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वैभव को क्यों रोके खड़े हैं गंभीर... पृथ्वी शॉ वाली कहानी से डर रहे हैं क्या?

वैभव सूर्यवंशी को वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में अब तक प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिला है. न्यूजीलैंड सीरीज के लिए भी चुने गए वैभव के इंतजार के बीच सवाल उठ रहा है कि गौतम गंभीर उन्हें मैदान पर फिर से उतारने में देरी क्यों कर रहे हैं. क्या टीम मैनेजमेंट युवा बल्लेबाज को जल्दबाजी से बचाना चाहता है? इस चर्चा में पृथ्वी शॉ की कहानी भी अहम हो जाती है, जिन्होंने टेस्ट डेब्यू पर शतक जड़कर सनसनी मचाई थी, लेकिन आगे का सफर आसान नहीं रहा.

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वैभव पर गंभीर का 'ब्रेक'. (Photo, PTI/@BCCI)
वैभव पर गंभीर का 'ब्रेक'. (Photo, PTI/@BCCI)

15 साल के वैभव सूर्यवंशी तैयार हैं... बल्ले से धमाका करने को बेताब हैं... फैन्स उन्हें टीम इंडिया की जर्सी में मैदान पर फिर से उतरते देखना चाहते हैं, लेकिन गौतम गंभीर हैं कि उन्हें प्लेइंग इलेवन में मौका ही नहीं दे रहे! 

वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में वैभव का इंतजार खत्म नहीं हुआ और अब निगाहें न्यूजीलैंड सीरीज पर टिक गई हैं. आखिर गंभीर वैभव को रोक क्यों रहे हैं? क्या टीम इंडिया के इस किशोर सितारे को अभी सीनियर खिलाड़ियों के बीच रहकर अनुभव बटोरना चाहिए या गंभीर उसे बेंच पर बैठाकर उसके सुनहरे मौके गंवा रहे हैं?

इस सवाल के साथ पृथ्वी शॉ की कहानी भी चर्चा में आ जाती है. शॉ ने भी कम उम्र में धमाकेदार शुरुआत से सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन आगे का सफर वैसा आसान नहीं रहा, जैसा उनकी पहली कामयाबी के बाद लग रहा था. तो क्या वैभव के मामले में गंभीर कोई खास रणनीति अपना रहे हैं?

वैभव को लेकर गंभीर की रणनीति क्या है?

वैभव की चर्चा सिर्फ उनकी उम्र की वजह से नहीं है. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें कम समय में पहचान दिलाई है. यही वजह है कि फैन्स उन्हें भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में देखने के लिए बेताब हैं. लेकिन टीम में चयन और प्लेइंग इलेवन में जगह मिलना दो अलग बातें हैं. किसी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने के बाद भी उसे मैदान पर उतारने का फैसला टीम संयोजन, उसकी भूमिका और मैच की जरूरत को ध्यान में रखकर लिया जाता है.

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गंभीर के सामने भी यही चुनौती है. एक तरफ टीम को सीरीज जीतनी है, दूसरी तरफ इस  खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगे बढ़ने का अवसर देना है. वैभव को ओपनिंग में उतारने की मांग हो रही है, लेकिन टीम मैनेजमेंट यह देखना चाहेगा कि मौजूदा संयोजन में उनके लिए जगह कैसे बनाई जाए. हालांकि, वैभव को लगातार बाहर रखने की वजह क्या है, इस पर टीम मैनेजमेंट की ओर से स्पष्ट जानकारी के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

'वैभव सूर्यवंशी को अभी करना होगा इंतजार'

गौतम गंभीर का रुख समझने के लिए वैभव को लेकर उनके बयान पर गौर करना जरूरी है. गंभीर कह चुके हैं कि वैभव को अपने मौके का इंतजार करना होगा. उन्होंने संजू सैमसन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का पक्ष लेते हुए यह भी स्पष्ट किया था कि कुछ मैचों में खराब प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी को खारिज नहीं किया जा सकता.

यह भी संभव है कि गंभीर चाहते हों कि वैभव पहले सीनियर खिलाड़ियों के साथ समय बिताएं, उनकी तैयारी और मैच के दबाव से निपटने के तरीके को समझें. ड्रेसिंग रूम में बिताया गया वक्त किसी युवा खिलाड़ी के लिए उपयोगी हो सकता है. उसे अनुभवी खिलाड़ियों की दिनचर्या, रणनीति और पेशेवर रवैये को करीब से देखने का मौका मिलता है. लेकिन सीखने की प्रक्रिया का दूसरा अहम हिस्सा मैदान पर उतरना भी है. मैच के दबाव में फैसले लेना और अपनी गलतियों से सीखना किसी भी खिलाड़ी के विकास के लिए जरूरी है.

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पृथ्वी शॉ की कहानी क्यों आई याद?

18 साल 329 दिन के पृथ्वी शॉ ने अक्टूबर 2018 में टेस्ट डेब्यू किया था. तब उन्होंने अपने पहले ही टेस्ट में (वेस्टइंडीज के खिलाफ) शतक जड़कर तहलका मचा दिया था. कम उम्र में मिली इस कामयाबी ने उनसे जुड़ी उम्मीदों को आसमान पर पहुंचा दिया. ऐसा लगा कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल गया है, जो आने वाले वर्षों में बड़ी भूमिका निभाएगा.

... लेकिन इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पृथ्वी को बड़ा झटका लगा. अभ्यास मैच के दौरान कैच लेने की कोशिश में उनके बाएं टखने में चोट लग गई. चोट के कारण वह इस दौरे से बाहर हो गए और उन्हें भारत लौटना पड़ा. उनकी चोट के साथ-साथ उस दौरे के दौरान अनुशासन और टीम के माहौल को लेकर भी चर्चाएं हुई थीं. हालांकि पृथ्वी ने बाद में अनुशासनहीनता से जुड़ी अटकलों को खारिज किया था.

यहां गौर करने वाली बात यह है कि कम उम्र में टीम इंडिया में जगह बनाने वाले पृथ्वी शॉ को सीनियर खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने और उनके अनुभवों से सीखने का ज्यादा वक्त नहीं मिला था.

फिर भी पृथ्वी शॉ की कहानी युवा खिलाड़ियों के सफर का एक अहम पहलू सामने रखती है. कम उम्र में बड़ी सफलता मिलना अपने आप में शानदार उपलब्धि है, लेकिन उसके बाद उस स्तर को बनाए रखने के लिए लगातार मेहनत, फिटनेस, मानसिक मजबूती, सही मार्गदर्शन और अवसरों का सही इस्तेमाल भी जरूरी होता है. प्रतिभा किसी खिलाड़ी को पहचान दिला सकती है, लेकिन लंबे करियर के लिए कई दूसरे पहलुओं पर भी काम करना पड़ता है.

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वैभव सूर्यवंशी के तेवर भी कई बार चर्चा में रहे हैं. अंडर-19 एशिया कप फाइनल में पाकिस्तानी गेंदबाज अली रजा से उनकी बहस हुई, जबकि श्रीलंका में भारत-ए की ओर से खेलते हुए भी वह श्रीलंकाई खिलाड़ियों से उलझ गए थे. ऐसे में सीनियर खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उनके लिए खेल के साथ-साथ मैदान पर दबाव और आक्रामकता संभालने का अनुभव हासिल करने का जरिया भी हो सकता है.

क्या वैभव को जल्दबाजी से बचा रहे हैं गंभीर?

वैभव और पृथ्वी की परिस्थितियां अलग हैं. दोनों की तुलना करके यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि गंभीर किसी पुराने अनुभव के कारण वैभव को रोक रहे हैं. लेकिन पृथ्वी की कहानी के संदर्भ में यह सवाल जरूर उठता है कि युवा प्रतिभा को आगे बढ़ाने का सही तरीका क्या होना चाहिए. क्या उसे शुरुआत से ही बड़े मंच पर लगातार मौके दिए जाएं, या पहले टीम के माहौल में ढलने और खुद को तैयार करने का समय मिले?

इसका जवाब हर खिलाड़ी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता. वैभव पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रख चुके हैं. ऐसे में अब चर्चा उनके डेब्यू की नहीं, बल्कि प्लेइंग इलेवन में उनकी भूमिका और उन्हें मिलने वाले अवसरों की है. अगर टीम मैनेजमेंट उन्हें भविष्य की योजना का हिस्सा मानता है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें किस भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है और मैदान पर उतरने का मौका कब मिल सकता है.

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वैभव को सिर्फ उनकी उम्र के कारण जल्दबाजी में खिलाना जरूरी नहीं, लेकिन अनुभव के नाम पर लगातार इंतजार कराते रहना भी अपने आप में कोई रणनीति नहीं है. सही फैसला वही होगा, जिसमें टीम की जरूरत और खिलाड़ी के विकास के बीच संतुलन बनाया जाए. ड्रेसिंग रूम से सीखना अहम है, मगर मैच खेलने का अनुभव भी उतना ही जरूरी है.

न्यूजीलैंड सीरीज पर रहेंगी नजरें

वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा सीरीज में वैभव को मौका मिलता है या नहीं, इस पर सबकी नजरें हैं. इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज उनके लिए एक और अवसर हो सकती है. भारतीय टीम में उनका चयन बताता है कि वह टीम की योजना में शामिल हैं, लेकिन चयन का मतलब प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की होना नहीं है. अंतिम फैसला टीम संयोजन और मैच की परिस्थितियों के आधार पर होगा.

गंभीर के सामने चुनौती साफ है. उन्हें टीम के नतीजों का ध्यान रखने के साथ-साथ युवा खिलाड़ी को आगे बढ़ने का रास्ता भी देना है. वैभव को लेकर फैन्स की उम्मीदें बढ़ चुकी हैं और अब वे उन्हें सिर्फ ड्रेसिंग रूम में नहीं, मैदान पर खेलते देखना चाहते हैं.

क्या गंभीर वैभव को जल्दबाजी से बचा रहे हैं, या उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह देने का सही समय तलाश रहे हैं? फिलहाल इसका पक्का जवाब नहीं है. यह सवाल इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि 15 साल का यह बल्लेबाज अपने बल्ले से पहले ही दुनिया को चौंका चुका है. पृथ्वी शॉ ने भी कम उम्र में धमाकेदार आगाज किया था, लेकिन शुरुआती चमक को लंबे करियर में बदलना अलग चुनौती साबित हुआ. अब वैभव के सामने अगली छलांग लगाने का मौका है और गंभीर के सामने फैसला लेने की बारी. क्या यह किशोर सितारा अगली सीरीज में मैदान पर उतरेगा, या इंतजार का सिलसिला और लंबा होगा?

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