भारतीय रेल दुनिया का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क है, जिसमें रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं. इसे संभालने के लिए 12 लाख कर्मचारी काम करते हैं, जो किसी भी देश के रेलवे सिस्टम में सबसे अधिक है. यह देश के कोने-कोने तक फैला हुआ है. इसी सिस्टम को मैनेज करने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं.
इन नियम के तहत यात्रियों के सफर को सुगम और आरामदायक बनाने का प्रयास किया जाता है. यहां तक की रेलवे ऐसे यात्रियों को राहत देने के लिए बेड रोल तक प्रोवाइड कराता है, ताकि उन्हें घर से चदर-कंबल जैसे अतिरिक्त बोझ ना लेकर चलना पड़े.
सभी AC और कुछ स्लीपर ट्रेनों में मिलती है ये सुविधा
सभी एसी कोच में रेलवे की ओर से बेड-रोल दिया जाता है. इसके साथ ही कुछ स्लीपर कोच में भी मांगने पर चादर, कंबल और तकिया दिया जाता है. यह सुविधा 1 जनवरी 2026 से शुरू की गई है. इसकी शुरुआत दक्षिण रेलवे और कुछ अन्य चुनिंदा रेल खंडों पर की गई है.
AC कोच में बेड रोल में क्या-क्या दिया जाता है?
बेड-रोल (जिसमें एक कंबल, एक तकिया, 2 चादरें और एक फेस टॉवल होता है) AC फर्स्ट क्लास, AC 2-टियर स्लीपर और AC 3-टियर स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को दिया जाता है. वहीं स्लीपर कोच में पूरा सेट (चादर, तकिया व कवर) दिया जाता है.
कितना चार्ज लगता है?
AC फर्स्ट क्लास, AC 2-टियर स्लीपर और AC 3-टियर स्लीपर क्लास में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को मुफ्त में बेडरोल की सुविधा दी जाती है, चाहे RAC सीट ही क्यों नहीं हो? यह टिकट प्राइस में ही शामिल होता है. अलग से कोई चार्ज नहीं देना होता है. लेकिन स्लीपर कोच में चादर कंबल के लिए शुल्क देना होता है.
स्लीपर कोच में भी मिलता है बेड रोल
अगर आप स्लीपर कोच में सफर कर रहे हैं तो आपको भी चादर, तकिया और कवर दिया जा सकता है. हालांकि इसकी मांग करनी होगी. स्लीपर क्लास के यात्रियों को भी ट्रेन में बेड-रोल मिल सकता है, अगर वे टिकट बुक करते समय रिज़र्वेशन स्लिप पर बेड-रोल की मांग करते हैं.
स्लीपर कोच में बेड रोल के लिए शुल्क
दुरंतो एक्सप्रेस में बेड-रोल लेने वाले यात्रियों से प्रति बेड-रोल ₹25/- का शुल्क लिया जाता है. वहीं गरीब रथ एक्सप्रेस में ₹25/- के भुगतान पर बेड-रोल दिया जाता है. इसके अलावा, कुछ अन्य ट्रेनों में चादर के ₹20 से ₹40 और पूरे सेट के ₹50 तक तय किए गए हैं.