बांकीपुर (Bankipur) बिहार की राजधानी पटना के मध्य भाग में गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख क्षेत्र है. यह पटना के पुराने इलाकों में शामिल है और प्रशासनिक, शैक्षणिक तथा राजनीतिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है.
इतिहास के अनुसार, बांकीपुर का इलाका प्राचीन पाटलिपुत्र का हिस्सा माना जाता है. पाटलिपुत्र मौर्य साम्राज्य की राजधानी था और इसका विस्तार गंगा तथा सोन नदियों के संगम के आसपास माना जाता है. समय के साथ दोनों नदियों के प्रवाह में बदलाव आया. सोन नदी ने अपना मार्ग बदल लिया और अब वह गंगा में पहले ही जाकर मिलती है, जबकि गंगा नदी भी अपने पुराने तट से आगे खिसक चुकी है. इसके बावजूद यह क्षेत्र अपने ऐतिहासिक संदर्भ के कारण आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
बांकीपुर में कई पुराने और प्रमुख संस्थान स्थित हैं. यहां पटना सिविल कोर्ट, पटना कलेक्टरेट, वर्ष 1891 में स्थापित खुदाबख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी और दरभंगा हाउस जैसे महत्वपूर्ण भवन मौजूद हैं. दरभंगा हाउस वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों का केंद्र है.
यह क्षेत्र सड़क मार्ग से पटना के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है और यहां सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, बाजार तथा आवासीय इलाके मौजूद हैं. बांकीपुर में प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ शिक्षा, न्यायिक व्यवस्था और स्थानीय व्यापार से जुड़े कार्य भी संचालित होते हैं. इसी कारण यह क्षेत्र पटना के प्रमुख शहरी इलाकों में शामिल माना जाता है.
टीएमसी सांसद शत्रुधन सिन्हा ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने का स्वागत किया है. उन्होंने प्रशांत किशोर को सबसे काबिल और दूरदर्शी नेता बताया और उनकी एंट्री को राजनीतिक हलकों में जबरदस्त हलचल बताया.
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर के उतरने के बाद आरजेडी ने भी रेखा गुप्ता को अपना उम्मीदवार बना दिया है. रेखा गुप्ता के उतरने से बांकीपुर सीट का गेम पूरी तरह गेम बदल गया है और सत्ता-विपक्ष में सीधी लड़ाई के बजाय त्रिकोणीय बन सकती है. ऐसे में पीके की सियासी राह काफी मुश्किलों भरी हो सकती है?
बांकीपुर उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने एक बार फिर रेखा कुमारी गुप्ता पर भरोसा जताया है. 2025 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं रेखा गुप्ता को दोबारा उम्मीदवार बनाया गया है. इस बार मुकाबला BJP, RJD और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय होने के आसार हैं.
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक विधानसभा सीट के लिए मुकाबला नहीं रह गया है बल्कि इसे बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है. उपचुनाव में प्रशांत किशोर के उतरने से क्या बांकीपुर का गेम बदलेगा?
जन सुराज पार्टी ने बाकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया तो महागठबंधन में मतभेद खुलकर सामने आ गए. आरजेडी ने साफ कहा कि वह इस सीट से अपना उम्मीदवार उतारेगी, जबकि कांग्रेस ने बीजेपी को हराने के लिए प्रशांत किशोर को साझा विपक्षी उम्मीदवार बनाने की वकालत की है.
जनसुराज के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रवक्ता मनोज भारती ने बांकीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर आधिकारिक प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है. उन्होंने बताया कि नितिन नवीन द्वारा खाली की इस सीट पर पार्टी ने प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया है.
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले चार दशक से भी अधिक समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है. इस सीट पर पार्टी का लगातार दबदबा रहा है. अगर प्रशांत किशोर चुनाव मैदान में उतरते हैं तो यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का उपचुनाव नहीं रहेगा. इसे जन सुराज की राजनीतिक ताकत और बीजेपी के शहरी जनाधार की लड़ाई के तौर पर भी देखा जाएगा.
चुनाव आयोग ने बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के कार्यक्रम की घोषणा कर दी है. इसके तहत मध्य प्रदेश की हाई-प्रोफाइल दतिया विधानसभा सीट पर भी आगामी 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा और 3 अगस्त को मतगणना होगी.
बिहार में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने सोशल एक्टिविस्ट वीना मानवी को उम्मीदवार घोषित किया है. BJP के गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर तेज प्रताप ने महिला और वैश्य समुदाय के चेहरे को आगे कर चुनौती देने की कोशिश की है.
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि बांकीपुर की जनता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से नाराज है. प्रशांत किशोर का यह ऐलान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था.
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव जन सुराज और प्रशांत किशोर के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रशांत किशोर इस चुनाव के जरिए अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता साबित करना चाहते हैं. शिक्षित और शहरी मतदाताओं वाली इस सीट पर उनका फोकस रोजगार, शिक्षा और पलायन जैसे मुद्दों पर है. चुनाव परिणाम यह तय करेगा कि जन सुराज का राजनीतिक नैरेटिव वोटों में बदलता है या नहीं.