दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ गठित जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की जाएगी. ये रिपोर्ट उन आरोपों की जांच के बाद तैयार की गई है जो उनके खिलाफ लगाए गए थे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोकसभा सेक्रेटरी-जनरल जजेज (इंक्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 4(3) तथा जजेज (इंक्वायरी) रूल्स, 1969 के नियम 9 और 10 के तहत इस रिपोर्ट को सदन में रखेंगे. इस रिपोर्ट के भाग 1 और 2 (हिंदी और अंग्रेजी संस्करण) के साथ-साथ जांच के दौरान दर्ज किए गए मौखिक और दस्तावेजी सबूतों को भी सदन के पटल पर रखा जाएगा.
दरअसल, पिछले साल मार्च नई दिल्ली के तुगलक क्रीसेंट स्थित उनके आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में आग लग गई थी. आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों और पुलिस कर्मियों को वहां आधे जले नोट्स मिले थे. जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी उस वक्त मध्य प्रदेश में थे. इस घटना के बाद उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था. उन्होंने आरोपों से इनकार किया और इसे अपने खिलाफ साजिश बताया था. उनका कहना था कि नकदी उनकी नहीं है और स्टोर रूम उनके मुख्य आवास का हिस्सा नहीं था.
हालांकि, जस्टिस वर्मा ने इस साल 9 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन राष्ट्रपति ने अभी तक उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. इसी की वजह से उनका नाम अभी-भी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लिस्ट में दर्ज है.
इसके बाद 200 से ज्यादा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को याचिका सौंपकर न्यायमूर्ति वर्मा को पद से हटाने की मांग की थी. इस पर लोकसभा स्पीकर ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया. समिति की रिपोर्ट बुधवार को सदन में पेश होने वाली है. रिपोर्ट के आधार पर उनके पद से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.