जन सुराज एक राजनीतिक पार्टी है (Jan Suraaj Party) जिसका नेतृत्व बिहार के (Bihar) राजनीतिक विशेषज्ञ प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) कर रहे हैं. प्रशांत किशोर 'पीके' के नाम से मशहूर हैं. कुछ साल पहले बिहार जन सुराज नाम से एक राजनीतिक अभियान शुरू किया गया था. इस अभियान में प्रशांत किशोर ने बिहार के विभिन्न जिलों के गांवों में पदयात्रा शुरू की. इस अभियान की शुरुआत बिहार राज्य में परिवर्तनकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से की गई थी. अभियान का फोकस जमीनी स्तर पर जनता की भागीदारी पर था, जिसमें बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार आदि जैसे प्रमुख मुद्दों को संबोधित किया गया.
महुआ मोइत्रा और प्रशांत किशोर के फर्जी चैट वायरल मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने आरोपी के नोएडा स्थित घर में दबिश दी. हालांकि वो पुलिस की पकड़ से बच निकला और पुलिस ने उसकी पत्नी को वारंट की जानकारी दी.
दिल्ली की हार के बाद अरविंद केजरीवाल अब तक अपने दिल्लीवालों के बीच नहीं लौटे हैं, जबकि प्रशांत किशोर फिर से बिहार यात्रा पर निकल पड़े हैं. क्या इसलिए क्योंकि प्रशांत किशोर के पास को कोई राजनीतिक ऑपश्न नहीं है, और केजरीवाल के पास पंजाब से लेकर गोवा और गुजरात तक विकल्प ही विकल्प हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने पहले हाईकोर्ट जाने को कहा और चुनावी मंच को लोकप्रियता के लिए इस्तेमाल करने पर टिप्पणी की.
जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. आरोप है कि आचार संहिता के दौरान महिलाओं को ₹10,000 ट्रांसफर किया गया. पार्टी ने नए चुनाव और फ्रीबीज़ पर सख्त दिशानिर्देशों की मांग की है.
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर एक बार फिर से बिहार की यात्रा पर निकल रहे हैं. 8 फरवरी से 13 फरवरी तक प्रशांत किशोर बिहार के अलग-अलग जिलों की यात्रा करेंगे. उनकी यात्रा दोबारा से जन सुराज को खड़ी करने और अपने बिखरते सियासी कुनबे को बचाए रखने का दांव माना जा रहा है.
बिहार में फिर से सियासी हलचल तेज हो गई है. विधानसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर से जन सुराज पार्टी के नेताओं का मोहभंग होने लगा है. इस कड़ी में आरसीपी सिंह का मन बदल रहा है और जेडीयू में फिर से वापसी के संकेत दे रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वे घर वापसी करेंगे?
जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान बहुत से लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आई थी. पार्टी के फाउंडर प्रशांत किशोर के दावे भी बहुत बड़े थे. पर जिस तरह पार्टी के नेताओं का मोहभंग हो रहा है वह जन सुराज के लिए बहुत चिंता की बात है.
भोजपुरी गायक रितेश पांडे के बाद पीके की पार्टी जन सुराज को एक और झटका लग सकता है. पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह भी जन सुराज से नाता तोड़कर फिर से जेडीयू में जा सकते हैं.
भोजपुरी गायक रितेश पांडे ने जन सुराज पार्टी से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया है. रितेश ने जन सुराज से इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा है कि किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहकर काम करना बहुत मुश्किल है.
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के करीब एक महीने बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने हाल ही में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से नई दिल्ली में मुलाकात की थी. हालांकि दोनों पक्षों के सूत्रों ने इस मुलाकात के राजनीतिक मायने कम करके बताए हैं, लेकिन सियासी गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है.
प्रशांत किशोर लगता है तेजस्वी यादव को बिहार में नई सरकार बन जाने के बाद भी चैन की सांस नहीं लेने देना चाहते हैं. जन सुराज अभियान में तेजस्वी यादव शुरू से ही निशाने पर रहे, और आरजेडी के भारी चुनावी नुकसान के बाद भी वो विपक्ष की राजनीति में तेजस्वी यादव को चैलेंज करने की तैयारी कर रहे हैं.
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने आत्ममंथन के रूप में पश्चिम चंपारण के भितिहरवा स्थित गांधी आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखा, जहां से उन्होंने तीन साल पहले अपनी 3,500 किमी लंबी पदयात्रा शुरू की थी. महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शुरुआत करते हुए पीके ने कहा कि यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता तक अपना संदेश पूरी तरह न पहुंचा पाने का ‘आत्मिक प्रायश्चित’ है.
प्रशांत किशोर ने नीतीश सरकार को चुनौती दी कि अगर वे 1.5 करोड़ महिलाओं को 2-2 लाख रुपये देने का वादा पूरा करते हैं, तो वह राजनीति और बिहार दोनों छोड़ देंगे. उन्होंने JD(U) की जीत को 'वोट खरीदने' का परिणाम बताया, जिसमें 'मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना' के तहत 10,000 रुपये के भुगतान का उपयोग हुआ.
बिहार चुनाव 2025 में जन सुराज की हार के बाद भी प्रशांत किशोर पीछे हटने वाले नहीं हैं. उन्होंने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपनी रणनीति, संगठन और राजनीतिक शैली में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं. जातिवाद मुक्त राजनीति, मुद्दा-आधारित आंदोलन और सरकारी वादों को लागू कराने पर उनका जोर रहेगा. चुनौतियों के बावजूद वे दीर्घकालिक भूमिका निभाने, जमीनी संगठन मजबूत करने और सत्ता को जवाबदेह बनाने के लिए नए सिरे से तैयारी कर रहे हैं.
चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने कहा था कि नीतीश कुमार की पार्टी की बिहार चुनाव में 25 से ज्यादा सीटें आ गईं, तो राजनीति से संन्यास ले लूंगा. इसे लेकर जारी कयासों पर अब पीके ने विराम लगा दिया है.
प्रशांत किशोर पर लगातार बीजेपी की बी टीम होना का आरोप लगता रहा है. बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान कई बार ऐसा लगा कि किशोर की जन-सुराज पार्टी महागठबंधन की बजाए एनडीए को ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. आखिर इस बात में कितनी सच्चाई है, आइये देखते हैं?
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने आरोप लगाया कि वर्ल्ड बैंक के 14,000 करोड़ रुपये के विकास फंड को चुनाव से पहले महिलाओं में 10,000 रुपये कैश ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया गया. पार्टी ने इसे चुनावी प्रभाव को बदलने की "अनैतिक कोशिश" बताया और जांच की मांग की. NDA ने 2025 चुनाव में 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया.
नीतीश कुमार इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण एक्स फैक्टर साबित हुए. बहुत से लोग मान रहे थे कि उनका दौर लगभग खत्म हो गया है और उनके स्वास्थ्य को लेकर भी कई चर्चाएं थीं. इसके बावजूद, वे पिछले बीस वर्षों से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं.
जन सुराज पार्टी के प्रवक्ता पवन वर्मा ने कहा कि बिहार जैसे बड़े प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का जिम्मा है. चुनाव से पहले वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया जून में शुरू होने वाली थी लेकिन अक्टूबर में चुनाव होने के कारण समय कम रह गया.
Jan Suraaj Party Vote Share In Bihar Election 2025: पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं जीत पाई. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा कि कुछ वोटर RJD के ‘जंगल राज’ लौटने के डर से NDA के साथ चले गए. सीमांचल में ध्रुवीकरण और महिलाओं को योजनाओं के जरिए प्रभावित करना भी परिणामों में अहम रहा. जन सुराज का कुल वोट शेयर चार प्रतिशत रहा. NDA ने महागठबंधन को भारी हराकर 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 पार जीत हासिल की.
बिहार चुनाव 2025 में प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज पूरी तरह पिछड़ गए. 238 में से 236 उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके. रितेश पांडे, के.सी. सिन्हा और सरफराज आलम जैसे हाई-प्रोफाइल चेहरे भी तीसरे स्थान पर रहे.