Rajya Sabha Loksabha संसद के मॉनसून सत्र में लगातार हर दिन हंगामा हो रहा है. संसद के बाहर से लेकर भीतर तक स्टूडेंट प्रोटेस्ट और चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सियासत गर्म है. मंगलवार को चढावा चोरी का मुद्दा राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में छाया रहा. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और केंद्र सरकार से मामले में ईडी, सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर जवाब मांगा.
इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर पलटवार करते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर का विरोध किया, वे अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं. दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद सदन में भारी हंगामा हुआ. सभापति सीपी राधाकृष्णन ने व्यवस्था बहाल कराने की कोशिश की, लेकिन शोर-शराबे के चलते राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.
बाद में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 'जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026' चर्चा के लिए पेश किया, जिसे विपक्ष के विरोध के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. उधर, लोकसभा में भी विपक्ष के हंगामे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026' और टविनियोग (संख्या-3) विधेयक, 2026ट पेश किए. दोनों विधेयक बिना विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से पारित हो गए. लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. उधर, संसद से पारित जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
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कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है. उन्होंने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की है.अपने नोटिस में मणिकम टैगोर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में इस मामले पर विस्तृत बयान देने की मांग की है. उनका कहना है कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है और इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए.
संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस दिया है. उन्होंने नए दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) की रूपरेखा पर चर्चा कराने की मांग की है. मनीष तिवारी ने अपने नोटिस में कहा है कि ऐसा नया कानून बनाया जाए, जो स्वार्थ और अवसरवाद से प्रेरित सामूहिक राजनीतिक दलबदल पर प्रभावी रोक लगाए. साथ ही, कानून में वास्तविक वैचारिक या नीतिगत मतभेदों के आधार पर ईमानदार असहमति के लिए संसद और विधानसभाओं के भीतर तथा बाहर पर्याप्त लोकतांत्रिक स्थान भी सुनिश्चित किया जाए.