देश की राजधानी दिल्ली इस वक्त राजनीति और विरोध के एक नए और जबरदस्त बवंडर की चपेट में है! मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े पहरे और भारी बैरिकेडिंग के बीच सोमवार का दिन हंगामे और प्रदर्शनों के नाम रहा. एक तरफ जहां छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने भी सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मोर्चा खोल दिया है. इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और 'वोट चोरी' के गंभीर आरोप हैं.
जंतर-मंतर के गेट बंद, पर छात्रों का आक्रोश सड़कों पर
सोमवार को हालात तब और भड़क गए जब प्रशासन ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के तय स्थलों की सूची से ही हटा दिया. इसके विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) और अन्य वामपंथी संगठनों से जुड़े सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतर आए. राखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च: छात्रों ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में तख्तियां थीं और उनके मुंह से एक ही नारा गूंज रहा था, 'नेश कुमार को जेल भेजो और यह एसआईआर (SIR) नहीं चलेगा!'
बतर दें कि पिछले दो दिनों से चल रहे इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है. बावजूद इसके, छात्रों का हौसला कम होने का नाम नहीं ले रहा है.
विपक्षी दलों का सुप्रीम कोर्ट तक 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च
छात्रों के इस उग्र प्रदर्शन के बीच, सोमवार दोपहर विपक्षी सांसदों और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने भी बड़ा कदम उठाया. विपक्षी नेताओं ने 'मार्च फॉर डेमोक्रेसी' (लोकतंत्र के लिए मार्च) की शुरुआत करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर कूच किया. नेताओं का साफ कहना है कि वे 'वोट चोरी' के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी एक औपचारिक याचिका सुप्रीम कोर्ट को सौंपने जा रहे हैं.
एक तरफ प्रशासन जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों को रोकने के लिए पूरी ताकत झोक चुका है, तो दूसरी तरफ छात्रों और विपक्षी दलों का यह साझा तेवर इस बात की गवाही दे रहा है कि आने वाले दिनों में यह सियासी पारा और चढ़ने वाला है. चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे इन सवालों के बीच देश की राजधानी की यह सरगर्मी थमने का नाम नहीं ले रही है.