दक्षिण अफ्रीका के सेडरबर्ग (Cederberg) पहाड़ों में उगने वाला रूइबोस (Rooibos) पौधा इन दिनों दुनिया भर में चर्चा में है. यह पौधा सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के करीब 60 हजार हेक्टेयर इलाके में ही उगता है. इसकी पत्तियों से बनने वाली रूइबोस चाय अब 50 से ज्यादा देशों में पी जा रही है. साल 2022 से 2024 के बीच इसकी खपत में 12.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. वहीं, 2025 में इसका निर्यात पहली बार 10 हजार टन के पार पहुंच गया. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस पौधे में कैफीन नहीं होता और इसमें एंटीऑक्सीडेंट व पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं.
रूइबोस का मतलब होता है 'लाल झाड़ी'. यह पौधा सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के खास मौसम और मिट्टी में ही अच्छी तरह उगता है. यही वजह है कि इसे दूसरे देशों में उगाना आसान नहीं है. इसकी बढ़ती लोकप्रियता की एक बड़ी वजह यह भी है कि जो लोग कैफीन वाली चाय या कॉफी नहीं पीना चाहते, वे इसे पसंद कर रहे हैं. हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर अभी और रिसर्च की जरूरत है.
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रूइबोस को उगने के लिए खास तरह की मिट्टी, कम बारिश और सूखा मौसम चाहिए. ये सभी चीजें दक्षिण अफ्रीका के सेडरबर्ग इलाके में मिलती हैं. इसलिए यह पौधा दुनिया के दूसरे हिस्सों में आसानी से नहीं उग पाता. इसी वजह से इसे एक एंडेमिक पौधा माना जाता है, यानी ऐसा पौधा जो प्राकृतिक रूप से सिर्फ एक ही इलाके में मिलता है.
इस पौधे की खास बात क्या है?
रूइबोस में कैफीन नहीं होता. इसमें एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक तत्व भी पाए जाते हैं. शुरुआती रिसर्च में इन्हें शरीर के लिए फायदेमंद माना गया है. कुछ अध्ययनों में इन्हें दिल की बीमारी और कुछ दूसरी बीमारियों का खतरा कम करने से भी जोड़ा गया है. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है.
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अब रूइबोस का इस्तेमाल सिर्फ चाय बनाने में ही नहीं हो रहा. इससे हर्बल ड्रिंक, स्किन केयर और दूसरे प्रोडक्ट भी बनाए जा रहे हैं. जापान इस समय इसका सबसे बड़ा खरीदार है. साल 2025 में दक्षिण अफ्रीका से होने वाले कुल रूइबोस निर्यात का करीब 33 फीसदी हिस्सा जापान गया. इसके अलावा यूरोप और अमेरिका में भी इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
बदलता मौसम बढ़ा रहा है चिंता
रूइबोस की खेती मौसम पर काफी निर्भर करती है. पिछले 20 साल में इसका उत्पादन 13 हजार से 25 हजार टन के बीच रहा है. साल 2023 में कम बारिश की वजह से इसकी फसल में करीब 17 फीसदी की गिरावट आई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ती गर्मी और कम होती बारिश आने वाले समय में इस पौधे की खेती के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
रूइबोस सिर्फ एक हर्बल चाय नहीं, बल्कि प्रकृति का एक खास पौधा है, जो दुनिया में सिर्फ एक ही इलाके में उगता है. इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन बदलता मौसम इसकी खेती के सामने नई चुनौती खड़ी कर रहा है.