एनसीपी की राजनीति में सुनेत्रा पवार धीरे धीरे पावर सेंटर बनने की दिशा में बढ़ रही हैं. अब तक महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार के पावर की चर्चा हुआ करती थी, लेकिन अब वो बीते दिनों की बात होने जा रही है - लेकिन, जो कुछ भी हो रहा है उसमें बीजेपी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है.
संसद के बजट सत्र के दौरान बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संसद में राहुल गांधी तो सड़क पर ममता बनर्जी के निशाने पर हैं. बिहार चुनाव के दौरान राहुल गांधी चुनाव आयोग की SIR के खिलाफ मुहिम चला रहे थे, अब पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ममता बनर्जी अपना अभियान चला रही हैं.
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार को बहस तो राष्ट्रपति के अभिभाषण पर होने थी, लेकिन राहुल गांधी ने जब पूर्व सेना अध्यक्ष मनोज नरवणे की अप्रकाशित किताब का जिक्र किया तो माहौल जंग की तरह हो गया. गलवान घाटी संघर्ष से जुड़ी जानकारियों को लेकर कांग्रेस हमलावर है. भाजपा के अपने पलटवार हैं. दिलचस्प है इस विवाद को नियमों के दायरे में देखना.
कर्नाटक सरकार का हेट स्पीच बिल अब राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने यह बिल दिसंबर, 2025 में विधानसभा से पास किया था, लेकिन राज्यपाल को बिल के कई प्रस्तावों पर आपत्ति है. अब राष्ट्रपति के फैसले का इंतजार है.
महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के संभावित विलय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. अजित पवार के निधन के बाद बदले घटनाक्रम में सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बन जाने से समीकरण बदले हैं. शरद पवार और पार्थ पवार की मुलाकात में पैच-अप की कोशिश हुई है, लेकिन अभी कुछ भी निश्चित नहीं है.
एक समय था जब आम बजट का भारतीयों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महत्व होता था. अब ऐसा नहीं है. फिर भी, सिर्फ़ पुरानी आदत की वजह से हम हर बजट वाले दिन उत्साह से भर जाते हैं, भले ही असल में कुछ खास न हो.
निर्मला सीतारमण जब कांजीवरम साड़ी पहनकर बजट पेश करने आईं तो माना गया था कि आगामी विधानसभा को मद्देनजर रखते हुए तमिलनाडु को लेकर बढ़-चढ़कर घोषणाएं होंगी. उनके बजट भाषण में तमिलनाडु का खास उल्लेख तो नहीं हुआ, लेकिन जब बजट दस्तावेज को खंगाला गया तो उसमें तमिलनाडु को लेकर कई अहम जानकारियां निकलीं.
बजट भाषण में संत रविदास का नाम लिया जाना, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंजाब दौरा सीधे सीधे दलित वोट बैंक से कनेक्ट हो रहा है. संत रविदास जयंती पर, आम बजट के ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के डेरा सचखंड बल्ला में संत निरंजन दास से मुलाकात करने वाले हैं.
इंडिया टुडे–सी वोटर के मूड ऑफ द नेशन सर्वे में INDIA ब्लॉक के नेतृत्व और विपक्षी राजनीति को लेकर जनता की राय सामने आई है. राहुल गांधी MOTN सर्वे में ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव से काफी आगे नजर आ रहे हैं.
स्नान को टालना मुझे राहत देता है. पूस में नहाने के लिए मुझे जेठ को याद करना पड़ता है. याद करना पड़ता है पीठ की घमोरियों को, बारिश के बाद की उमस को, पिघलते तारकोल को, ग्लूकोज का विज्ञापन, अखबार में छपी दुपट्टे से चेहरा ढकी लड़की की तस्वीर, गेहूं के खेत, सहारा की रेत और सूर्य के प्रकाश की 8 मिनट 20 सेकेंड की उस लंबी यात्रा को. नहाते हुए मैं पृथ्वी से बुध हो जाना चाहता हूं.
अजित पवार के विमान हादसे में हुए निधन के बाद से महाराष्ट्र डिप्टी सीएम पद और उनकी पार्टी एनसीपी के उत्तराधिकारी को लेकर कयास चल ही रहे थे. तभी अचानक चर्चा उस सुलह की होने लगी जो एक बार फिर शरद पवार और अजित पवार को साथ ला सकती थी. दोनों पवार अपनी पार्टियों का विलय करना चाहते थे. सब तय था. 8 फरवरी की तारीख भी. लेकिन, अब सिर्फ सवाल है.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज तो छोड़ दिया है, लेकिन माघ मेला प्रशासन के साथ हुए टकराव को लेकर तनाव बरकरार है. अपने अपने दावों को लेकर दोनों पक्ष आपने सामने है. निशाने पर यूपी में सत्ताधारी बीजेपी है, इसलिए विपक्ष भी बहती गंगा में रगड़ रगड़कर हाथ धो रहा है.
इसी व्यवस्थित भीड़ के बीच, संगम घाट पर खड़े-खड़े मेरी नजर एक छोटे से समूह पर पड़ी. न कोई शोर, न कोई विशेष सुरक्षा घेरा, न कोई घोषणा. कुछ शिष्य, साधारण वस्त्र और शांत चाल. पहले तो लगा कि कोई सामान्य संत होंगे, लेकिन थोड़ी ही देर में पता चला- ये पुरी के शंकराचार्य हैं.
शशि थरूर ने कांग्रेस की बैठकों से दूरी बनाने की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है. संसद के बजट सत्र से पहले सोनिया गांधी के आवास पर बुलाई गई मीटिंग से भी शशि थरूर गायब थे. केरल चुनाव से पहले ये सब शशि थरूर और कांग्रेस दोनों पक्षों के लिए ताजा मुलाकात महत्वपूर्ण है.
प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच टकराव गहराने के बाद उन्होंने बिना स्नान किए मेला छोड़ दिया. पुलिस कार्रवाई, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच यह मामला प्रशासनिक, धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, जो अब न्यायिक स्तर तक पहुंच चुका है.
महाराष्ट्र की राजनीति के 'दादा' कहे जाने वाले अजित पवार का जाना राज्य के लिए एक ऐसे युग का अंत है, जिसे उनके काम करने की शैली, अनुशासन और विकास के प्रति उनके जुनून के लिए याद किया जाएगा.
अजित पवार का अचानक यूं चले जाना बेहद पीड़ादायक है. वह जिला परिषद चुनाव में प्रचार के लिए बारामती आने वाले थे, लेकिन लैंडिंग के दौरान विमान हादसे में उनका निधन हो गया. शोक की इस घड़ी में अजित पवार से जुड़ी कई यादें जेहन में ताजी हो गई हैं...
अजित पवार, जिन्हें पूरा महाराष्ट्र 'दादा' के नाम से पुकारता था, केवल एक राजनेता नहीं थे. वे अनुशासन, काम करने के जुनून और एक अनप्रेडिक्टेबल व्यक्तित्व का अनूठा मेल थे. वरिष्ठ पत्रकार रित्विक भालेकर 23 नवंबर 2019 की सुबह को आज भी नहीं भूल पाए हैं, जब अजित पवार ने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के एक साल पूरे होने पर राज्य सरकार ने संशोधन अध्यादेश भी लागू कर दिया है. अध्यादेश में शादी और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को सख्त किया गया है. शादी के लिए पहचान छिपाने या गलत जानकारी देने को विवाह रद्द कर देने का आधार बनाया गया है.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और NCP प्रमुख अजित पवार का बुधवार सुबह विमान हादसे में निधन हो गया. इस दुर्घटना से महाराष्ट्र में शोक है और अजित पवार की राजनीतिक विरासत को लेकर सवाल भी. अपने गृहनगर बारामती की हवाई पट्टी पर लैंड होते समय दुर्घटनाग्रस्त हुई दुर्भाग्यपूर्ण फ्लाइट का सिर्फ मलबा ही बचा है. और NCP के भविष्य के सामने धुआं ही धुआं.
चार करोड़ छात्रों वाले भारतीय कैंपस से आईं जातिगत भेदभाव की 378 शिकायतों ने UGC को ऐसे नियम बनाने के लिए प्रेरित कर दिया, जिससे पूरी अगड़ी जातियां कठघरे में खड़ी महसूस कर रही हैं. अनुसूचित जाति-जनजाति के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग को भी अगड़ी जातियों के दमन का शिकार मान लिया गया है. जिस आधार पर ये नियम बनाए गए हैं, उन्हें Pew की रिसर्च मुंह चिढ़ा रही है.