ईरान ने दावा किया कि उसके अरश ड्रोन ने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर अमेरिकी नेविगेशन सिस्टम को निशाना बनाया. दोनों पक्षों के हमलों से क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ रहा है.
अमेरिका ने 30 जुलाई को ईरान के कई ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए हैं। यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों के जवाब में की गई। CENTCOM के मुताबिक सभी मिसाइलें इंटरसेप्ट कर ली गई थीं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे अचानक किए गए हमले की कोशिश बताया है. CENTCOM के मुताबिक, सभी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया. एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अच्छी बातचीत चल रही है और समझौते की अच्छी संभावना है.
ईरानी सेना ने बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमला किया है. ईरान ने बहरीन के एयरबेस को निशाना बनाया तो वहीं जॉर्डन के एयरबेस पर भी हमले का दावा किया. इन हमलों को ईरान ने अमेरिकी एयर स्ट्राइक का जवाब बताया है. इराक में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर कई सारे धमाके किए गए.
अमेरिका ने ईरान जंग में B-1 लैंसर, B-2 और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस बॉम्बर्स की ताकत झोंक दी है. ये सुपरसोनिक, स्टेल्थ और लंबी दूरी वाले योद्धा ईरान के परमाणु, मिसाइल और तेल ठिकानों पर तबाही मचा रहे हैं.
ईरान-अमेरिका जंग को लेकर एक और बड़ी खबर आई है. ईरान ने एक बार फिर जॉर्डन पर किया हमला किया है. हमले के बाद जॉर्डन में साइरन बज रहे रहे है. हमले को लेकर जॉर्डन की सेना ने बयान जारी कर कहा, तीन ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर तबाह किया गया है. वहीं अभी तक किसी भी तरह के जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है.
ईरान अब अमेरिकी विमानों को सीधे मारने की बजाय उनके रनवे छीन रहा है. इसे डिबेसिफिकेशन कहते हैं. क्षेत्रीय एयरबेस कम होने से अमेरिका के ऑपरेशन मुश्किल हो गए हैं.
नौ रातों के लड़ाई में अमेरिका-ईरान टकराव तेज हो गया है. जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों को नुकसान, ईरान में बुनियादी ढांचे की भारी तबाही हुई है. मिडिल ईस्ट के कई देश प्रभावित हुए हैं.
उत्तर इराक में एक ईरानी ड्रोन के फटने से एक अमेरिकी सैनिक की मौत और एक के घायल होने के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब जॉर्डन पर भी दिखने लगा है. अमेरिकी दूतावास ने जॉर्डन के अकाबा शहर को लेकर सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए अपने नागरिकों को एयरपोर्ट और बंदरगाह से दूर रहने की सलाह दी है. हालांकि, जॉर्डन सरकार ने किसी भी खतरे या निकासी के दावे से इनकार किया है.
Iran ने चेतावनी दी है कि अगर United States के हमले जारी रहे, तो वह ‘फुल-स्केल आक्रामक सैन्य कार्रवाई’ शुरू करेगा। Mohsen Rezaei ने अमेरिका को तनाव न बढ़ाने की चेतावनी दी है, जबकि युद्धविराम टूटने के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र और जॉर्डन में हमले तेज कर दिए हैं।
ईरान के साथ जारी युद्ध में अब तक अमेरिका के 16 सैनिक मारे जा चुके हैं. हाल ही में जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए. इससे पहले जुलाई में अरब सागर में हेलीकॉप्टर क्रैश में एक पायलट की मौत हुई थी. फरवरी में कुवैत में ड्रोन हमले में 6 सैनिक मारे गए थे, वहीं मार्च में इराक में विमान हादसे में 6 और सैनिक शहीद हुए थे.
जॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ गया है. इस बीच मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि हमले जारी रहे तो उसका जवाब भी वैसा ही मिलेगा.
ईरान ने जॉर्डन में स्थित जिस अमेरिकी बेस पर हमला किया है वह एक अहम मिलिट्री ठिकाना है जो इंटरनेशनल मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए मुख्य केंद्र का काम करता है, जिसमें अमेरिका और NATO सहयोगियों के नेतृत्व वाले ऑपरेशन्स भी शामिल है.। अम्मान से लगभग 100 किलोमीटर पूर्व में रणनीतिक रूप से स्थित इस बेस में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है.
ईरान के IRGC ने दावा किया है कि उसने सीरिया के अल-तनफ और कतर के अल उदैद अमेरिकी बेस पर हमला किया. इसमें कई अमेरिकी सैनिक मारे गए और रडार व एयरक्राफ्ट नष्ट हुए.
ईरान और अमेरिका फिर से युद्ध के मैदान में आ डटे हैं. खाड़ी में कुछ महीनों से जारी जंग के इस नए फेज की वजह न तो परमाणु हथियार हैं, ना ही लंबी दूरी की मिसाइलें. अंकल सैम और ईरान में ताजा सैन्य टकराव की वजह बना है होर्मुज. अमेरिका होर्मुज पर कंट्रोल का दावा करते हुए हर रोज सुरक्षित पार कराए गए जहाजों के आंकड़े गिना रहा है, वहीं ईरान भी हर रोज होर्मुज से गुजरते जहाजों को निशाना बना रहा है. इन दो देशों की जंग में कुछ ऐसे देश भी पिस रहे हैं, जिनका इस युद्ध से दूर-दूर तक कोई सीधा संबंध नहीं है.
ईरान ने मिडिल-ईस्ट के तीन देशों जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं. जॉर्डन ने चार मिसाइलों को हवा में मार गिराया जबकि ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ये कार्रवाई की. बहरीन में तीसरी बार मिसाइल अलर्ट जारी किया गया.
ईरान ने अमेरिकी बेस पर हमले करे, जबकि अमेरिका ने ईरान में तबाही मचाई. सैटेलाइट तस्वीरों में जॉर्डन, कतर, बहरीन में नुकसान और ईरान के बूशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास बर्बादी दिखी.
ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज पर तनाव बढ़ गया है. ईरान ने जहाजों पर हमला कर खाड़ी को बंद किया. बदले में ट्रंप ने 300 टारगेट्स तबाह किए. ईरान ने जॉर्डन, बहरीन समेत कई अमेरिकी बेसों पर मिसाइलें दागीं.
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है. होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने और जलमार्ग बंद करने के ऐलान से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है. अमेरिका का कहना है कि ये कार्रवाई ईरान की लगातार आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है
ईरान ने दावा किया है कि जॉर्डन के अल अराक एयरबेस पर मौजूद F-35 लड़ाकू विमानों के हैंगर को नष्ट कर दिया गया है. इसके साथ ही ईरान ने यह भी कहा कि जॉर्डन में एक अमेरिकी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया है. जॉर्डन में कुल चार सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला किया गया है.