अफ्रीका
एशिया के बाद अफ्रीका (Africa) दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा और दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप है (Second Most Populous Continent). इसका क्षेत्रफल लगभग 30.3 मिलियन वर्ग किमी है और यह पृथ्वी के कुल सतह क्षेत्र का 6% और इसके 20% भूमि क्षेत्र को कवर करता है (Total Area of Africa). 2018 तक, 1.3 अरब लोगों के साथ यह दुनिया की मानव आबादी का लगभग 16% हिस्सा है (Africa Population). अफ्रीका की जनसंख्या सभी महाद्वीपों में सबसे कम उम्र की है, 2012 में औसत आयु 19.7 थी, जब दुनिया भर में औसत आयु 30.4 थी (Youngest Population in World). प्राकृतिक संसाधनों की एक विस्तृत श्रृंखला के बावजूद, अफ्रीका में प्रति व्यक्ति सबसे गरीब महाद्वीप है. हालांकि हालिया आर्थिक विस्तार और बड़ी और युवा आबादी ने अफ्रीका को एक महत्वपूर्ण आर्थिक बाजार बना दिया है.
यह महाद्वीप उत्तर में भूमध्य सागर, स्वेज के इस्तमुस और उत्तर पूर्व में लाल सागर, दक्षिण-पूर्व में हिंद महासागर और पश्चिम में अटलांटिक महासागर से घिरा हुआ है. महाद्वीप में मेडागास्कर और कई अलग-अलग द्वीपसमूह शामिल हैं. क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका का सबसे बड़ा देश अल्जीरिया है और जनसंख्या के हिसाब से नाइजीरिया सबसे बड़ा देश है. अफ्रीकी संघ के माध्यम से अफ्रीकी राष्ट्र एक दूसरे की सहयोग करते हैं, जिसका मुख्यालय अदीस अबाबा में है (Africa Geographical Location).
यह दुनिया का एकमात्र महाद्वीप है जो सभी चार मुख्य गोलार्द्धों में स्थित है. यह उत्तरी समशीतोष्ण से दक्षिणी समशीतोष्ण क्षेत्रों तक फैला एकमात्र महाद्वीप है. महाद्वीप का अधिकांश और उसके देश उत्तरी गोलार्ध में हैं, वहीं दक्षिणी गोलार्ध में भी इसका एक बड़ा हिस्सा है, जहां कई देश स्थित हैं. पश्चिमी सहारा, अल्जीरिया, लीबिया और मिस्र के एक बड़ा हिस्सा और ट्यूनीशिया को छोड़कर यह महाद्वीप उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित है (Africa Climate).
अफ्रीका बहुत अधिक जैव विविधताओं वाला महाद्वीप है. यहां मेगाफौना प्रजातियों की सबसे बड़ी संख्या है, लेकिन मौजूदा वक्त में, अफ्रीका मरुस्थलीकरण, वनों की कटाई, पानी की कमी और अन्य मुद्दों से जूझ रहा है (Africa Environmental Issue).
अफ्रीका का इतिहास लंबा, जटिल है. पूर्वी अफ्रीका को मनुष्यों और होमिनिडे क्लैड (महान वानर) की उत्पत्ति के स्थान के रूप में स्वीकार किया जाता है. माना जाता है कि होमिनिड्स और उनके पूर्वज सबसे पहले लगभग 7 मिलियन वर्ष पहले यहीं पर उतपन्न हुए थे. इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका और मोरक्को, लगभग 2,33,000, 2,59,000, और 3,00,000 साल पहले के हैं. माना जाता है कि होमो सेपियन्स की उत्पत्ति लगभग 3,50,000-2,60,000 साल पहले अफ्रीका में हुई थी (History of Africa).
अहमदाबाद में कांगो से लौटे एक बिजनेसमैन में इबोला के संदिग्ध लक्षण मिलने के बाद उसे आइसोलेशन में रखा गया है. उसके संपर्क में आए तीन अन्य लोगों को भी अलग वार्ड में भर्ती किया गया है और सभी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं.
अफ्रीका के देशों में इबोला वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, WHO ने इसे इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. कांगो में 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, इस वायरस का कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
अफ्रीका में इबोला वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. वहीं, भारत सरकार ने भी कांगो, युगांडा और साउथ सूडान की यात्रा से बचने की सलाह दी है. अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी इस वायरस को महाद्वीपीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है.
अफ्रीका के कई देशों में तेजी से बढ़ रहे इबोला वायरस संक्रमण ने दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालात को गंभीर मानते हुए ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है. भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. इसके साथ ही भारत ने अफ्रीकी देशों को मेडिकल सहायता और सुरक्षा उपकरण भेजने की शुरुआत कर दी है.
कांगो में इबोला आउटब्रेक के बीच हिंसक प्रदर्शन देखने को मिला, जब एक स्थानीय फुटबॉलर के शव को परिवार को नहीं सौंपे जाने पर लोगों ने अस्पताल के मेडिकल टेंट में आग लगा दी. पुलिस को स्थिति काबू करने के लिए आंसू गैस और चेतावनी फायरिंग करनी पड़ी. घटना ने इबोला संक्रमित शवों के सुरक्षित अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।
भारत और अफ्रीकी संघ के बीच दिल्ली में 28 से 31 मई के बीच होने वाले इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट को टाल दिया गया. विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी. हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया गया, लेकिन माना जा रहा है कि अफ्रीका में फैल रहे इबोला वायरस के चलते यह फैसला लिया गया.
अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला का प्रकोप बढ़ने के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है. WHO ने कॉन्गो और युगांडा में फैले इबोला को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय और NCDC स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन एयरपोर्ट स्क्रीनिंग और निगरानी बेहद जरूरी है.
बुंडीबुग्यो ईबोला वायरस का एक खतरनाक स्ट्रेन है. इसके चलते WHO ने अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी घोषित की है. इसकी मृत्यु दर 30-40% है. कोई विशेष वैक्सीन या दवा नहीं है. समय पर इलाज से मरीज बच सकते हैं.
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में एक बहुत मजबूत अल-नीनो बनने वाला है, जो इतिहास के सबसे खतरनाक अल-नीनो में से एक हो सकता है. दुनिया भर में बाढ़, सूखा और रिकॉर्ड गर्मी का खतरा बढ़ जाएगा.
अफ्रीका के दूसरे सबसे बड़े देश में एक बार फिर से इबोला वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है. अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 246 संदिग्ध मिले हैं. वायरस को लेकर सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है.
अल-नीनो सूखा पैदा कर दुनिया भर में लड़ाई-झगड़ों का खतरा बढ़ा देता है. 1950 से 2023 तक 555 संघर्षों के एनालिसिस से यह नतीजा निकला है. मध्य अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका सबसे प्रभावित रहते हैं.
तुर्की की पहली ICBM यिल्दिरिमहान 6000 किमी रेंज और 31 हजार km/hr की रफ्तार के साथ दुनिया के लिए चुनौती है. भारत-इजरायल इसके निशाने पर हैं, जो भविष्य में रक्षा समीकरणों को बदल सकती है.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 1 मई से ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का फैसला किया है. यूएई अब 2027 तक तेल उत्पादन को 34 लाख बैरल से बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बना रहा है. इससे अफ्रीकी तेल उत्पादक देशों जैसे नाइजीरिया, अल्जीरिया, कांगो आदि की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर होगा.
'कूटनीति' में आज बात उस महाद्वीप की, जिसे 'भविष्य की धरती' कहा जाता है...अफ्रीका. जब भी अफ्रीका की बात होती है, चर्चा अक्सर चीन के निवेश या पश्चिमी देशों की मदद की होती है. लेकिन पर्दे के पीछे एक और कहानी लिखी जा रही है. यह कहानी है भारतीय मूल के उन पांच दिग्गज अरबपतियों की, जिन्होंने रिस्क के बीच अवसर तलाशा और आज अफ्रीका के उद्योग, तकनीक और बुनियादी ढांचे की रीढ़ बन चुके हैं. आज 'कूटनीति' में खुलासा करेंगे उन पांच शक्तिशाली चेहरों का, जिनकी दौलत और विजन अफ्रीका का भविष्य बदल रहे हैं.
चाड में पानी को लेकर खूनी जंग छिड़ गई. दो परिवारों के बीच शुरू हुआ छोटा विवाद पूरे इलाके में फैल गया. हालात बेकाबू हो गए तो सेना को उतारना पड़ा. इस भीषण पानी के युद्ध में 42 लोगों की मौत हो गई. चाड पानी की भयंकर कमी वाला देश है, जहां एक छोटे जल स्रोत पर भी लोग जान देने को तैयार हो जाते हैं.
चाड में पानी के कुएं को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया, जिसमें 42 लोगों की मौत हो गई. जल संकट, सूखा और संसाधनों की कमी ने हालात बिगाड़ दिए, जिससे सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा.
भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण जहाज INS सुदर्शिनी ने स्पेन के कैनरी द्वीप समूह में लास पाल्मास बंदरगाह पर तीन दिवसीय पोर्ट कॉल पूरा कर लिया. 26 अप्रैल 2026 को समाप्त हुए इस दौरे के दौरान कमांडिंग ऑफिसर ने स्थानीय नौसेना कमांडर से मुलाकात की. जहाज को स्थानीय लोगों और भारतीय समुदाय के लिए खोला गया. अब जहाज केप वर्डे की ओर रवाना हो गया है. यह लोकायन-26 अभियान का हिस्सा है.
भारत इन दिनों पृथ्वी का सबसे बड़ा गर्म इलाका बन गया है. दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 95 भारत में हैं. उत्तर-पूर्वी भारत में अप्रैल में ही 43-47°C तापमान है. मौसम मॉडल बता रहे हैं कि 2026 में सुपर अल-नीनो आ सकता है, जो सबसे मजबूत होगा. इससे कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ आएगी. रिकॉर्ड गर्मी बढ़ेगी. वैज्ञानिकों ने तैयार रहने की चेतावनी दी है.
अमेरिका का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश मिडिल ईस्ट पहुंच गया है. अब इस क्षेत्र में अमेरिका के पास तीन परमाणु शक्ति वाले विशाल कैरियर हो गए हैं. इससे अमेरिकी नौसेना की हवाई हमले की क्षमता और क्षेत्रीय ताकत बहुत बढ़ जाएगी. कैरियर 90 तक लड़ाकू विमान ले जा सकता है. लंबे समय तक बिना रिफ्यूलिंग के रह सकता है.
प्रशांत महासागर में 8046 किलोमीटर लंबी गर्मी की लहर फैल चुकी है, जो मेगा अल-नीनो को और ताकतवर बना रही है. वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि 2026-27 में भारी गर्मी होगी. सूखा पड़ेगा. फसलों को नुकसान होगा. भारत में इस गर्मी तापमान काफी बढ़ेगा. मानसून कमजोर पड़ सकता है. सूखे का खतरा रहेगा.
होर्मुज की तरह अगर दुनिया के 10 बड़े चोक पॉइंट- मलक्का, स्वेज, पनामा, जिब्राल्टर और बाकी सब टोल वसूलने लगें तो 80% ग्लोबल समुद्री व्यापार टोल का जाल बन जाएगा. जहाजों की लागत 2-5 गुना बढ़ेगी, महंगाई का तूफान आ जाएगा. भारत जैसे देशों में पेट्रोल ₹300/लीटर और दाल ₹200/किलो हो सकता है. देशों के बीच झगड़े, युद्ध का खतरा और पर्यावरणीय नुकसान बढ़ जाएगा.