कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जा रही याचिका को लेकर अहम जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि इस याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर लगाई गई पाबंदियों का मुद्दा भी उठाया गया है. सिंघवी के मुताबिक, यह विपक्षी दलों की संयुक्त कानूनी पहल है. विभिन्न विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं.
असल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीजेआई से मुलाकात के लिए चिट्ठी लिखी थी. फिर उन्होंने याचिका भी दायर की है. इस पर सवाल उठ रहे हैं कि जब याचिका ही दायर करनी थी तो सीजेआई से मुलाकात के लिए चिट्ठी क्यों लिखी थी? आजतक से बातचीत में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इन सवालों पर जवाब दिया है.
'चीफ जस्टिस पर कोई दबाव नहीं बनाया'
अभिषेक मनु सिंघवी ने चीफ जस्टिस (CJI) पर दबाव बनाने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी नेताओं ने केवल मुलाकात का समय मांगने के लिए पत्र लिखा था. इसके बाद मिली सलाह के अनुसार अदालत में याचिका दाखिल करने का फैसला किया गया.
'लोग अपनी मर्जी से प्रदर्शन में शामिल हुए'
सिंघवी ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का बचाव करते हुए कहा कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना उनके गुस्से और असंतोष की स्वतःस्फूर्त अभिव्यक्ति है. उन्होंने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए लोगों को पैसे दिए जाने के आरोपों को भी खारिज किया. सिंघवी ने कहा कि लोग अपनी इच्छा से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे. उन्हें इसके लिए कोई भुगतान नहीं किया गया. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई कब होगी और मामले का निपटारा कब तक हो सकता है, इसे लेकर सिंघवी ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई.
उधर, पैदल मार्च के बीच राहुल गांधी की लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट के फाइलिंग काउंटर पर पहुंची और उनके वकीलों ने राहुल गांधी की ओर से याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू करवाई. क्योंकि राहुल गांधी समय पर व्यक्तिगत रूप से याचिका दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर तक नहीं पहुंच सके थे, राहुल गांधी इस याचिका में मुख्य याचिकाकर्ता हैं. उनके नाम से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. यह याचिका मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है.
याचिका में 11 याचिका कर्ताओं के नाम
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL में 11 याचिकाकर्ताओं के नाम शामिल हैं. इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एम. ए. बेबी और डी. राजा शामिल हैं.
इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे
सौगत रॉय
अखिलेश यादव
तेजस्वी प्रसाद यादव
संजय राउत
एम. ए. बेबी
डी. राजा
महुआ माजी
सुप्रिया सुले
ई. टी. मोहम्मद बशीर
सीजेआई ने किया था मुलाकात से इनकार
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 'INDIA' ब्लॉक के नेताओं के साथ मुलाकात के आवेदन को अस्वीकार कर दिया था. CJI दफ्तर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2026 को CJI ने ईमेल के जरिए विपक्षी नेताओं को इस फैसले और इसके पीछे की वजह की जानकारी दी थी.
CJI दफ्तर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष जिन मुद्दों को उठाना चाहता है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन हैं. ऐसे में इस मुद्दे पर नेताओं से मुलाकात करना उचित नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक, नेताओं को यह भी बताया गया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक तौर पर सरकार के कामकाज में दखल नहीं दे सकता. नेताओं से कहा गया था कि अगर वे अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत जाना चाहते हैं, तो वे कोर्ट में लीगल तरीके से आ सकते हैं.