प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) जन सुराज पार्टी के संस्थापक और पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार हैं. प्रशांत किशोर ने बिहार के बांकीपुर सीट (Bankipur Seat) से उपचुनाव लड़ने की घोषणा की. 30 जुलाई 2026 को चुनाव है. उनका यह पहला चुनाव है.
भारतीय राजनीति में आने और राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर काम करने से पहले, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के फंड से चलने वाले एक प्रोग्राम में आठ साल तक जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया.
उन्हें सितंबर 2018 में जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) ने अपने राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में नियुक्त किया था. उन्होंने 29 जनवरी 2020 को नीतीश कुमार के साथ असहमति के कारण जद (यू) छोड़ दिया. किशोर ने अपने करियर की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र में आठ साल तक काम किया, जहां वे अंतरराष्ट्रीय राजनेताओं के राजनीतिक रणनीतिकार थे (Prashant Kishor Worked for UNO).
प्रशांत किशोर का जन्म 20 मार्च 1977 को बिहार के रोहतास जिले हुआ था (Prashant Kishor Age). उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा बक्सर जिले में हासिल की (Prashant Kishor Education).
2013 में, किशोर ने 2014 के आम चुनाव की तैयारी के लिए सिटीजन्स फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) नाम से एक मीडिया और प्रचार कंपनी बनाई (Prashant Kishor Media and Publicity Company). किशोर को नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के लिए इनोवेटिव मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग कैंपेन को तैयार करने का श्रेय दिया जाता है. चाय पे चर्चा चर्चा (Chai Par Charcha), 3डी रैलियां, रन फॉर यूनिटी, मंथन और सोशल मीडिया के तमाम कार्यक्रम उन्हीं के दिमाग की उपज थी (CAG and the 2014 general-election campaign).
किशोर ने 2015 में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के साथियों के साथ बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इलेक्शन कैंपेन और स्ट्रेटजी की जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने "नीतीश के निश्चय: विकास की गारंटी" के नारे के साथ, सीएम के सात कमिटमेंट्स को जनता तक पहुंचाया. बिहार चुनाव जीतने पर, नीतीश ने किशोर को अपना सलाहकार बनाया था (I-PAC and the 2015 Bihar Assembly election campaign).
2016 में कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा में चुनावी रणनीति तैयार करने के लिए प्रशांत किशोर को नियुक्त किया. लगातार दो बार हारने के बाद 2017 में किशोर की सलाहों की मदद से कांग्रेस पंजाब में सत्ता में लौटी (Prashant Kishor Punjab Assembly Election 2017).
2017 के यूपी चुनावों के लिए कांग्रेस ने किशोर को नियुक्त किया. लेकिन यहां उन्हें सफलता नहीं मिली (Uttar Pradesh Assembly Election 2017).
किशोर को मई 2017 में वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने अपना राजनीतिक सलाहकार बनाया. उन्होंने रेड्डी के चुनावी अभियानों की एक सीरीज को डिजाइन किया और वाईएसआरसीपी ने 175 सीटों में से 151 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की (Andhra Pradesh Assembly Elections 2019).
किशोर 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के चुनावी रणनीतिकार थे. आदमी पार्टी चुनावों में 70 में से 62 सीटों पर भारी बहुमत से जीतने में सफल रही (Delhi Assembly Elections 2020).
किशोर को 2021 पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस के सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था. उनकी सफल रणनीति ने ममता बनर्जी को 294 सीटों में से 213 सीटों पर भारी जीत दिलाई (West Bengal Elections 2021).
2021 में वे DMK प्रमुख एम के स्टालिन के रणनीतिकार थे. उनके मैनेजमेंट में DMK ने 159 सीटों के साथ चुनाव जीता और स्टालिन पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने (Tamil Nadu Assembly Elections 2021).
जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. प्रशांत किशोर ने पटना एसएसपी पर वर्दी में छुपकर चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाया है.
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग में पटना के एसएसपी के खिलाफ शनिवार को शिकायत दर्ज कराई है. उनका कहना है कि पटना एसएसपी ने अपने पुलिस पदाधिकारियों के साथ चुनाव के दौरान चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की है. उन्होंने कार्रवाई न होने पर कोर्ट जाने की भी चेतावनी दी है.
Bankipur Bypoll Voting: बांकीपुर उपचुनाव में कम वोटिंग ने हर दल की धड़कन बढ़ा दी है. बीजेपी अपने गढ़ को बरकरार रखने की कोशिश में है. आरजेडी प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद कर रही है तो प्रशांत किशोर चौंकाने का दावा कर रहे हैं.
बिहार के बांकीपुर, मध्य प्रदेश के दतिया और गुजरात के मांजलपुर विधानसभा सीट पर गुरुवार को उपचुनाव के लिए मतदान हो गया. तीनों ही सीटों के उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है, लेकिन तीनों सीटों पर घटे मतदान ने सियासी टेंशन बढ़ा दी है.
बिहार की बांकीपुर, एमपी की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीट पर वोट डाले जा रहे हैं....लेकिन बिहार की हाई प्रोफाइल बांकीपुर सीट पर सभी की नजरें बनी हुई हैं. बीजेपी का गढ़ कहे जाने वाली इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. यहां मुकाबला जनसुराज प्रत्याशी प्रशांत किशोर, बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा और आरजेडी की रेखा गुप्ता के बीच है..
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बीजेपी बिहार प्रदेश ने रिटर्निंग ऑफिसर को पत्र लिखकर फर्जी वोटिंग रोकने की मांग की है. पार्टी महासचिव नितिन अभिषेक ने आरोप लगाया कि जन सुराज पार्टी के लोग फर्जी वोट डलवाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने बीजेपी की इस मांग का स्वागत किया और इसे अच्छा कदम बताया.
जन सुराज पार्टी के संयोजक प्रशांत किशोर देर रात अपने समर्थकों के साथ पटना के जक्कनपुर पुलिस स्टेशन पहुंचे. पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और दो लोगों के गायब होने के आरोप को लेकर प्रशांत किशोर और थाना अध्यक्ष ऋतुराज सिंह के बीच तीखी बहसबाजी और हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला.
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है. इस सीट पर बीजेपी, राजद और जन सुराज ने पूरी ताकत झोंक दी है. कई बड़े नेताओं ने प्रचार किया है और सभी की नजर अब मतदान के नतीजों पर टिकी है. इस चुनाव को राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाला अहम मुकाबला माना जा रहा है.
बिहार में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का प्रचार मंगलवार को थम जाएगा. आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता की जीत की इबारत लिखने के लिए तेजस्वी यादव बांकीपुर सीट की कमान संभाल ली है. दो दिन रोड-शो और संवाद करके सियासी माहौल बनाने की कवायद करेंगे, लेकिन कितना गेम बदल पाएंगे?
बांकीपुर क्षेत्र में पिछले 20 साल से एक ही परिवार से पिता और फिर पुत्र विधानसभा के सदस्य रहे. उसमें भी नितिन नवीन जैसा प्रभावी सदस्य जो कि आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष है, उनके भी 10 साल रहने के बावजूद कोई विशेष सुधार नहीं हुआ, ऐसा जनता का आरोप है. बांकीपुर की जनता एक बड़े नेता के स्थान पर दूसरा बड़ा नेता ही चाहेगी.
Bankipur Bypoll 2026 पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट इस बार बिहार की सबसे हॉट सीट बन गई है. बीजेपी ने अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए 40 स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है. वहीं जनसुराज और आरजेडी को चुनाव से पहले बड़े झटके लगे हैं. आखिर क्यों 30 साल से बीजेपी का गढ़ रही बांकीपुर सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है? जानिए जातीय समीकरण, 25 उम्मीदवारों की लड़ाई, स्टार प्रचारकों की पूरी रणनीति और इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव का पूरा राजनीतिक गणित.
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव हाईप्रोफाइल बन गया है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की परंपरागत सीट रही बांकीपुर से जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अपना पहला चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी राह आसान नहीं रहने वाली है. बीजेपी से नीरज कुमार कैसे चुनावी लड़ाई को रोचक बना दिया है.
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं रह गया है. यहां चुनावी रणनीति, संगठन और नेतृत्व तीनों की अलग-अलग शैली देखने को मिल रही है. एक ओर राष्ट्रीय स्तर की पार्टी अपने पूरे संगठन के साथ मैदान में है, तो दूसरी ओर नई राजनीतिक पार्टी अपने संस्थापक के चेहरे पर पूरा दांव खेल रही है. इसी वजह से यह मुकाबला खास बन गया है.
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है. पार्टी के कई नेता, जिनमें केसी सिन्हा, रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह, गोपाल सिंह और ब्रज किशोर सिन्हा शामिल हैं, बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर बढ़ते भरोसे का नतीजा बताया, जबकि नेताओं ने जन सुराज में दिशा और नेतृत्व की कमी का आरोप लगाया. 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले इस घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
पटना का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के लिए साख का सवाल बन गया है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन बांकीपुर में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. इसीलिए पटना पहुंचकर ताबड़तोड़ बैठकें शुरू कर बीजेपी प्रत्याशी नीरज सिन्हा को जिताने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं.
चुनावी नामांकन के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी और पत्नी की संपत्तियों का पूरा ब्यौरा दिया है. चल और अचल संपत्तियों को मिलाकर उनकी कुल संपत्ति करीब 198 करोड़ रुपये बताई गई है, जो अलग-अलग शहरों में फैली हुई है.
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उतरे प्रशांत किशोर ने अपनी संपत्ति का खुलासा किया है. प्रशांत किशोर और उनकी फैमिली की कुल संपत्ति 198 करोड़ रुपये है. साथ ही उनपर करीब 9 करोड़ रुपये का कर्ज भी है.
Prashant Kishor Temple Politics: क्या प्रशांत किशोर ने अपनी चुनावी रणनीति बदल दी है? पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद प्रशांत किशोर लगातार मंदिरों में दर्शन-पूजन करते नजर आ रहे हैं. नामांकन से पहले उन्होंने हरिहरनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया, इससे पहले बोरिंग रोड शिव मंदिर में रुद्राभिषेक और बजरंगबली मंदिर में दर्शन भी किए. क्या यह सिर्फ आस्था है या चुनावी रणनीति? क्या बीजेपी के लंबे समय से अपनाए जा रहे 'Temple Politics' मॉडल की ओर प्रशांत किशोर भी बढ़ रहे हैं?
बांकीपुर से नामांकन दाखिल करने के बाद प्रशांत किशोर ने उपचुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया. उन्होंने इस चुनाव को बिहार की राजनीति के लिए अहम बताते हुए बीजेपी पर भी निशाना साधा.
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले बीजेपी विवादों में घिर गई है। पार्टी ने उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा का बायोडाटा जारी किया, जिसमें उनकी जन्मतिथि 1994 बताई गई, लेकिन साथ ही 2006 में बीजेपी जॉइन करने का जिक्र था—जिससे उनकी उम्र उस समय सिर्फ 12 साल बनती है।
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी ने अपने पहले उम्मीदवार अभिषेक बंटी (पिता का चारा घोटाले में नाम होने के कारण) का टिकट काटकर नीरज कुमार सिन्हा को प्रत्याशी बनाया है. इसके बाद नीरज के जारी बायोडाटा में उनकी जन्मतिथि 1994 और बीजेपी जॉइन करने का साल 2006 दर्ज होने से विवाद खड़ा हो गया.