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खाने के पैसे नहीं, डीजल कहां से लाएं, डॉक्टर के सवाल पर रो पड़ी दादी, बेटी को कंधे पर ले गया पिता

बीड जिले के दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 11 साल की बीमार बच्ची को बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया, लेकिन एम्बुलेंस में डीजल भरवाने के पैसे मांगे जाने का आरोप है. परिवार ने खाने तक के पैसे नहीं होने की बात कही. आरोप है कि डॉक्टर ने अपमानजनक टिप्पणी की. जिसके बाद पिता बच्ची को कंधे पर उठाकर ले गया.

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बीमार बेटी के लिए भी नहीं मिली एम्बुलेंस. (Photo: Screengrab)
बीमार बेटी के लिए भी नहीं मिली एम्बुलेंस. (Photo: Screengrab)

महाराष्ट्र के बीड़ जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. यहां इलाज के लिए आए एक मजदूर परिवार को अपनी 11 साल की बीमार बच्ची को बड़े अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक नहीं मिल सकी. आरोप है कि दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची को रेफर किए जाने के बाद एम्बुलेंस में डीजल भरवाने के लिए पैसे मांगे गए. परिवार ने अपनी आर्थिक मजबूरी बताई, लेकिन इसके बावजूद मदद नहीं मिली. आखिरकार पिता अपनी बीमार बेटी को कंधे पर उठाकर ले जाने को मजबूर हो गया.

जानकारी के मुताबिक, 29 सितंबर को मजदूरी करके परिवार का पेट पालने वाला एक पिता अपनी 11 साल की बीमार बच्ची को इलाज के लिए दिंद्रुड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा था. बच्ची की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया. इसके बाद पिता ने बच्ची को अस्पताल परिसर में खड़ी एम्बुलेंस में लिटा दिया. परिवार को उम्मीद थी कि बच्ची को समय पर बड़े अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा. लेकिन आरोप है कि इसी दौरान वहां मौजूद डॉक्टर ने सवाल किया कि उसके पास डीजल के पैसे हैं या नहीं.

दादी बोलीं- खाने के पैसे नहीं, डीजल कहां से लाएं

डॉक्टर के सवाल पर बच्ची की दादी ने अपनी आर्थिक स्थिति बताई. उन्होंने रोते हुए कहा कि हमारे पास तो खाने के भी पैसे नहीं हैं, डीजल के लिए कहां से लाएं. दादी ने बताया कि परिवार में चार बच्चे हैं और मजदूरी करके किसी तरह उनका पालन-पोषण किया जा रहा है. परिवार की हालत ऐसी है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल है. ऐसे में एम्बुलेंस के डीजल के लिए पैसे जुटाना उनके लिए संभव नहीं था.

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परिवार का आरोप है कि दादी की मजबूरी समझने और मदद करने के बजाय डॉक्टर ने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। आरोप है कि डॉक्टर ने कहा कि संभाल नहीं सकते तो पैदा क्यों की. एक बीमार बच्ची के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे परिवार के साथ कथित तौर पर हुए इस व्यवहार ने मामले को और गंभीर बना दिया. परिवार पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और बच्ची को बड़े अस्पताल ले जाने की चिंता में था. ऐसे समय में मदद मिलने के बजाय अपमान का सामना करने का आरोप लगाया गया है.

एम्बुलेंस नहीं मिली तो बेटी को कंधे पर उठाकर चला पिता

आरोप है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एम्बुलेंस की मदद नहीं मिलने के कारण पिता को अपनी बीमार बेटी को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा. जिस बच्ची को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल पहुंचाने की जरूरत थी, उसे ले जाने की जिम्मेदारी पिता को खुद उठानी पड़ी. मजदूरी करके परिवार चलाने वाले पिता की इस मजबूरी ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है. इस घटना को लेकर स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के साथ व्यवहार और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठ रहे हैं.

मामले की जानकारी लेने के लिए जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उल्हास गंडाल से बात की गई। उन्होंने कहा कि वह मामले की जानकारी लेकर सख्त कार्रवाई करेंगे. अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और कार्रवाई पर नजर रहेगी. परिवार के आरोपों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को समय पर इलाज और जरूरी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है.
 

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