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नाम बड़ा, दर्शन छोटे! ग्रेटर नोएडा की महागुन मायवुड्स में पानी-बिजली के लिए सड़क पर उतरे लोग

महागुन माइवुड्स सोसाइटी में लोग पिछले 48 घंटे से पानी और बिजली की ऐसी परेशानी से जूझ रहे थे. सोसाइटी के लोग 10 अगस्त सोमवार की रात 11 बजे से मंगलवार दोपहर तक सड़क जाम रखा.

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महागुन सोसाइटी में हुआ विरोध प्रदर्शन (फोटो- ITG)
महागुन सोसाइटी में हुआ विरोध प्रदर्शन (फोटो- ITG)

ग्रेटर नोएडा की चमचमाती ऊंची इमारतें... 38 से ज्यादा टावर वाली बड़ी सोसाइटी... नाम है महागुन मायवुड्स। लेकिन इन दिनों इस सोसाइटी पर एक कहावत बिल्कुल सटीक बैठती नजर आ रही है—नाम बड़े और दर्शन छोटे

जिस सोसाइटी में तमाम आधुनिक सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, वहां रहने वाले लोग पिछले एक महीने से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। परेशानी तब और बढ़ गई, जब पिछले 48 घंटे में पानी के साथ बिजली की दिक्कत भी सामने आ गई।

हालात ऐसे बने कि सोमवार रात करीब 11 बजे बड़ी संख्या में निवासी अपने घरों से बाहर निकल आए और सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मंगलवार दोपहर तक लोगों ने सड़क जाम रखा।

 38 से ज्यादा टावर... लेकिन पानी की बूंद के लिए तरसते लोग

महागुन मायवुड्स में कई फेज और 38 से ज्यादा टावर हैं। निवासियों के मुताबिक, फेज-1 में कुछ हद तक पानी की सप्लाई मिल रही है, लेकिन फेज-3 के कई टावरों में पानी की बूंद तक नहीं पहुंच रही थी।

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कई टावरों में जलापूर्ति ठप होने के कारण सैकड़ों परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान होना पड़ा। लोगों का कहना है कि पानी की समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर डाल रही है।

सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि पिछले करीब एक साल से व्यवस्थाएं लगातार खराब होती जा रही हैं। कभी गार्ड हड़ताल पर चले जाते हैं, तो कभी सफाईकर्मी काम बंद कर देते हैं। लेकिन पिछले एक महीने में पानी और बिजली की समस्या ने मुश्किल और बढ़ा दी है।

 बीमार पति... लेकिन बाथरूम तक के लिए पानी खरीदना पड़ रहा

टावर-4 में रहने वाली अमृता ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि, 'उनके पति बीमार हैं। पानी की सप्लाई नहीं होने की वजह से उन्हें पिछले कई दिनों से पानी खरीदकर काम चलाना पड़ रहा है।'

उनका आरोप है कि समस्या सिर्फ एक-दो टावरों तक सीमित नहीं है। टावर 24, 25, 26, 27 और 28 जैसे टावरों के निवासियों की शिकायतों पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

निवासियों का कहना है कि, 'मेंटेनेंस टीम की ओर से अक्सर फेज-1 और फेज-2 की समस्याओं पर जानकारी दी जाती है, लेकिन फेज-3 और फेज-4 की दिक्कतों को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती।'

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 शिकायतों से सड़क तक पहुंचा गुस्सा

कई दिनों से चल रही परेशानी और शिकायतों के बाद लोगों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर पहुंच गया.

कुछ निवासी पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो कुछ लोग बिल्डर के सेक्टर-62 स्थित हेड ऑफिस भी पहुंचे. लेकिन लोगों का कहना है कि अभी तक पानी और बिजली की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

सोमवार रात पानी की सप्लाई ठप होने के बाद बड़ी संख्या में निवासी मेंटेनेंस ऑफिस पहुंचे और प्रबंधन से सवाल किए। इसके बाद मंगलवार को सोसाइटी के बाहर सड़क पर विरोध प्रदर्शन और जाम की स्थिति बन गई.

 एओए के अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि, 'नई मेंटेंस टीम जो नई आई है उन्हें पुराने लोग जो यहां पहले से काम कर रहे हैं वो सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. यहां तक की महागुन बिल्डर के लोग भी सोसाइटी के मेंटेंनेंस में सपोर्ट नहीं कर रहे जिसकी वजह से समस्या बढ़ती जा रही है. सोसाइटी की मेंटेंस का काम इनवायरो एजेंसी को दिया गया है वो किसी भी चीज की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है. जिसकी वजह से हर दिन परेशानी आ रही है. '

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत की.

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 सिर्फ महागुन मायवुड्स नहीं... ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई सोसाइटियों में पानी का संकट.

महागुन मायवुड्स की कहानी अकेली नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कई हाईराइज सोसाइटियों से पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

विडंबना ये है कि इन सोसाइटियों में ऊंची-ऊंची अट्टालिकाएं हैं... स्विमिंग पूल हैं... एंट्री और एग्जिट पर 24 घंटे सुरक्षा गार्ड हैं... और मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने हजारों रुपये लिए जाते हैं।

लेकिन सवाल वही है—जब इतनी सुविधाओं के लिए पैसे दिए जा रहे हैं, तो फिर पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए लोगों को सड़क पर क्यों उतरना पड़ रहा है?

 सुपरटेक ईकोविलेज में भी सामने आई थी ऐसी ही तस्वीर

ग्रेटर नोएडा की ही सुपरटेक ईकोविलेज सोसाइटी में भी पिछले दिनों पानी की समस्या को लेकर निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया था।

वहां लोग हाथों में मोमबत्तियां लेकर सोसाइटी परिसर में उतरे और बिल्डर के खिलाफ नारे लगाए.

निवासियों के मुताबिक, रविवार से ही पानी की समस्या बनी हुई थी। टावर D-12 के अलावा टावर 7, 14 और 17 तथा टावर A के 4 और 9 नंबर टावरों में पानी की भारी किल्लत बताई गई।

लोगों का कहना था कि उन्हें बाथरूम और दूसरी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है।

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 सवाल सिर्फ पानी का नहीं... भरोसे का भी है

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की चमचमाती सोसाइटियां आधुनिक शहर और बेहतर लाइफस्टाइल का सपना दिखाती हैं। लेकिन जब उन्हीं सोसाइटियों के लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएं, तो सवाल सिर्फ सप्लाई का नहीं रहता.

सवाल ये भी है कि हजारों रुपये के मेंटेनेंस के बाद भी लोगों को आखिर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?

क्योंकि ऊंची इमारतों में रहना भले ही मॉडर्न लाइफस्टाइल की पहचान हो...

लेकिन एक घर की सबसे पहली जरूरत आज भी वही है—पानी.

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