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Beat Report: केरल के CM पर सस्पेंस बरकरार, दिल्ली के 10 जनपथ में मैराथन बैठक, अगले 24 घंटे में होगा फैसला

केरल के नए मुख्यमंत्री को लेकर कांग्रेस आलाकमान अब अंतिम फैसले की ओर बढ़ रहा है. दिल्ली में दिन भर चली मैराथन बैठकों के बाद कयासों का बाजार गर्म है. केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जबकि राहुल गांधी के पाले में अंतिम गेंद है.

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केरल के सीएम पर सस्पेंस बरकरार. (photo: ITG)
केरल के सीएम पर सस्पेंस बरकरार. (photo: ITG)

कांग्रेस आलाकमान केरल के मुख्यमंत्री का नाम तय करने के लिए दिल्ली में विचार-विमर्श का अंतिम दौर जारी है. सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के 10 जनपथ मैराथन बैठकें चल रही हैं. केरल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और केंद्रीय नेतृत्व से मिल चुके हैं.

सूत्रों ने ये भी बताया कि पार्टी अगले 24 घंटों के अंदर अंतिम फैसला ले सकती है और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के अंतिम चर्चा में भाग लेने के लिए शाम तक दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद अंतिम निर्णय पर मोहर लगेगी. फिलहाल केसी वेणुगोपाल इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं, लेकिन रमेश चेन्निथला को भी एक सुरक्षित और सर्वसम्मत विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है.

केरल की सत्ता का केंद्र बना दिल्ली

केरल के मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान अब पूरी तरह से दिल्ली में केंद्रित हो गई है और 10 जनपथ राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है. केरल के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिनभर राहुल गांधी और केंद्रीय नेतृत्व के सदस्यों से मुलाकात की.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष के. मुरलीधरन ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि मेरी बैठक अच्छी रही. मैंने राहुल गांधी को अपनी पसंद बता दी है. कल तक फैसला आने की पूरी संभावना है.

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पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया कि नेतृत्व लंबे वक्त तक अनिश्चितता से बचने के लिए उत्सुक है और आंतरिक सलाह समाप्त होने के बाद जल्द ही घोषणा करना चाहता है.

रेस में सबसे आगे वेणुगोपाल

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल को फिलहाल इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है. हालांकि, नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी दुविधा ये है कि क्या पार्टी राजनीतिक रूप से इतने महत्वपूर्ण मोड़ पर उन्हें दिल्ली से बाहर भेजने का जोखिम उठा सकती है.

वेणुगोपाल संसद के अंदर और संगठन के भीतर दोनों जगह राहुल गांधी के प्रमुख संकटमोचक के रूप में उभरे हैं, जिससे उन्हें विपक्ष के नेता के "सहायक व्यक्ति" के रूप में मशहूर हैं.

लोकसभा चुनाव पर फोकस

सूत्रों के अनुसार, अंतिम फैसला काफी हद तक राहुल गांधी पर निर्भर करता है, क्योंकि वेणुगोपाल उनके करीबी हैं और वर्तमान में वे महत्वपूर्ण संगठनात्मक भूमिका निभा रहे हैं. 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले उनकी अहमियत और भी बढ़ने की उम्मीद है.

कांग्रेस नेतृत्व तेजी से दक्षिण को अपने प्रमुख राजनीतिक गढ़ के रूप में देख रहा है, जिसमें कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल 2029 से पहले भाजपा के खिलाफ पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति की रीढ़ की हड्डी का निर्माण कर रहे हैं.

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उधर, कांग्रेस नेतृत्व तेजी से दक्षिण को अपने प्रमुख राजनीतिक गढ़ के रूप में देख रहा है, जिसमें कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल 2029 से पहले बीजेपी के खिलाफ पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति की रीढ़ की हड्डी का निर्माण कर रहे हैं.

केरल में गांधी परिवार के किसी भरोसेमंद सहयोगी का नेतृत्व संभालने से पार्टी को दक्षिणी राज्यों में अधिक मजबूत राजनीतिक समन्वय बनाए रखने और क्षेत्र में संगठनात्मक प्रदर्शन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है.

राहुल गांधी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक माने जाने वाले वेणुगोपाल को आंतरिक रूप से कांग्रेस के लिए आने वाले वर्षों में एक मजबूत दक्षिणी रणनीति तैयार करने में सक्षम व्यक्ति के रूप में भी देखा जाता है.

वेणुगोपाल के अलावा रमेश चेन्निथला को भी पार्टी के अनंद एक सुरक्षित  विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. उनके पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है और वे विभिन्न गुटों के बीच स्वीकार्य चेहरा हैं. पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि यदि वेणुगोपाल और सतीशन के बीच गुटबाजी बढ़ती है तो चेन्निथला एक आम सहमति वाले उम्मीदवार बनकर उभर सकते हैं. उनकी वरिष्ठता और दशकों की पार्टी सेवा उनके पक्ष में मजबूत तर्क पेश करती है.

विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन कैडर और गठबंधन सहयोगियों के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उनके समर्थकों द्वारा की गई आक्रामक लॉबिंग ने उनकी संभावनाओं को कुछ नुकसान पहुंचाया है. आलाकमान इस बात से असहज था कि आधिकारिक निर्णय से पहले ही उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया जाने लगा. हालांकि, वो अभी-भी दौड़ से पूरी तरह बाहर नहीं हैं, लेकिन उनकी राह अब उतनी आसान नहीं दिख रही है.

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कांग्रेस ने आईयूएमएल से किया संपर्क

कांग्रेस नेतृत्व अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है. कांग्रेस नेतृत्व ने गठबंधन सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के अंदर पनप रहे असंतोष को थामने के लिए भी कदम उठाए हैं. आईयूएमएल ने सार्वजनिक रूप से सतीशन का समर्थन किया था, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें स्पष्ट संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री का चयन कांग्रेस का विशेषाधिकार है. राहुल गांधी ने सहयोगी दल को आश्वस्त किया है कि सत्ता में उनकी उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाएगी, चाहे मुख्यमंत्री कोई भी बने.

कांग्रेस के लिए केरल का ये फैसला केवल राज्य तक सीमित नहीं है. कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल को कांग्रेस 2029 की चुनावी बिसात के लिए अपना सबसे मजबूत गढ़ मानती है. केरल में एक विश्वसनीय और गांधी परिवार के वफादार को मुख्यमंत्री बनाना दक्षिण भारत में बेहतर राजनीतिक समन्वय के लिए जरूरी समझा जा रहा है. राहुल गांधी इस चयन के जरिए राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ने वाले इसके असर का भी आकलन कर रहे हैं.

केरल के फैसले में गुटों के बीच संतुलन, गठबंधन प्रबंधन और राष्ट्रीय संगठनात्मक विचार आपस में टकरा रहे हैं, ऐसे में अंतिम फैसला अब व्यापक रूप से राहुल गांधी पर निर्भर माना जा रहा है.

नेतृत्व से ये अपेक्षा की जाती है कि वह न केवल केरल के तात्कालिक राजनीतिक समीकरणों पर विचार करे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की राष्ट्रीय रणनीति और दक्षिणी विस्तार के लिए दीर्घकालिक प्रभावों पर भी विचार करे.

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