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पुतिन से ट्रंप नहीं लेंगे पंगा! नए प्रतिबंधों को रोका... रूसी दूत ने फैसले को सराहा

डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यकारी आदेश से रूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों और शुल्क के बड़े पैकेज को लागू होने से दो दिन पहले रोक दिया. व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इसे अहम और ऐतिहासिक पल बताया, जबकि अमेरिकी संसद के कई सांसदों ने फैसले और डीजल समझौते का विरोध किया.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन को मिलने वाले इंटरनेट पर रोक लगा दी थी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में यूक्रेन को मिलने वाले इंटरनेट पर रोक लगा दी थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस पर नए प्रतिबंधों को लागू नहीं करने के फैसले को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दूत किरिल दिमित्रिएव ने 'ऐतिहासिक पल' बताया है. शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिमित्रिएव ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की ओर से ग्राहम एक्ट को रोकना एक अहम और वास्तव में ऐतिहासिक फैसला है. उनकी यह टिप्पणी ट्रंप की ओर से रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के नए पैकेज को रोकने के लिए कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटे बाद आई.

ट्रंप ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को इस आदेश पर हस्ताक्षर किए. नए प्रतिबंधों को 18 अक्टूबर से लागू किया जाना था. हालांकि, ट्रंप ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन्हें लागू करने पर रोक लगा दी. अमेरिकी प्रशासन ने कांग्रेस को बताया कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में उठाया गया है.

यह भी पढ़ें: 'ईरान पर परमाणु बम नहीं गिराऊंगा', बोले ट्रंप... पिकैक्स माउंटेन पर हमले की तैयारी

क्या था ग्राहम एक्ट?

लिंडसे ग्राहम के नाम पर बने इस कानून पर ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर किए थे. अमेरिकी कांग्रेस में इसे दुर्लभ द्विदलीय समर्थन मिला था. इसका मकसद रूस के बैंकों, रक्षा क्षेत्र, वरिष्ठ अधिकारियों और तेल की ढुलाई करने वाले उसके 'शैडो फ्लीट' को निशाना बनाकर क्रेमलिन की युद्ध से जुड़ी कमाई पर रोक लगाना था.

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इस कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था. इसमें भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार भी शामिल थे. इसके अलावा, रूस से अमेरिका में आने वाले ऊर्जा उत्पादों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था. ऐसे में प्रतिबंधों को रोकने के ट्रंप के फैसले से भारत और चीन को भी राहत मिली है.

तेल की कीमतों और रूस के साथ समझौते का असर

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों के बीच ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है. रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने रूस से वैश्विक बाजार में लाखों टन डीजल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए समझौता किया है, ताकि ईंधन की कीमतों को कम करने में मदद मिल सके. इसके तहत 9 अक्टूबर को रूसी ईंधन निर्यात पर कुछ पाबंदियों में अस्थायी छूट भी दी गई थी.

दिमित्रिएव ने कहा कि ग्राहम एक्ट के लागू होने से अमेरिका और रूस के बीच बचा हुआ आर्थिक सहयोग भी लगभग ठप हो सकता था. उन्होंने दोनों देशों के बीच संभावित संयुक्त निवेश, जिनमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाले डेटा सेंटर भी शामिल हैं, पर बातचीत का जिक्र किया.

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यह भी पढ़ें: ट्रंप का फैसला... रूसी तेल खरीद पर 100% टैरिफ का खतरा टला, भारत के लिए बड़ी राहत

अमेरिका में फैसले का विरोध

ट्रंप के इस कदम की अमेरिकी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आलोचना की है. डेमोक्रेटिक सांसद डॉन बेयर ने इसे पुतिन के सामने झुकने जैसा कदम बताया. आलोचकों का कहना है कि रूस को ईंधन निर्यात की छूट देने से उसे अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद मिल सकती है.

हालांकि, ट्रंप के आदेश से रूस पर पहले से लागू अमेरिकी प्रतिबंध खत्म नहीं हुए हैं. इससे सिर्फ प्रतिबंधों के नए पैकेज को लागू करने पर रोक लगी है और रूस को लेकर आगे की नीति तय करने में व्हाइट हाउस को अधिक छूट मिली है.

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