अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है. होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने और जलमार्ग बंद करने के ऐलान से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है. अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई ईरान की लगातार आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है
ईरान ने दावा किया है कि जॉर्डन के अल अराक एयरबेस पर मौजूद F-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर को नष्ट कर दिया गया है. इसके साथ ही ईरान ने यह भी कहा कि जॉर्डन में एक अमेरिकी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया है. जॉर्डन में कुल चार सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला किया गया है.
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में किए गए हमले में खैबर शेख नामक मिसाइल का इस्तेमाल किया है. इस हमले में ईरानी ताकतों ने अपनी सैन्य क्षमता दिखाते हुए खैबर शेख मिसाइल का इस्तेमाल कर अपनी सटीकता और शक्ति का परिचय दिया है.
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैलता दिखाई दे रहा है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा किया है. बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट, कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस और अन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया.
ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता गहरा गई है. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि ये कदम हालिया सुरक्षा घटनाओं के जवाब में उठाया गया.
ईरान-अमेरिका जंग को लेकर एक और बड़ी खबर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने दागी कई मिसाइलें ईरान के मरकजी के खोमने से 6 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी IRGC ने दावा करते हुए कहा कि उसने पश्चिम एशिया में अमेरिकी व सहयोगी देशों के कुल 21 एयर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया है. बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का वीडियो भी सामने आया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक तेल संकट को रोकने, युद्ध को सीधे इजरायल-ईरान टकराव में बदलने से बचाने, लेबनान में हिजबुल्लाह का खात्मा करने, प्रतिबंधों के जरिए बातचीत का मौका देने और अपने अरब सहयोगियों की सुरक्षा के लिए इजरायल को जवाबी हमले से रोक रहे हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खतरे के बाद सऊदी अरब, यूएई, इराक और ओमान जैसे अरब देश पोर्ट से पाइपलाइन तक का रास्ता बना रहे हैं. सऊदी की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, यूएई की हबशान-फुजैरा पाइपलाइन और इराक की किर्कुक-सेयहान पाइपलाइन को फुल स्पीड पर चलाया जा रहा है. ताकि तेल एक्सपोर्ट आराम से हो सके.
इजरायल द्वारा सोमालीलैंड में अपना राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है. सऊदी, कतर सहित 16 देशों ने चेतावनी दी है कि यह कदम अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
ईरान ने मिडिल-ईस्ट के पांच बड़े देशों बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन से युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा है. ईरान का आरोप है कि ये देश अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल थे.
28 फरवरी से शुरू हुई अमेरिका, इजरायल और ईरान की 40 दिन की जंग में 3640 लोग मारे गए. ईरान में 2076, लेबनान में 1497, इजरायल में 26 और अमेरिका में 13 मौतें हुईं. 90 हजार घर, 760 स्कूल और 307 अस्पताल तबाह हो गए. खाड़ी देशों में भी भारी नुकसान हुआ.
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी वायु सेना के अड्डे पर स्वॉर्न ड्रोन से हमला किया है. जॉर्डन का अल अजराक एयरबेस अमेरिकी वायु सेना का अहम बेस है जिसे ईरान ने निशाना बनाने का काम किया है. इस हमले की तस्वीर भी ईरान की तरफ से जारी की गई है. ईरान की तरफ से ये हमला बताता है कि अमेरिका जो ईरान की सैन्य ताकत को बुरी तरह खत्म करने का दावा करता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया समेत 5 देशों के शीर्ष नेताओं से बातचीत में होर्मुज के रास्ते मुक्त आवाजाही पर जोर दिया है. उन्होंने खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर ईद की भी बधाई दी. पीएम कुछ देशों के नेताओं से ईरान जंग शुरू होने के बाद दो-दो बार बात कर चुके हैं.
ईरान-इजरायल युद्ध के तीसरे हफ्ते में अमेरिकी सेना को बड़ा नुकसान हुआ है. करीब 200 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, 13 की मौत हुई और एक दर्जन MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो गए.
जंग जलवायु परिवर्तन को तेज कर रहे हैं. वन अर्थ जर्नल की स्टडी के अनुसार, इजरायल-गाजा संघर्ष से 3.3 करोड़ मीट्रिक टन CO₂e उत्सर्जन हुआ, जो जॉर्डन के पूरे साल के उत्सर्जन या 76 लाख कारों के सालाना धुएं या 3.31 करोड़ एकड़ जंगलों द्वारा एक साल में सोखे जाने वाले कार्बन के बराबर है. सैन्य गतिविधियां, बमबारी और पुनर्निर्माण इसका मुख्य कारण हैं.
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया है. इस प्रस्ताव में खाड़ी सहयोग परिषद के देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की गई है. प्रस्ताव में ईरान से खाड़ी देशों पर तुरंत हमले बंद करने की मांग की गई है.
जॉर्डन की अथॉरिटी ने पुष्टि की है कि ईरान की तरफ से जॉर्डन पर 100 से अधिक हमले किए गए है. जॉर्डन ने ये भी बताया की 119 से ज्यादा मिसाइलों और ड्रोन अटैक हुए जिनमें सिर्फ 14 ही इंटरसेप्ट हो सके बाकी सभी प्रोजेक्टाइल जमीन पर गिरे, जिसमें अमेरिकी एयर डिफेंस THAAD को भी ध्वस्त कर दिया.
ईरान ने अमेरिका के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम 'थाड' (THAAD) को निशाना बनाकर मिडिल ईस्ट में युद्ध की दिशा बदल दी है. नई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान ने जॉर्डन, यूएई और सऊदी अरब में अमेरिकी रडार प्रणालियों को नष्ट कर दिया है, जिससे एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर हो गया है.
ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिका को भारी सैन्य नुकसान हुआ है. युद्ध के पहले चार दिनों में ही करीब 2 अरब डॉलर यानी 18000 करोड़ रुपये से ज्यादा के अमेरिकी रडार और रक्षा सिस्टम नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए. इन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सुरक्षा ढांचे की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी जंग छठवें दिन भी जारी है. इस भीषण महायुद्ध में अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोने और मिसाइल हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में मानवीय और आर्थिक नुकसान का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है.
जॉर्डन में अमेरिकी दूतावास को सुरक्षा संबंधी संभावित खतरों को देखते हुए खाली कराया गया है. सभी कर्मचारियों को कैंपस छोड़ने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी तरह के हमले या गंभीर स्थिति से बचा जा सके. यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है और प्रिकॉशंस के तौर पर माना जा रहा है. अधिकारियों ने दूतावास के कर्मचारियों को तुरंत कदम उठाने और खतरे से बचने के निर्देश दिए हैं. इस प्रकार की सावधानीपूर्ण कार्रवाई से आधिकारिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है.