ऑल इण्डिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam) या एआईएडीएमके एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है.इस पार्टी का तमिलनाडु (Tamil Nadu) राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में बहुत प्रभाव है. यह एक द्रविड़ पार्टी है जिसकी स्थापना तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन ने 17 अक्टूबर 1972 को मदुरै में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम से अलग हुए गुट के रूप में की थी (AIADMK Foundation). उस वक्त एम करुणानिधि (M Karunanidhi) ने उन्हें कोषाध्यक्ष हिसाब मांगने के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था. यह वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल और भारत-सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है.
9 फरवरी 1989 से 5 दिसंबर 2016 तक, एआईएडीएमके का नेतृत्व पार्टी के महासचिव के रूप में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता (J Jayalalithaa-Amma) ने किया. उनके कैडर द्वारा उन्हें पार्टी की मां के रूप में सराहा गया था. वह तमिल जनता के बीच अत्यधिक लोकप्रिय थीं. 21 अगस्त 2017 से 23 जून 2022 तक, पार्टी का नेतृत्व तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्रियों ओ पन्नीरसेल्वम और एडप्पादी के. पलानीस्वामी के दोहरे नेतृत्व में समन्वयक और संयुक्त समन्वयक के रूप में किया गया.
11 जुलाई 2022 से, एआईएडीएमके का नेतृत्व तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी (ई.पी.एस.) पार्टी के महासचिव के रूप में कर रहे हैं (AIADMK General Secretary).
पार्टी का मुख्यालय पुरैची थलाइवर एमजीआर कहा जाता है. मालिगाई, जो वीपी रमन सलाई, रोयापेट्टा, चेन्नई में स्थित हैय यह इमारत 1986 में एमजीआर की पत्नी और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री वीएन जानकी रामचंद्रन द्वारा पार्टी को दान में दी गई थी (AIADMK Headquarter).
तमिलनाडु में एआईएडीएमके के भीतर सियासी संकट गहरा गया है. विधानसभा में विश्वास मत के दौरान विजय सरकार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने के बाद पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने एसपी वेलुमणि, सीवी षणमुगम और विजयभास्कर को उनके पदों से हटा दिया है.
AIADMK के बागी सी वी शनमुगम ने दावा किया कि DMK ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर थिरुमावलवन का नाम सुझाया था. उन्होंने कहा कि इस कदम से राज्य का पहला दलित मुख्यमंत्री बन सकता था, लेकिन EPS ने इससे मना कर दिया.
तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया. सरकार के पक्ष में 144 वोट पड़े, जबकि विरोध में 22 विधायक रहे. DMK के वॉकआउट के बाद सरकार को बड़ी राहत मिली.
चुनाव नतीजों ने तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरण बदल ही दिए थे, नई सरकार बन जाने के बाद भी बवाल थमा नहीं है. विजय के फ्लोर टेस्ट पर टूट गई AIADMK. अब फैसला उन AIADMK विधायकों का होना है, जिन्होंने विजय का साथ दिया है.
तमिलनाडु विधानसभा में कल होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला. मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने एआईएडीएमके के बागी नेताओं एसपी वेलुमणि और सीवी षणमुगम से मुलाकात की. माना जा रहा है कि एआईएडीएमके के करीब 30 विधायक टीवीके सरकार को समर्थन दे सकते हैं.
तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले AIADMK और AMMK ने टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की है. इससे मुख्यमंत्री विजय की सरकार को मजबूती मिली है.
तमिलनाडु की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली अन्नाद्रमुक आज अपने वजूद की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है. लगातार चौथी हार और आंतरिक बगावत ने 'दो पत्तों' वाली इस विरासत को दो फाड़ होने के कगार पर खड़ा कर दिया है.
तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद AIADMK में नेतृत्व संकट गहरा गया है. कई विधायक और पूर्व मंत्री EPS के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय के मुख्यमंत्री बनने और सरकार गठन का रास्ता 9 मई को पूरी तरह साफ हो गया है. वीसीके और आईयूएमएल ने उनकी पार्टी टीवीके को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान किया. दोनों दलों के पास 2-2 विधायक हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे जारी होने के बाद भी राज्य में सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. वीसीके के अध्यक्ष थोल थिरुमावलवन आज पार्टी की बैठक में विजय की टीवीके को समर्थन देने या न देने का अंतिम फैसला करेंगे. इस बीच वीसीके नेता वन्नी अरासु ने एक पोस्ट करके अटकलें बढ़ा दी हैं.
तमिलनाडु में TVK को सत्ता सौंपने में जितनी देर हो रही थी, विजय उतने मजबूत होते गए. अब जबकि, उनकी पार्टी को बहुमत के लिए जरूरी सपोर्ट मिल गया है तो द्रविड़ पॉलिटिक्स के सारे धुरंधर धीरे-धीरे सरेंडर होते जा रहे हैं. और विजय के लिए जो रास्ता बनता दिख रहा है, वह अल्पमत से प्रचंड बहुमत का है.
तमिलनाडु की सियासत में पल-पल गेम बदल रहा है, क्योंकि किसी भी दल को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका. बीजेपी से साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली AIADMK अब एनडीए से अलग होने पर विचार कर रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि AIADMK किसके साथ जाएगी?
एआईएडीएमक ने अपने विधायकों को टूटने के डर से पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में ठहराया है जिससे रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की शुरुआत हो चुकी है. चुनाव में विधायकों की मेहनत और प्रचार पर खर्च की गई ऊर्जा के बीच अब उनकी लोभ और दलबदल को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है. विधायकों को दूसरे पक्ष में जाने से रोकने के लिए अब उन्हें विशेष सुरक्षा के तहत रिसॉर्ट में रखा जाएगा जहां वे आराम कर सकेंगे और पार्टी की रणनीतियों पर विचार कर सकेंगे.
तमिलनाडु चुनाव में हार के बाद डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने बड़ा दिल दिखाया है. उन्होंने एक समाचार पत्र से बातचीत में कहा कि वे नई टीवीके सरकार को छह महीने तक परेशान नहीं करेंगे. स्टालिन राज्य में संवैधानिक संकट नहीं चाहते और उम्मीद करते हैं कि नई सरकार जनहित की योजनाएं जारी रखेगी.
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर अनिश्चितता के बीच अब रिजॉर्ट पॉलिटिक्स का दौर तेज हो गया है. एआईएडीएमके ने अपने विधायकों के लिए पुडुचेरी के रिजॉर्ट में कमरे बुक किए हैं.
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर हलचल तेज है. इस बीच बड़ी खबर सामने आई है. DMK और AIADMK धुर विरोधी दलों के बीच गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं. जानकारी के मुताबिक, AIADMK ने दावा किया है कि उनकी DMK के साथ बातचीत चल रही है. बता दें कि थलापति विजय की पार्टी TVK, जिसने सबसे ज्यादा 108 सीटें जीती हैं, वो फिलहाल बहुमत से दूर है. देखें Video.
तमिलनाडु में विजय को सरकार बनाने से रोकने के लिए डीएमके और एआईएडीएमके का गठबंधन हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो थलपति विजय तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 108 सीटें जीतकर भी सरकार नहीं बना पाएंगे.
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं. विजय दो सीटों पर जीते हैं तो उनके एक सीट छोड़ते ही संख्याबल 107 रह जाएगा.
तमिलनाडु में बहुमत के लिए दस सीटों की भरपाई में जुटी विजय की पार्टी TVK एक के बाद एक नए दांव चलती जा रही है. कांग्रेस ने समर्थन के बदले मंत्रिपद मांगे तो विजय ने दूसरी पार्टियों के दरवाजे पर दस्तक दे दी.
तमिलनाडु में चुनाव नतीजों के बाद गठबंधन राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई है. विजय की टीवीके बहुमत से कुछ सीटें दूर है और अब सरकार गठन के लिए सहयोगी दलों से बातचीत तेज हो गई है. कांग्रेस के बाद एआईएडीएमके से भी समर्थन मांगा गया है. ऐसे में राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं, जिन पर सभी की नजर टिकी हुई है.
तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया, जब विजय की पार्टी टीवीके ने एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी को समर्थन के लिए पत्र भेजा. 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी टीवीके अब कांग्रेस के बाद एआईएडीएमके को भी साथ लेने की कोशिश में है.