15 अगस्त से गॉल में शुरू होने वाली भारत-श्रीलंका टेस्ट सीरीज सिर्फ दो टीमों के बीच मुकाबला नहीं होगी. यह भारतीय बल्लेबाजी की सबसे बड़ी कमजोरी की भी परीक्षा होगी. कभी विदेशी तेज गेंदबाज टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ा खतरा हुआ करते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. हालिया टेस्ट क्रिकेट में भारतीय बल्लेबाजों के लिए स्पिन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है.
यही वजह है कि श्रीलंका दौरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता. दौरे की सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी टीम नहीं, बल्कि वहां की पिचें होंगी. गॉल और कोलंबो (एसएससी) दोनों ही ऐसे मैदान हैं, जहां स्पिन अक्सर मैच का रुख तय करती है. गॉल में मैच आगे बढ़ने के साथ पिच टूटती जाती है और टर्न लगातार बढ़ता है, जबकि एसएससी की सतह भी स्पिनरों को अच्छी मदद देती है. ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को हर सेशन में स्पिन की परीक्षा देनी होगी. यानी इस सीरीज का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि टीम इंडिया के बल्लेबाज स्पिन के इस इम्तिहान में कितना सफल रहते हैं.
विडंबना यह है कि जिस देश ने ईरापल्ली प्रसन्ना, बिशन सिंह बेदी, भगवत चंद्रशेखर, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, रविचंद्रन अश्विन जैसे महान स्पिनर दुनिया को दिए, आज उसी देश के बल्लेबाज स्पिन के सामने सबसे ज्यादा संघर्ष करते नजर आ रहे हैं.
2024 के बाद घरेलू मैदान पर भारत का रिकॉर्ड उसकी सबसे बड़ी चिंता की कहानी बयां करता है. बांग्लादेश, न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए 9 टेस्ट में टीम इंडिया को सिर्फ 4 जीत मिली, जबकि 5 मैचों में हार का सामना करना पड़ा. इनमें न्यूजीलैंड के हाथों 0-3 की ऐतिहासिक क्लीन स्वीप और दक्षिण अफ्रीका से 0-2 की सीरीज हार सबसे बड़ा झटका रही. इन दोनों सीरीज ने भारतीय बल्लेबाजी की स्पिन के खिलाफ कमजोरी को बेनकाब कर दिया.
अब चुनौती और कठिन है क्योंकि सामने श्रीलंका है. घरेलू परिस्थितियों में श्रीलंकाई स्पिनर किसी भी टीम के लिए बड़ा खतरा साबित होते हैं. सबसे बड़ी चुनौती बाएं हाथ के स्पिनर प्रभात जयसूर्या होंगे.
गॉल 34 साल के प्रभात जयसूर्या का सबसे पसंदीदा मैदान रहा है, जहां उन्होंने सिर्फ 11 टेस्ट में 81 विकेट झटके हैं. उनकी गेंदबाजी औसत 26.62 है और वह 9 बार एक पारी में 5 या उससे अधिक विकेट झटक चुके हैं. वहीं, कोलंबो के एसएससी मैदान पर भी उन्होंने सिर्फ 3 टेस्ट में 15 विकेट लिए हैं, जिसमें 2 बार एक पारी में 5 विकेट लेने का कारनामा शामिल है. यानी सीरीज के दोनों वेन्यू पर जयसूर्या भारतीय बल्लेबाजों की सबसे बड़ी परीक्षा होंगे.
एक समय भारतीय बल्लेबाजों की सबसे बड़ी कमजोरी तेज गेंदबाजी मानी जाती थी. ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के दौरे भारतीय टीम के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होते थे. लेकिन विराट कोहली, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे और रोहित शर्मा की पीढ़ी ने उस धारणा को काफी हद तक बदल दिया. आज भारतीय बल्लेबाज तेज गेंदबाजों के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा सहज दिखते हैं, लेकिन स्पिन के सामने उनका आत्मविश्वास डगमगाता नजर आता है.
यही वजह है कि इस सीरीज में शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल और ऋषभ पंत पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी. सिर्फ विकेट बचाने से काम नहीं चलेगा. स्पिनरों के खिलाफ स्ट्राइक रोटेट करनी होगी, पैरों का बेहतर इस्तेमाल करना होगा और ढीली गेंदों को बाउंड्री तक पहुंचाना होगा. अगर भारतीय बल्लेबाज सिर्फ रक्षात्मक रवैया अपनाते हैं तो श्रीलंकाई स्पिनर उन पर लगातार दबाव बनाते रहेंगे.
हालांकि भारत का रिकॉर्ड उम्मीद भी जगाता है. टीम इंडिया 2008 के बाद श्रीलंका में कोई टेस्ट सीरीज नहीं हारी है और वहां लगातार 5 टेस्ट जीत चुकी है. लेकिन क्रिकेट में रिकॉर्ड तभी तक मायने रखते हैं, जब मौजूदा फॉर्म उनका साथ दे. इस बार भारतीय बल्लेबाजी की स्पिन के खिलाफ कमजोरी उस शानदार रिकॉर्ड पर भी भारी पड़ सकती है.
भारत के पास अच्छे स्पिनरों की कमी नहीं है. सवाल गेंदबाजी का नहीं, बल्लेबाजी का है. अगर भारतीय बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ अपनी पुरानी कमजोरी पर काबू पा लेते हैं तो श्रीलंका में जीत की राह खुल जाएगी. लेकिन अगर वही कहानी दोहराई गई, तो गॉल और कोलंबो की टर्न लेती पिचें एक बार फिर भारत की सबसे बड़ी परीक्षा बन जाएंगी. आखिरकार, इस सीरीज का फैसला सिर्फ बल्ले और गेंद से नहीं, बल्कि स्पिन के खिलाफ भारत की तैयारी से होगा.
* साई सुदर्शन का चयन फिटनेस क्लियरेंस के अधीन
भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला 15 से 19 अगस्त तक गॉल में खेला जाएगा, जबकि दूसरा और अंतिम टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक कोलंबो (एसएससी) में आयोजित होगा. दोनों मुकाबले भारतीय समयानुसार सुबह 10:00 बजे शुरू होंगे.