एक महीने की खामोशी के बाद मिडिल ईस्ट में जंग फिर से भड़क उठी है. अमेरिका ने ईरान के अंदर मौजूद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों पर लगातार दूसरे दिन हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद प्रिंस हसन एयरबेस और वहां मौजूद अमेरिकी मरीन ठिकाने को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया.
इसी के साथ बहरीन के शेख ईसा एयरबेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला हुआ, तो कुवैत ने भी अपने ऊपर हुए ड्रोन हमलों की पुष्टि की. जॉर्डन की सेना के मुताबिक उसकी एयर डिफेंस ने अपनी सीमा में घुसी 13 में से 10 बैलिस्टिक मिसाइलें हवा में ही मार गिराईं, जबकि तीन मिसाइलें आबादी वाले इलाकों से दूर वीरान जगहों पर जाकर गिरीं, जिससे किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.
IRGC ने अपने बयान में कहा कि उसने हमला करने वालों को एक "अफसोसनाक जवाब" दिया है. संगठन का दावा है कि उसके हमले में बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, हालांकि अमेरिका की तरफ से इस दावे की कोई पुष्टि नहीं हुई है. उल्टा एक अमेरिकी अधिकारी ने इस दावे को झूठा बताया और कहा कि सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के बयान में कहीं भी किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने का जिक्र नहीं है.
ईरानी मीडिया का यह भी कहना है कि बहरीन के एयरबेस पर हमले में रडार सिस्टम और उन जगहों को निशाना बनाया गया जहां अमेरिकी सैनिक मौजूद थे. जॉर्डन के शहर मफरक में सायरन बजते सुने गए और वहां रॉकेट को हवा में रोके जाने की खबरें भी आईं.
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यह पूरा टकराव तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास IRGC के ठिकानों पर हमला किया. CENTCOM ने बताया कि यह कार्रवाई भारतीय समयानुसार शाम को शुरू हुई और यह ईरान की तरफ से कमर्शियल जहाजों और वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हुई कोशिशों के जवाब में की गई.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह ईरान के होर्मुज में समुद्री माइनें बिछाने की नाकाम कोशिश और जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमले का जवाब है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने फिर पलटवार किया तो उसे और भी सख्त और बड़े स्तर पर जवाब मिलेगा, हालांकि यह अब तक का सबसे बड़ा हमला नहीं होगा, असली बड़ा हमला अभी बाकी है.
ईरानी सरकारी मीडिया ने क्वेश्म आइलैंड, बंदर अब्बास, चाबहार, जास्क, सिरिक, असलुयेह, कोनारक और लावन में धमाकों की खबर दी, वहीं जिरोफ्त शहर के एक सिविलियन एयरपोर्ट पर भी हमला बताया गया. सबसे दुखद खबर सिरिक से आई, जहां अमेरिकी हमला एक घर पर हुआ जहां शादी समारोह चल रहा था. ईरानी रेड क्रिसेंट के मुताबिक इस हमले में एक बच्चे समेत कम से कम चार लोगों की मौत हुई और पचास से ज्यादा लोग घायल हुए.
सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने हमलों के बाद पहला संदेश जारी करते हुए कहा कि उनकी सेना के पास वॉशिंगटन के लिए ऐसे सबक हैं जो कभी भुलाए नहीं जा सकेंगे. IRGC ने यह दावा भी किया कि उसने उत्तरी इराक के इरबिल प्रांत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया, जिसमें एक रिपेयर सेंटर, गोदाम और अमेरिकी सर्विलांस बलून का गाइडेंस सिस्टम तबाह होने का दावा किया गया, हालांकि इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
इससे पहले सोमवार को होर्मुज से निकल रहे दो तेल टैंकरों पर हमला हुआ था, जो जुलाई के बाद पहली बार हुई इस तरह की झड़प थी. इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब चार फीसदी की उछाल आई. दरअसल फरवरी में अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद से ही ईरान ने होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग रोक रखी है, जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान बातचीत से समाधान चाहते हैं, लेकिन IRGC पर नियंत्रण और आर्थिक मुआवजे जैसी शर्तें रख रहा है, जो अमेरिका को मंजूर नहीं.
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इस बीच अमेरिका ने पूरे मिडिल ईस्ट के लिए यात्रा चेतावनी फिर जारी की है. ईरान ओमान के साथ मिलकर जहाजों की आवाजाही का एक फ्रेमवर्क बनाने की कोशिश में है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात कर क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की. वहीं संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA ने बताया कि जून 2025 के बारह दिन चले युद्ध के बाद से वह ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण नहीं कर पाई है, इसलिए यूरेनियम भंडार की मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं दी जा सकती.
क्षेत्र में तनाव के बीच गाजा में इजरायली सेना ने एक ऑपरेशन में हमास के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी को हिरासत में लिया, इस दौरान दो बच्चों समेत चार लोगों की मौत हुई. यमन में सऊदी समर्थित सुरक्षाबलों ने इस्लामिक स्टेट के प्रवक्ता अबू हुजैफा अल अंसारी को मार गिराया, इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी.