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विजय अकेले... तमिलनाडु चुनाव में बिना गठबंधन के उतर रही TVK क्या हासिल कर पाएगी?

तमिलनाडु में एक्टर विजय की पार्टी टीवीके ने किसी भी तरह के चुनावी गठबंधन से साफ तौर पर इनकार किया है. टीवीके की तरफ से एक बड़े ऑफर का दावा जरूर किया गया है, लेकिन पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है - विजय के लिए चुनाव मैदान में अकेले उतरने का नतीजा क्या होगा?

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तंजावुर में हुई टीवीके की एक रैली में थलपति विजय. (Photo: PTI)
तंजावुर में हुई टीवीके की एक रैली में थलपति विजय. (Photo: PTI)

थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) तमिलनाडु विधानसभा का चुनाव अकेले लड़ेगी. TVK की तरफ से अब स्पष्ट रूप से बोल दिया गया है कि चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं होगा. अभिनेता से नेता बने विजय ने भी ऐसी चर्चाओं को खारिज करते हुए झूठा प्रचार करार दिया है.

लेकिन टीवीके की तरफ से भी किए गए एक दावे से सस्पेंस पैदा हो गया है. टीवीके नेता आधव अर्जुन का एक बहुत बड़ा ऑफर ठुकराने का दावा भी सामने आया है. टीवीके की तरफ से ठुकरा दिए गए ऑफर में विजय के लिए मुख्यमंत्री पद की भी पेशकश बताया गया है. 

तमिलगा वेत्री कझगम की तरफ से आयोजित इफ्तार पार्टी में विजय ने खुद उन जोरदार चर्चाओं को खारिज कर दिया, जिनमें बताया जा रहा है कि टीवीके, बीजेपी के साथ एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन सकती है.  

कौन है ऑफर देने वाली गुमनाम पार्टी

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए होने जा रहे मतदान से करीब एक महीना पहले, तमिलगा वेत्री कझगम की तरफ से दावा किया गया है कि एक पार्टी की तरफ से विजय को मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव और 90 सीटों का ऑफर दिया गया है. 

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TVK महासचिव आधव अर्जुन ने ऑफर देने वाली पार्टी का नाम नहीं बताया है. आधव अर्जुन का कहना है कि विजय ने प्रस्ताव ठुकरा दिया है. टीवीके नेता का कहना है, उन्होंने हमें हर तरह के प्रस्ताव... जैसे 50 से लेकर 90 सीटों तक के दिए, लेकिन विजय ने बस यही कहा कि उन्हें लोगों का भरोसा चाहिए, पद नहीं.

सवाल यह है कि वो कौन सा गुमनाम राजनीतिक दल है जिसने विजय के सामने तमिलनाडु चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद की पेशकश की है?

आधव अर्जुन किसी राजनीतिक पार्टी का नाम भले न ले रहे हों, लेकिन उनके बयान में बड़ा संकेत भी छुपा लगता है. काफी जोर देकर आधव अर्जुन कहते हैं, 'विजय ऐसे इंसान नहीं हैं जो मुख्यमंत्री पद के लिए दिल्ली के आगे झुक जाएं.' 

क्या अर्जुन आधव ने नाम लिए बिना केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी की तरफ इशारा किया है? आधव अर्जुन के बयान के बाद कुछ लोग ऐसा ही सोच रहे हैं.

गठबंधन पर डील कहां रुक जाकर रुक गई

थलपति विजय ने सार्वजनिक तौर पर साफ कर दिया है कि उनका किसी भी राजनीतिक दल के साथ चुनावी गठबंधन करने का कोई इरादा नहीं है. विजय तमिल सिनेमा के सुपरस्टार कहे जाते हैं. विजय की रैलियों में भारी भीड़ जुटती है, करूर रैली मिसाल है - तमिलनाडु के लोगों पर विजय के प्रभाव को देखते हुए ही पुराने प्लेयर उनके साथ चुनावी गठबंधन के प्रयास कर रहे हैं. 

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पहले तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेता विजय की पार्टी टीवीके के साथ चुनाव गठबंधन के लिए आलाकमान से पैरवी कर रहे थे. विजय की राजनीति पूरी तरह तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के खिलाफ है. गठबंधन के मुद्दे पर सवाल उठने लगा था कि क्या राहुल गांधी तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं की ऐसी पहल को मंजूरी देंगे? बाद की बातें बताती हैं कि सवाल ही जवाब बन गया. 

हाल के दिनों में बीजेपी की तरफ से टीवीके के साथ गठबंधन की कोशिशों की काफी चर्चा हो रही थी. चर्चाओं में विजय को डिप्टी सीएम पद का ऑफर भी शुमार बताया जा रहा था. ऐसी भी चर्चा थी कि बातचीत में एक राज्य के डिप्टी सीएम की भी मदद ली जा रही है - लेकिन खुद विजय और आधव अर्जुन के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ ही ऐसी चर्चाओं का अंत हो गया है. कम से कम नया अपडेट आने तक तो यही माना जाएगा. 

अपने समर्थकों से मुखातिब विजय कहते हैं, कई लोग अफवाह फैला रहे हैं कि ये उस टीम में है, ये इस टीम में है... लेकिन उनको भी अब समझ आ गया है कि हम सिर्फ जनता की टीम में हैं. ऐसा समझ में आने के बाद भी बहुत अफवाहें फैलाई गईं, लेकिन बात नहीं बनी...  परेशान होकर कहा जाने लगा, विजय इस गठबंधन में शामिल हो रहे हैं उस गठबंधन में शामिल हो रहे हैं... ये बोलकर झूठा प्रचार किया जा रहा है.

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सवाल यह भी उठ रहा था कि क्या विजय विवादों और सीबीआई जांच के दबाव में चुनावी गठबंधन के लिए तैयार हो जाएंगे? 

1. असल में विजय की रैली में भगदड़ के मामले में सीबीआई जांच कर रही है. सितंबर, 2025 को करूर में हुई विजय की रैली में भगदड़ के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई थी. इनकम टैक्स केस में भी विजय फंसे हुए हैं. 

2. विजय के तलाक और अफेयर का मामला अलग से चर्चा में है. 27 साल की शादी के फरवरी में पत्नी संगीता ने चेन्नई के फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की, जिसमें विजय के कथित अवैध संबंधों को आधार बनाया गया है. तलाक के विवाद के बीच विजय को एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के साथ एक शादी में देखा गया था. 

3. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे, और उससे ठीक तीन दिन पहले 20 अप्रैल को विजय को तलाक के मामले में कोर्ट में पेश होना है.

चिरंजीवी या पवन कल्याण मॉडल - विकल्प क्या है

तमिलनाडु की राजनीति में सिने स्टारों के प्रभाव के इतिहास को देखते हुए कोई भी विजय को नजरअंदाज करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. लोगों के बीच लोकप्रिय होने के बावजूद विजय को पहले से जमे जमाए राजनीतिक दलों से मुकाबला करना है. मुख्य मुकाबला तो तमिलनाडु पर शासन करने वाली AIADMK और मौजूदा वक्त में सत्ता पर काबिज डीएमके से है. पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री बने ई. पलानीस्वामी ने अपना कार्यकाल तो पूरा कर लिया था, लेकिन तब से AIADMK का संघर्ष खत्म नहीं हो पाया है - अब तो पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम भी एमके स्टालिन के पाले में जा चुके हैं. 

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AIADMK और बीजेपी गठबंधन की ही तरह विजय का मुकाबला डीएमके की अगुवाई वाले गठबंधन सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से भी होना है. SPA में डीएमके, कांग्रेस और लेफ्ट दलों सहित 23 राजनीतिक दलों को शामिल किया गया है - SPA का शुरू से ही स्टैंड साफ है, विजय के साथ किसी तरह का वास्ता नहीं रखना है. 

और, ऐसे में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं. वेल्लोर की रैली में विजय ने पहली बार ऐलान किया था कि 2026 का विधानसभा चुनाव 'विजय बनाम स्टालिन' होने जा रहा है. 

डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को टार्गेट करते हुए विजय ने कहा, तमिलनाडु में अभी एक स्टैंड-अप कॉमेडी वाली सरकार राज कर रही है... मुख्यमंत्री के असली दोस्त रिश्वत और भ्रष्टाचार हैं... अगर दम है तो वे चुनाव से पहले अपनी संपत्ति का खुलासा करें.

पुराने दौर की सत्ता की राजनीति से थोड़ा आगे बढ़कर देखें, तो हाल फिलहाल विजय के सामने दो मॉडल नजर आते हैं. aajtak.in पर सीनियर पत्रकार टीएस सुधीर लिखते हैं, विजय के सामने दुविधा है... चिरंजीवी या पवन कल्याण - उन्हें कौन सा मॉडल अपनाना चाहिए? उनका फैसला ही तय करेगा कि विजय के पास राजनीतिक सत्ता हासिल करने का वास्तविक मौका है या वह तमिलनाडु की राजनीति के दलदल में महज एक और असफल खिलाड़ी बनकर रह जाएंगे.

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चिरंजीवी मॉडल का जिक्र करते हुए टीएस सुधीर ने लिखा है, तय है कि यदि वे 15 से 20 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करते हैं, तो यह सीटों के रूप में बदलने के लिए पर्याप्त नहीं होगा. ठीक वैसे ही जैसे 2009 में अविभाजित आंध्र प्रदेश में हुआ था. जहां चिरंजीवी की नई 'प्रजा राज्यम पार्टी' ने 16 प्रतिशत वोट हासिल किए लेकिन 294 सदस्यीय विधानसभा में केवल 18 सीटें जीतीं. मेगास्टार ने कुछ समय एक साधारण विधायक के रूप में बिताया, फिर अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया. समझौते के तहत राज्यसभा की सीट पाई और राजनीति को अलविदा कहने से पहले केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का कार्यभार संभाला. यदि विजय, चिरंजीवी के पदचिन्हों पर चलते हैं, तो उनके साथ भी वही हश्र होने का जोखिम है.

पवन कल्याण टीडीपी के साथ आंध्र प्रदेश की गठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम हैं. मतदान में महीना भर का वक्त है, और विजय के पास तमिलनाडु में 'सीटी' बजाने का अब भी मौका है. TVK का चुनाव निशान'सीटी' है. 

विजय चाहें तो बीजेपी के साथ गठबंधन करके आंध्र प्रदेश का पवन कल्याण मॉडल तमिलनाडु में लाने की कोशिश कर सकते हैं. राजनीति में तो यू टर्न का हमेशा ही स्कोप रहता है. 

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