ईरान-इजरायल युद्ध के तीसरे हफ्ते में अमेरिकी सेना को बड़ा नुकसान हुआ है. करीब 200 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, 13 की मौत हुई और एक दर्जन MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो गए.
जंग जलवायु परिवर्तन को तेज कर रहे हैं. वन अर्थ जर्नल की स्टडी के अनुसार, इजरायल-गाजा संघर्ष से 3.3 करोड़ मीट्रिक टन CO₂e उत्सर्जन हुआ, जो जॉर्डन के पूरे साल के उत्सर्जन या 76 लाख कारों के सालाना धुएं या 3.31 करोड़ एकड़ जंगलों द्वारा एक साल में सोखे जाने वाले कार्बन के बराबर है. सैन्य गतिविधियां, बमबारी और पुनर्निर्माण इसका मुख्य कारण हैं.
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया है. इस प्रस्ताव में खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई है. प्रस्ताव में ईरान से खाड़ी देशों पर तुरंत हमले बंद करने की मांग की गई है.
जॉर्डन की अथॉरिटी ने पुष्टि की है कि ईरान की तरफ से जॉर्डन पर 100 से अधिक हमले किए गए है. जॉर्डन ने ये भी बताया की 119 से ज्यादा मिसाइलों और ड्रोन अटैक हुए जिनमें सिर्फ 14 ही इंटरसेप्ट हो सके बाकी सभी प्रोजेक्टाइल जमीन पर गिरे, जिसमें अमेरिकी एयर डिफेंस THAAD को भी ध्वस्त कर दिया.
ईरान ने अमेरिका के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम 'थाड' (THAAD) को निशाना बनाकर मिडिल ईस्ट में युद्ध की दिशा बदल दी है. नई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने जॉर्डन, यूएई और सऊदी अरब में अमेरिकी रडार प्रणालियों को नष्ट कर दिया है, जिससे एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हो गया है.
ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान हुआ है. युद्ध के पहले चार दिनों में ही करीब 2 अरब डॉलर यानी 18000 करोड़ रुपये से ज्यादा के अमेरिकी रडार और रक्षा सिस्टम नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए. इन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सुरक्षा ढांचे की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग छठवें दिन भी जारी है. इस भीषण महायुद्ध में अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोने और मिसाइल हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में मानवीय और आर्थिक नुकसान का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है.
जॉर्डन में अमेरिकी दूतावास को सुरक्षा संबंधी संभावित खतरों को देखते हुए खाली कराया गया है. सभी कर्मचारियों को कैंपस छोड़ने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी तरह के हमले या गंभीर स्थिति से बचा जा सके. यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है और प्रिकॉशंस के तौर पर माना जा रहा है. अधिकारियों ने दूतावास के कर्मचारियों को तुरंत कदम उठाने और खतरे से बचने के निर्देश दिए हैं. इस प्रकार की सावधानीपूर्ण कार्रवाई से आधिकारिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है.
ईरान ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ सुनियोजित जवाबी हमला किया. बैलिस्टिक (शहाब-3, सेज्जिल), क्रूज (सुमार, कुद्स) मिसाइलों और शाहेद ड्रोनों से खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डे (बहरीन NSA, कतर अल उदैद, यूएई अल धफरा) और इजरायल के तेल अवीव ठिकानों को निशाना बनाया. मोज़ैक डिफेंस रणनीति से छिपे लॉन्चरों से हमले किए.
ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका की चेतावनियों को नजरअंदाज किया और परमाणु कार्यक्रम जारी रखा. ट्रंप ने साफ किया कि ईरान की परमाणु क्षमताओं को खत्म करना अमेरिका का लक्ष्य है और जरूरत पड़ने पर जमीनी सेना भी उतारी जा सकती है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कई देशों के रुख में बदलाव की भी बात कही गई.
US-Israel's Iran Strikes LIVE Updates: अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग जैसे हालात के असर में हैं. तीनों देशों की सेनाएं लामबंद हैं और हमले जारी हैं. ईरान ने यूएस और इजरायल के हमलों का जवाब देते हुए मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल के कई शहरों पर हमले किए हैं. वहीं, तमाम तरह के दावों के बाद ईरानी स्टेट मीडिया ने खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि की है.
ईरान द्वारा मिडिल ईस्ट में किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर अमेरिका, बहरीन, सऊदी अरब सहित कुल सात देशों ने एक ज्वाइंट स्टेटमेंट जारी किया है. उन्होंने अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया है.
नील से फरात तक फैले तथाकथित "ग्रेटर इजरायल" के विचार ने मध्य पूर्व में फिर से बहस छेड़ दी है. बाइबिल के वादे, जायोनिस्ट राजनीति और मौजूदा विस्तारवादी कदमों के बीच सवाल उठता है, क्या यह आस्था है या रणनीति? इस टकराव में फिलिस्तीनियों, अरब देशों और क्षेत्रीय स्थिरता का भविष्य दांव पर है.
ईरान मिडिल-ईस्ट में मौजूद अमेरिका के बेस पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दाग रहा है. कतर के अल उदेद, जॉर्डन के मुवाफक साल्टी और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान बेस पर अमेरका ने कुछ दिनों पहले फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट विमान और पैट्रियट सिस्टम बढ़ाए गए थे.
मुंबई के NMACC इवेंट में ईशा अंबानी ने क्वीन रानिया से मुलाकात के दौरान अपनी पहले पहनी गई कोरल ड्रेस को फिर से स्टाइल किया. इससे पहले ईशा ये ड्रेस एंटीलिया में ‘United in Triumph’ इवेंट में पहनी थी.
Jordan Queen रानिया अल अब्दुल्ला ने मुंबई में स्थित नीता-मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर का विजिट किया और इस दौरान पूरी अंबानी फैमिली उनके साथ नजर आई.
चीन की सैटेलाइट्स ने मुवाफक साल्टी एयर बेस पर THAAD सिस्टम का खुलासा हुआ है. ईरान के संभावित हमलों से अमेरिकी फौजों की रक्षा के लिए लगाए गए थे. किसी भी कार्रवाई से पहले रक्षा मजबूत करनी होगी. THAAD महंगा है और सीमित स्टॉक है. 2025 में ईरान के फतह हाइपरसोनिक मिसाइलों के सामने थाड कमजोर साबित हुआ था.
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि अमेरिका मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है. कतर के अल उदेद, जॉर्डन के मुवाफक साल्टी और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान बेस पर फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट विमान और पैट्रियट सिस्टम बढ़ाए गए है. ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमले की तैयारी दिख रही है. ट्रंप की चेतावनी से तनाव चरम पर है.
अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी में है, लेकिन सऊदी अरब, UAE और कतर ने साफ कर दिया है कि वे अपना एयरस्पेस और लॉन्चपैड नहीं देंगे. ऐसे में जॉर्डन अमेरिका का संभावित रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है. खाड़ी देशों की दूरी ने ट्रंप प्रशासन की रणनीति को झटका दिया है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त तीन देशों के दौरे पर है. पीएम मोदी कुल चार दिनों में तीन देशों की यात्रा कर रहे है. वह जॉर्डन और इथियोपिया के बाद आज ओमान पहुंच गए हैं.
जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह पैगंबर मोहम्मद साहब की 41वीं पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं जबकि क्राउन प्रिंस हुसैन बिन अब्दुल्ला उनकी 42वीं पीढ़ी के सीधे वंशज हैं. जॉर्डन का शाही परिवार आधुनिक सोच और पश्चिमी जीवनशैली को अपनाता है. महारानी रानिया और राजकुमारी रज़वा अक्सर पश्चिमी कपड़ों में दिखती हैं और हिजाब-बुर्के से दूरी बनाए रखती हैं.