऐसा किया क्यों जाता है?
अब जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है. दरअसल, पॉलीमर नोट्स में एनिमल फैट से मिलने वाले टैलो का इस्तेमाल होता है. वैसे टैलो को सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता है. कुछ ऐसे कैमिकल इसमें यूज किए जाते हैं, जिनमें टैलो होता है और वो एनिमल फैट की मदद से बनता है. ऐसा करने की वजह इसकी सही प्रोसेसिंग करनी होती है. इससे घर्षण कम होता है और मशीन में मैटेरियल के फ्लो को बेहतर बनाया जाता है.
इससे जब नोट बनते हैं तो नोट की शीट्स पर नोट चिपके नहीं रहते हैं और प्रिटिंग-कटिंग प्रोसेसिंग में स्टीकिंग यानी चिपकने की दिक्कत नहीं होती है. इससे नोटों को बनाने का काम अच्छे से फ्लो में हो जाता है.