अमेरिक के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को बर्थराइट नागरिकता और बर्थ टूरिज्म को लेकर दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए. व्हाइट हाउस के मुताबिक, इन आदेशों के जरिए उन मामलों का दायरा बढ़ाया जाएगा, जहां अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को अपने आप नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए. साथ ही विदेशियों के सिर्फ बच्चे को अमेरिकी नागरिक बनाने के मकसद से अमेरिका आने पर भी सख्ती की जाएगी.
अमेरिका में बर्थराइट नागरिकता का मतलब है कि देश की जमीन पर जन्म लेने वाले व्यक्ति को आम तौर पर अमेरिकी नागरिकता मिलती है. यह व्यवस्था अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की नागरिकता धारा से जुड़ी है. ट्रंप लंबे समय से इस व्यवस्था को सीमित करने की कोशिश करते रहे हैं. उनकी पिछली कोशिश को अदालत में चुनौती मिली थी और सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रशासन को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी.
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नए आदेशों में खास तौर पर उन परिस्थितियों को निशाना बनाया गया है, जिनमें बच्चे के माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं और अमेरिका में उनकी मौजूदगी अस्थायी या अवैध है. प्रशासन का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, इन आदेशों को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना है और नागरिक अधिकार संगठनों ने इसे 14वें संशोधन के खिलाफ बताया है.
बर्थ टूरिज्म पर भी सख्ती
ट्रंप ने बर्थ टूरिज्म पर भी रोक लगाने का आदेश दिया है. बर्थ टूरिज्म में विदेशी महिलाएं बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आती हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके. अमेरिका में इसे रोकने वाला कोई ऐसा सीधा कानून नहीं है जो हर मामले में इस प्रथा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाता हो.
हालांकि, 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान लागू नियम के तहत अगर कोई व्यक्ति टूरिस्ट या बिजनेस वीजा का इस्तेमाल मुख्य रूप से बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के मकसद से करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.
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बच्चे को जन्म देने के बहाने टूर पर आते हैं अमेरिका
बर्थ टूरिज्म से जुड़े मामलों में धोखाधड़ी या दूसरे अपराधों के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, सरकार के पास ऐसे विदेशियों की कोई आधिकारिक संख्या नहीं है जो खास तौर पर बच्चे को जन्म देने और उसे अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका आते हैं.
2020 में सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज ने अनुमान लगाया था कि 2016-17 की एक साल की अवधि में करीब 20 हजार से 25 हजार महिलाएं बर्थ टूरिज्म के लिए अमेरिका आई थीं. ट्रंप के नए आदेशों के बाद अब बर्थराइट नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी के केंद्र में आ गया है.