AI की दुनिया में इन दिनों गूगल के चार बड़े साइंटिस्ट्स के इस्तीफे की चर्चा है. लेकिन इन सबके बीच एक नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में है. वह हैं संजय घेमावत. राजस्थान के कोटा में पले-बढ़े संजय ने करीब 27 साल गूगल में बिताए और ऐसी तकनीकें बनाने में मदद की, जिनके बिना आज Google Search, Gmail, Gemini और Cloud जैसी कई सर्विस की कल्पना करना मुश्किल है. अब उन्होंने गूगल के ही पूर्व साइंटिस्ट्स के साथ मिलकर नई AI कंपनी Discovery Loop शुरू की है.
गूगल में संजय घेमावत की शुरुआत 1999 में हुई थी. उस समय कंपनी बहुत छोटी थी. अगले दो दशकों में उन्होंने गूगल के सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. इनमें गूगल फाइल सिस्टम, मैप रेड्यूस, बिगटेबल औऱ टेंसर प्लोन जैसी तकनीकें शामिल हैं. यही सिस्टम बाद में Google Search, YouTube, Gmail, Google Cloud और बड़े AI मॉडल को चलाने की नींव बने.
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संजय की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनका बचपन राजस्थान के कोटा में बीता. बाद में उन्होंने अमेरिका के MIT से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की. गूगल जॉइन करने से पहले वह DEC सिस्टम रिसर्च सेंटर में रिसर्चर थे. गूगल में आने के बाद उनका फोकस बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और डिस्ट्रिब्यूटेड कंप्यूटिंग पर रहा. यही अनुभव आगे चलकर AI मॉडल को ट्रेन करने वाली तकनीकों में भी काम आया.
गूगल के साथ-साथ जेफ डीन और संजय घेमावत की जोड़ी टेक इंडस्ट्री में काफी मशहूर रही है. दोनों ने मिलकर कई ऐसी तकनीकें तैयार कीं, जिन्हें आज दुनिया भर की कंपनियां इस्तेमाल करती हैं या जिनसे प्रेरित सिस्टम बनाए गए हैं. TensorFlow से लेकर बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग तक, दोनों का योगदान लंबे समय तक Google की AI स्ट्रैटिजी का हिस्सा रहा.
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अब यही टीम Discovery Loop नाम का नया AI स्टार्टअप बना रही है. कंपनी का मकसद सिर्फ एक और AI चैटबॉट बनाना नहीं है. इसका फोकस ऐसे AI सिस्टम तैयार करना है जो वैज्ञानिक रिसर्च, इंजीनियरिंग, दवा खोज, चिप डिजाइन और मशीन लर्निंग जैसे जटिल कामों को काफी हद तक अपने आप कर सकें. कंपनी का दावा है कि AI सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई खोज करने में भी मदद करेगा.
डिस्कवरी लूप को शुरुआत से ही बड़ी कंपनियों और निवेशकों का समर्थन मिल गया है. खोसला वेंचर्स, रेडिकल वेंचर्स, लाइट स्पीड और गूगल जैसे निवेशकों ने इसमें पैसा लगाया है. दिलचस्प बात यह है कि Alphabet यानी Google की पैरेंट कंपनी भी इस स्टार्टअप में निवेशक है और शुरुआती दौर में क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध कराएगी.