बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव हुआ था. इन तीनों सीटों के नतीजे सोमवार (3 अगस्त) को घोषित हो गए हैं. हर राज्य में अलग तस्वीर देखने को मिली. कहीं बीजेपी का गढ़ टूटा, कहीं कांग्रेस ने बड़ा झटका दिया, तो कहीं बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखी. इन नतीजों ने सिर्फ तीन सीटों का फैसला नहीं किया, बल्कि तीनों राज्यों की राजनीति को भी नया संदेश दे दिया. अब किस सीट पर किसने बाजी मारी, किसे झटका लगा और किस दल ने अपना किला बचाया, आइए एक-एक करके समझ लेते हैं.
इन तीनों नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर सीट की रही, जहां जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों से बड़ी जीत हासिल की. इस जीत को सिर्फ एक सीट की सफलता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में जन सुराज की बढ़ती पकड़ और प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्वीकार्यता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.
बांकीपुर: बीजेपी का अभेद्य गढ़ टूटा
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में बीजेपी का किला ध्वस्त कर दिया है. करीब 30 साल से बांकीपुर सीट पर बीजेपी का एकछत्र राज था और यह पार्टी की सबसे सुरक्षित सीटों में गिनी जाती थी. नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी. नितिन नवीन लगातार पांच बार बांकीपुर से चुनाव जीत चुके थे और उनके परिवार का भी इस सीट पर लंबा राजनीतिक प्रभाव रहा है.
ऐसे में प्रशांत किशोर की यह जीत सिर्फ एक सीट जीतने भर की कहानी नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में बड़ा राजनीतिक संदेश मानी जा रही है. अपनी पहली चुनावी लड़ाई में ही उन्होंने बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक को भेद दिया. इस जीत के साथ जन सुराज को पहली विधानसभा सीट मिली और प्रशांत किशोर ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी अब केवल वैकल्पिक राजनीति की बात नहीं कर रही, बल्कि चुनावी मैदान में भी स्थापित दलों को चुनौती देने की क्षमता रखती है.
बांकीपुर में बीजेपी की हार के मुख्य कारण
दतिया: अपने मजबूत बूथ पर भी पीछे रही BJP
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया. यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद हुआ था. दतिया उपचुनाव में एक आंकड़े की काफी चर्चा हो रही. नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर-121 पर भी बीजेपी पीछे रही. यहां कांग्रेस को 291 वोट मिले, जबकि बीजेपी को 264 वोट मिले. इस नतीजे ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या बीजेपी अपने पुराने समर्थकों को पूरी तरह एकजुट नहीं कर पाई. चुनाव के नतीजे आने के बाद भीतरघात की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं.
दतिया में बीजेपी के पिछड़ने की मुख्य वजह
मांजलपुर: बीजेपी जलवा बरकरार
गुजरात के वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है. पार्टी के उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,630 वोटों से हराया. इसके साथ ही 2012 से इस सीट पर चला आ रहा बीजेपी का जीत का सिलसिला बरकरार रहा. यह सीट योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.
बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के इन तीन उपचुनावों ने तीन अलग-अलग राजनीतिक तस्वीरें सामने रखीं. बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने बीजेपी का मजबूत गढ़ जीतकर बड़ा संदेश दिया. दतिया में कांग्रेस ने अपनी सीट बचाते हुए बीजेपी को लगातार दूसरा उपचुनावी झटका दिया. वहीं, मांजलपुर में बीजेपी ने एक बार फिर अपना किला बचाए रखा. यानी तीन सीटों के नतीजों ने साफ कर दिया कि हर राज्य की सियासत का अपना अलग मिजाज है. आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इन नतीजों को सभी दल अपने-अपने नजरिए से पढ़ेंगे और रणनीति भी उसी हिसाब से तय करेंगे.