ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों को ईरान में जमीन पर उतारने की संभावना को भी खारिज किया. हालांकि, CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा ठिकानों और परमाणु केंद्रों पर हमले के नए विकल्प तैयार कर रही है. इनमें अमेरिका के सबसे बड़े गैर-परमाणु बम 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' का इस्तेमाल भी शामिल हो सकता है.
न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' परमाणु बम नहीं है, बल्कि यह बेहद शक्तिशाली पारंपरिक बम है. उन्होंने कहा, "नहीं, मैं परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा. हमें इसकी जरूरत नहीं है." जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ईरान में अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर उतारने पर विचार करेंगे, तो उन्होंने कहा, "मुझे ऐसा होता नहीं दिख रहा."
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पिकैक्स माउंटेन पर हमले का विकल्प
CNN ने सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप ने सेना को ईरान पर हमले के नए विकल्प तैयार करने का निर्देश दिया है. इनमें ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं शामिल हैं. ईरान के पिकैक्स माउंटेन में मौजूद परमाणु ठिकाने पर हमला भी इन विकल्पों में शामिल बताया गया है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता. उनके मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के नीचे दबी हुई हैं और अब अमेरिका पिकैक्स माउंटेन को निशाना बनाने पर विचार कर रहा है.
कितना ताकतवर है 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स'?
CNN के मुताबिक, GBU-43/B MOAB का वजन करीब 21,600 पाउंड है. यह अमेरिकी सेना के पास मौजूद सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है. इसका इस्तेमाल बड़े इलाके में भारी विस्फोट करने के लिए किया जाता है, लेकिन जमीन के काफी नीचे बने ठिकानों को नष्ट करने की इसकी क्षमता सीमित है.
सैन्य योजना से जुड़े सूत्रों ने CNN को बताया कि यह बम गहराई में स्थित ठिकानों को भेदने के लिए नहीं बनाया गया है. पिकैक्स माउंटेन के संदिग्ध परमाणु ठिकानों के चारों ओर ग्रेनाइट की कई परतें होने की बात कही जाती है. ऐसे में सवाल है कि क्या MOAB इन भूमिगत ठिकानों को नष्ट कर पाएगा.
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ट्रंप ने 2017 में अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के ठिकानों पर MOAB गिराने की मंजूरी दी थी. वह इस बम का युद्ध में इस्तेमाल मंजूर करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे.
परमाणु हथियारों पर रूस-चीन से बातचीत
ट्रंप ने अमेरिका के परमाणु हथियारों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर है. उन्होंने दावा किया कि चीन अगले पांच साल में अमेरिका के करीब पहुंच सकता है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर बातचीत कर रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर संभव हुआ तो परमाणु हथियारों को खत्म करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं.