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दिपके को चुभ गई अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन की बात, ट्विटर पर छिड़ी जुबानी जंग

अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन और सीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के बीच विदेशी दखल और अमेरिकी दानदाताओं के दावे पर सोशल मीडिया मंच एक्स पर तीखी बहस हुई. यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर उठ रहे सवालों के बीच सामने आया.

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अभिजीत दीपके और मेरी मिलबेन. (Photo- ITG)
अभिजीत दीपके और मेरी मिलबेन. (Photo- ITG)

अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन और CJP एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके के बीच सोशल मीडिया पर जुबानी जंग छिड़ गई. मैरी मिलबेन ने दिपके पर अमेरिकी डोनर्स से संबंध होने का दावा करते हुए उन पर कानून का पालन नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने दिपके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने और भारत के लिए सकारात्मक भूमिका निभाने की सलाह भी दी.

मैरी मिलबेन ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिपके को टैग करते हुए लिखा कि सच्चाई सभी को आजाद करती है. उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी डोनर्स को लगेगा कि दिपके सफल नहीं हो रहे हैं, तो वे उनका साथ छोड़ देंगे. मिलबेन ने कहा कि कानून का उल्लंघन करके सफलता नहीं मिलती. उन्होंने दिपके से अपनी अमेरिकी शिक्षा और प्रतिभा का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करने और पीएम मोदी के साथ बैठकर भारत को आगे बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की.

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मिलबेन ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके पास भारत के 1.5 अरब नागरिकों का समर्थन है. उन्होंने मोदी के 12 साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल और लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने का जिक्र करते हुए 2029 में भी उनकी जीत का दावा किया.

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दिपके ने विदेशी दखल पर उठाए थे सवाल

मैरी मिलबेन की यह प्रतिक्रिया अभिजीत दिपके की उस पोस्ट के बाद आई, जिसमें उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी नागरिकों के कथित दखल पर सवाल उठाए थे. दिपके ने पूछा था कि मोदी अपने ही देश के नागरिकों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं. उन्होंने कहा था कि भारत अपने आंतरिक मुद्दों को सुलझाने में सक्षम है और उसे बाहरी लोगों के दखल की जरूरत नहीं है.

दिपके की पोस्ट में मैरी मिलबेन के उस इंटरव्यू का भी जिक्र था, जिसमें उन्होंने भारतीय युवाओं से CJP के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी और पार्टी को अमेरिकी डोनर्स से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया था.

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SIR को लेकर भी अमेरिका से आई प्रतिक्रिया

यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है. CJP और विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है.

इस बीच, अमेरिका की वॉशिंगटन की 7वीं कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट की प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने भी भारत में SIR के दौरान मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई. उन्होंने बुधवार को X पर दावा किया कि भारत में 13 करोड़ लोगों को मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने इसकी तुलना अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के कदमों से की और कहा कि इससे लोकतंत्र में मतदान के अधिकार कमजोर होने की चिंता पैदा होती है.

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अमेरिका में प्रस्तावित SAVE America Act का मकसद संघीय चुनावों में मतदान के नियमों में बदलाव करना है. 29 जनवरी को कांग्रेस में पेश किए गए इस विधेयक में मतदाता पंजीकरण के दौरान अमेरिकी नागरिकता का भौतिक प्रमाण और मतदान के समय वैध फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. इसमें डाक से मतदान को कुछ विशेष परिस्थितियों तक सीमित करने और संघीय डेटाबेस की मदद से मतदाता सूची से गैर-नागरिकों के नाम हटाने का भी प्रावधान है.

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