भारतीय खिलाड़ियों के लगातार इंजर्ड होने के चलते BCCI (भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड) का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) सवालों के घेरे में है. जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, नीतीश कुमार रेड्डी और वॉशिंगटन सुंदर समई कई स्टार खिलाड़ियों की फिटनेस ने टीम इंडिया की परेशानी बढ़ाई है. इन सबके बीच सीओई प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने साफ किया कि बेंगलुरु स्थित यह संस्थान केवल चोटिल खिलाड़ियों के रिहैब के लिए नहीं है.
वीवीएस लक्ष्मण ने रविवार (9 अगस्त) को बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "CoE केवल रिहैब सेंटर नहीं है. खिलाड़ियों को उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करने के लिए इसकी इससे कहीं बड़ी भूमिका है." भारतीय क्रिकेट में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर खिलाड़ी लगातार चोटिल क्यों हो रहे हैं. लक्ष्मण ने किसी व्यक्ति या डिपार्टमेंट को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया.
वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि पेशेवर खिलाड़ियों का चोटों से जूझना स्वाभाविक है और इसी कारण खिलाड़ियों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. लक्ष्मण कहते हैं, "चोट किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा होती है. इसलिए मॉनिटरिंग सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण है. हम 'ब्लेम' शब्द का इस्तेमाल नहीं करते क्योंकि ऐसा करेंगे तो हम सिर्फ बलि का बकरा तलाश रहे होंगे."
बुमराह-सुदर्शन श्रीलंका टूर से हो चुके बाहर
भारतीय टीम को 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है, लेकिन उससे पहले चोटों ने टीम मैनेजमेंट के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. सबसे बड़ा झटका जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति है. शुरुआत में चयनकर्ताओं को उम्मीद थी कि वह कम से कम एक टेस्ट के लिए उपलब्ध हो सकते हैं. हालांकि घुटने में लगी चोट के बाद फ्लूइड रिटेंशन की समस्या के कारण उनकी वापसी में अधिक समय लग रहा है. साई सुदर्शन को भी फिटनेस के आधार पर शुरुआती टीम में शामिल किया गया था. वह नेट्स में लंबे समय तक बल्लेबाजी कर रहे थे, लेकिन बाएं पैर के अंगूठे में दर्द पूरी तरह खत्म नहीं होने के कारण जोखिम नहीं लिया गया.
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सीओई पर सबसे ज्यादा सवाल हर्षित राणा के मामले को लेकर उठा है. तेज गेंदबाज हर्षित हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण लगभग चार महीने तक मैदान से दूर रहे थे. वापसी के करीब दो सप्ताह के भीतर उन्हें फिर हैमस्ट्रिंग इंजरी हो गई. इसके बाद सवाल उठा कि क्या हर्षित को मैदान पर लौटने की मंजूरी देने से पहले सभी जरूरी रिटर्न-टू-प्ले प्रोटोकॉल पूरे किए गए थे. उनकी दोबारा चोट ने खिलाड़ियों की रिहैब प्रक्रिया और फिटनेस क्लीयरेंस को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया.
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नीतीश कुमार रेड्डी का मामला अलग है. वह अपनी गेंदबाजी की रफ्तार में करीब 7-8 किलोमीटर प्रति घंटे का इजाफा करने पर काम कर रहे थे. इस प्रयास के साथ गेंदबाजी का भार बढ़ा और इसके बाद उनकी हैमस्ट्रिंग तथा क्वाड्रिसेप्स पर असर पड़ा. ऐसे में सवाल यह भी है कि खिलाड़ियों के स्किल डेवलपमेंट के दौरान बढ़ने वाले वर्कलोड की निगरानी किस तरह की जा रही है.
मामला सिर्फ चोटों की संख्या तक सीमित नहीं है. सीओई की मेडिकल एंड स्पोर्ट्स साइंस टीम और राष्ट्रीय चयन समिति के बीच खिलाड़ियों की वापसी की समयसीमा को लेकर तालमेल भी चर्चा का विषय बना हुआ है. इन्हीं मुद्दों को लेकर लक्ष्मण सहित सीओई के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के बीच वर्चुअल बैठक भी हुई. इसमें केंद्रीय अनुबंध वाले चोटिल खिलाड़ियों के रिहैब और उनकी संभावित वापसी पर चर्चा की गई.
CoE में ये पद अब तक खाली
2025 की शुरुआत में नितिन पटेल के इस्तीफे के बाद से सीओई में हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस का पद खाली है. फिलहाल धनंजय कौशिक इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. बोर्ड के लिए चिंता सिर्फ यह नहीं है कि कितने खिलाड़ी चोटिल हैं, बल्कि यह भी है कि उनकी वापसी को लेकर चयनकर्ताओं को दी जा रही समयसीमा कितनी सटीक है.
जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी के अलावा तेज गेंदबाज आकाश दीप भी लंबे समय से लोअर-बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर के कारण क्रिके्टिंग एक्शन से दूर हैं. हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती और प्रिंस यादव जैसे खिलाड़ी भी अलग-अलग फिटनेस समस्याओं के कारण सीओई की निगरानी में हैं.