7 अगस्त 1959 को अमेरिका ने उस सैटेलाइट को लॉन्च किया, जिसने पृथ्वी की पहली तस्वीर स्पेस से ली थी. फ्लोरिडा के केप कैनावेरल से थोर-एबल रॉकेट के ज़रिए एक्सप्लोरर 6 सैटेलाइट लॉन्च किया गया. इसका मकसद ऊपरी वायुमंडल में पृथ्वी के इलेक्ट्रिक और मैग्नेटिक फ़ील्ड का अध्ययन करना था, लेकिन इसमें बादलों की परत को स्कैन करने और उनकी तस्वीरें लेने के लिए एक डिवाइस भी लगा था.
इस अंतरिक्ष यान को 'पैडलव्हील' सैटेलाइट के नाम से जाना जाता है. यह सैटेलाइट एक फोटोसेल स्कैनर से लैस था. इसने 17,000 मील की दूरी से पृथ्वी की सतह और बादलों की एक कच्ची तस्वीर भेजी.
मिशन शुरू होने के लगभग एक हफ़्ते बाद, मेक्सिको के ऊपर चक्कर लगाते हुए इसने सैटेलाइट के ज़रिए पृथ्वी की पहली तस्वीर ली और उसे भेजा. यह तस्वीर साफ़-सुथरी नहीं थी और इसमें उत्तर-मध्य प्रशांत महासागर दिख रहा था. इसे हवाई के ग्राउंड स्टेशन तक भेजने में लगभग 40 मिनट लगे.
इस तस्वीर को सितंबर में नासा ने जारी किया था. इस तस्वीर में सूर्य की रोशनी में पृथ्वी का एक अर्धचंद्राकार हिस्सा दिखाई दे रहा था. यह मेक्सिको था, जिसे एक्सप्लोरर 6 ने पृथ्वी के पश्चिम की ओर 20,000 मील प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ान भरते हुए कैद किया था.
एक्सप्लोरर 6, मैरीलैंड में NASA के गोडार्ड स्पेस फ़्लाइट सेंटर की देखरेख में भेजा गया पहला वैज्ञानिक सैटेलाइट था. इसी सैटेलाइट ने आगे चलकर मरकरी, जेमिनी और अपोलो प्रोग्राम के क्रू वाले मिशन के लिए ट्रैकिंग और कम्युनिकेशन नेटवर्क को ऑपरेट किया. यह सैटेलाइट स्फ़ेरॉइडल था और लॉन्च के बाद पृथ्वी के चारों ओर एक अंडाकार ऑर्बिट में चला गया.
एक्सप्लोरर 6 जैसे शुरुआती मिशनों ने उन सीमाओं को आगे बढ़ाया, जिन्हें पहले नामुमकिन माना जाता था. इसके सिर्फ 10 साल बाद इतिहास रचा गया. जब इंसानों ने चांद पर पहला कदम रखा. इस सफर के दौरान हमने पृथ्वी के बारे में भी और जानकारी हासिल की एक्सप्लोरर 6 ने हमें उस छोटे, नीले ग्रह की पहली झलक दिखाई. इसे हम अपना घर कहते हैं.