2 सितंबर 1945 को वियतनामी कम्युनिस्ट नेता हो ची मिन्ह ने हनोई के बा दिन्ह स्क्वायर में एक विशाल भीड़ के सामने वियतनाम की आजादी की घोषणा की. उन्होंने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के गठन का ऐलान किया. उस समय वियतनाम पर फ्रांस का कब्जा था और कुछ ही समय पहले जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण किया था. इसी मौके का फायदा उठाते हुए हो ची मिन्ह ने हनोई में हजारों लोगों की मौजूदगी में स्वतंत्र वियतनाम की घोषणा की. हालांकि, आजादी की यह घोषणा करने के बाद भी वियतनाम को पूरी तरह एकजुट और स्वतंत्र होने में करीब 30 साल लग गए.
वियतनाम को आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली थी. वियतनाम लंबे समय से फ्रांसीसी शासन के अधीन था. इसके अलावा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने भी वहां अपना कब्जा जमा लिया था.
कौन थे हो ची मिन्ह?
हो ची मिन्ह का जन्म 1890 में हुआ था. 1911 में वह एक फ्रांसीसी जहाज पर रसोइए के तौर पर वियतनाम से बाहर निकले. इसके बाद उन्होंने कई साल समुद्री जहाजों पर काम किया. वह लंदन और फिर फ्रांस पहुंचे.
फ्रांस में रहते हुए वह कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़े और 1920 में फ्रेंच कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए. बाद में वह सोवियत संघ गए, जहां उन्होंने क्रांतिकारी रणनीतियों का अध्ययन किया और कम्युनिस्ट इंटरनेशनल में सक्रिय भूमिका निभाई.
1924 में वह चीन पहुंचे और निर्वासित वियतनामी कम्युनिस्टों को संगठित करने का काम शुरू किया. चीन से निकाले जाने के बाद उन्होंने कई देशों की यात्रा की और आखिरकार 1941 में वियतनाम लौटे.
जापान ने भी जमा लिया था कब्जा
उस समय वियतनाम फ्रेंच इंडोचाइना का हिस्सा था. 1940 में जापान ने फ्रेंच इंडोचाइना पर कब्जा कर लिया. हालांकि, वहां फ्रांस की सरकार के प्रति वफादार अधिकारी भी काम करते रहे.
हो ची मिन्ह ने इस दौरान मित्र देशों से संपर्क किया और दक्षिणी चीन में जापान के खिलाफ चल रहे अभियानों में मदद की. इसके बाद 1941 में उन्होंने वियत मिन्ह नाम का एक गुरिल्ला संगठन बनाया. इसका मकसद वियतनाम को विदेशी शासन से आजाद कराना था. 1945 की शुरुआत में जापान ने वियतनाम में फ्रांसीसी प्रशासन को हटा दिया और कई फ्रांसीसी अधिकारियों को मार डाला.
जापान के आत्मसमर्पण के बाद मिला मौका
दूसरे विश्व युद्ध में जापान ने 2 सितंबर 1945 को मित्र देशों के सामने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया. हो ची मिन्ह को लगा कि यही वियतनाम की आजादी घोषित करने का सही समय है.
उन्होंने हनोई में भारी भीड़ के सामने वियतनाम की स्वतंत्रता का ऐलान कर दिया. इस तरह डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम अस्तित्व में आया. लेकिन फ्रांस इस फैसले को आसानी से मानने वाला नहीं था.
आजादी के बाद शुरू हुआ फ्रांस से युद्ध
फ्रांसीसी सेना ने दक्षिणी वियतनाम पर दोबारा कब्जा कर लिया और वियतनामी कम्युनिस्टों के साथ बातचीत शुरू की. लेकिन 1946 में ये बातचीत नाकाम हो गई. इसके बाद फ्रांसीसी युद्धपोतों ने उत्तरी वियतनाम के हैफोंग शहर पर बमबारी की, जिसमें हजारों लोग मारे गए.
जवाब में 19 दिसंबर 1946 को वियत मिन्ह ने हनोई में फ्रांसीसी सेना के खिलाफ हमला शुरू कर दिया. यहीं से पहले इंडो चाइना युद्ध की शुरुआत हुई. यह युद्ध करीब आठ साल तक चला. इस दौरान माओ शेतुंग के नेतृत्व वाले चीन के कम्युनिस्टों ने वियत मिन्ह का साथ दिया, जबकि अमेरिका ने फ्रांस और कम्युनिस्ट विरोधी वियतनामी ताकतों की मदद की.
1954 में फ्रांस को मिली बड़ी हार
युद्ध के दौरान फ्रांस को सबसे बड़ा झटका डिएन बिएन फू की लड़ाई में लगा. 1954 में उत्तर-पश्चिमी वियतनाम में फ्रांसीसी सेना को बड़ी हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद शांति वार्ता शुरू हुई और जेनेवा सम्मेलन में वियतनाम को 17वें समानांतर के आधार पर दो हिस्सों में बांट दिया गया.उत्तर वियतनाम की कमान हो ची मिन्ह के हाथ में आई, जबकि दक्षिण वियतनाम में सम्राट बाओ दाई का शासन रहा.
आजादी की घोषणा के बाद भी 30 साल चला संघर्ष
वियतनाम का बंटवारा स्थायी नहीं रहा. 1950 के दशक के आखिर में हो ची मिन्ह ने दक्षिण वियतनाम में कम्युनिस्ट गुरिल्ला आंदोलन को संगठित किया, जिसे वियत कांग के नाम से जाना गया.
उत्तर वियतनाम और वियत कांग ने अमेरिका समर्थित दक्षिण वियतनाम की सरकारों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा. 1964 से अमेरिका की सैन्य भागीदारी भी बड़े स्तर पर शुरू हुई और करीब एक दशक तक वियतनाम युद्ध चलता रहा.
जिस दिन आजादी घोषित की, उसी दिन हुई हो ची मिन्ह की मौत
इतिहास का एक बेहद दिलचस्प संयोग यह है कि 2 सितंबर 1969 को हो ची मिन्ह की मौत हो गई. यानी जिस तारीख को उन्होंने 24 साल पहले वियतनाम की आजादी का ऐलान किया था, उसी दिन उनकी जिंदगी खत्म हुई.
उस समय तक वियतनाम पूरी तरह एकजुट नहीं हुआ था. उनकी मौत के करीब छह साल बाद, 1975 में उत्तर वियतनामी और कम्युनिस्ट सेनाओं ने दक्षिण वियतनाम की राजधानी साइगॉन पर कब्जा कर लिया.
इसके साथ ही उत्तर और दक्षिण वियतनाम का एकीकरण हुआ और देश कम्युनिस्ट शासन के तहत एकजुट हो गया. बाद में साइगॉन का नाम बदलकर हो ची मिन्ह सिटी कर दिया गया. इस तरह 2 सितंबर 1945 को आजादी की घोषणा करने के बावजूद वियतनाम को अपने देश को एकजुट करने और लंबे विदेशी तथा गृह संघर्ष से निकलने में करीब 30 साल लग गए.