डेटिंग का कल्चर हर जेनरेशन में रहा है. ये कोई नई चीज नहीं है. लेकिन हर जेनरेशन का इसे अपनाने और करने का तरीका अलग-अलग रहा है. हर पीढ़ी के डेटिंग को लेकर अपने मायने हैं. जेन जी के भी डेटिंग को लेकर अपनी कॉन्सेप्ट्स हैं. लेकिन क्या बदलते वक्त के साथ जेन जी को अब डेटिंग बोझ लगने लगी है? और क्या उसके पीछे का कारण बढ़ती महंगाई है. क्या जेन जी अपने डेट को बाहर ले जाना या घुमाना-फिराना अफॉर्ड नहीं कर पा रही.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कई जेन-जी ने अपने डेटिंग कल्चर को लेकर बात की. नंदिता भास्कर अपनी डेट का एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताती हैं कि वो जिस कैफे में गई वो बहुत खूबसूरत और एस्थैटिक था. खाना अच्छा था, उनकी फोटोज अच्छी आई, उनके डेट के साथ उन्होंने एक अच्छा वक्त गुजारा. फिर बारी आई बिलिंग की और बिल आया लगभग 5 हजार रुपए के करीब आया. नंदिता और उनके डेट ने बिल को 50-50 किया और वहां से चले गए.
घर पहुंचने के बाद नंदिता के ऐड टू कार्ट में जो लिप्स्टिक खरीदने के लिए रखी थी उसे वो दोबारा विश लिस्ट में डाल देती हैं. नंदिता कहती हैं कि कॉलेज टाइम में डेटिंग कितना आसान होता था. किसी रैंडम फूड ज्वाइंट पर चले जाना, या किसी चाय की टपरी पर चले जाना, या ऐसे कैफे जाना जिसे जाना हम शायद अफॉर्ड कर सकते थे. लेकिन अब बाहर निकल कर एक वक्त का खाना खाने का मतलब है कि हमें अपने इलैक्ट्रिसिटी बिल के बारे में सोचना होगा.
नंदिता आगे कहती हैं कि आज के टाइम में एक कॉफी पर 400 रुपए खर्च करके दो घंटे बिताना, जिससे आप 2-3 दिन पहले मिले हैं अपने आप में थोड़ी अजीब कैल्कुलेशन है. और सोचिए इतने एफर्ट करने के बाद भी आप सामने वाले से घोस्ट कर दिए जाए.
नंदिता भास्कर का ये सेंटिमेंट बहुत जायज है. घोस्टिंग शायद हर बार किसी को पसंद या न पसंद करने का विषय नहीं होता. बहुत बार बस ये जरूरी होता है कि आप जिसे आप अच्छे से जानते भी नहीं उसपर आप 800 बक्स क्यों खर्च करें. स्टूडेंट ट्राइब, हैदराबाद के ब्रांड पार्टनरशिप मैनेजर के मुताबिक, आजकल पैसों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देना फायदे और नुकसान, दोनों की वजह बन गया है. इसका फायदा ये है कि आप अपने खर्च किए गए हर रुपये का हिसाब रख सकते हैं. लेकिन नुकसान ये है कि आप पैसों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं और हर खर्च को लेकर अवेयर हो जाते हैं.
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आज की डेट में पैसा पूरी तरह विजीबल है. सब कुछ UPI पर दिख रहा है कि कब कैसे कितना पैसा कट रहा है. और जब हम उसी फोन में अपने सब्सक्रिप्शन्स, स्विगी ऑर्डर्स और बाकी चीजें देखते हैं तो डेट के लिए पैसा खर्च करना और प्रॉब्लमैटिक ही लगता है.
क्या कैफेस पड़ रहे जेन जी के पॉकेट पर भारी?
वहीं मानव लोपेज़ जो एक मुंबई बेस्ड फैशन मैगजीन के लिए स्टूडेंट इन्टर्न के तौर पर काम करते हैं, उनको ऐसा लगता है कि जेन जी जान बूझकर अपने डेट्स को घोस्ट नहीं कर रहे हैं. उनके हिसाब से चीजों को अफॉर्डेबल ना कर पाने की वजह से ज्यादातर लोग ये कर रहे हैं.
मानव ने बताया, “नौकरी करके पैसे कमाने के बाद भी कैफे काफी महंगे लगते हैं. खाने की क्वांटिटी भी कम होती जा रही है और कीमतें बढ़ रही हैं. ऐसे में डेट पर जाने के लिए खर्च किए गए पैसे के बदले उतना अच्छा एक्सपीरियंस नहीं मिल पाता.”
हाल ही में नौकरी छोड़कर दोबारा नई शुरुआत करने के बाद, उसे लगने लगा है कि अब पहले की तरह रेस्टोरेंट में खाना खाना भी मुश्किल हो गया है. उसने कहा, “मुंबई में किसी भी अच्छे रेस्टोरेंट में एक बार बाहर खाने जाने का बिल 1,500 से 2,000 रुपये से कम नहीं आता.”
क्या सिर्फ महंगाई ही इसके पीछे कारण है?
जहां हम अक्सर बढ़ती कीमतों को लेकर शिकायत करते हैं, वहीं काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट मसूमा ज़ैनब का मानना है कि हर बात के लिए महंगाई को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. पैसों की कमी से स्ट्रेस जरूर बढ़ता है, लेकिन हम इस सिच्यु्एशन को कैसे संभालते हैं, यह हमारी अपनी इनसिक्योरिटीज़ और दूसरों के सामने एक खास तरह की इमेज बनाए रखने के प्रेशर पर भी डिपेंड करता है.
उनके मुताबिक, लोग अपनी परेशानी पर खुलकर बात करने के बजाय कई बार दूसरों से दूरी बना लेते हैं या बिना कुछ बताए संपर्क तोड़ देते हैं. आखिर में, हर इंसान चाहता है कि उसकी बात सुनी जाए, उसे समझा जाए और उसे अहमियत दी जाए. इसके लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती.
क्या इंस्टाग्राम ट्रेंड्स के लिए डेटिंग जरूरी?
नंदिता भास्कर इस पूरी सिच्युएशन का एक दूसरा पहलू भी बताती है. भास्कर ने कहा कि इंस्टाग्राम पर अपनी डेट को अच्छा और खास दिखाने का प्रेशर लोगों को लोन देने वाले ऐप्स से पैसे उधार लेने तक के लिए मजबूर कर रहा है, ताकि वे दूसरों के सामने पैसों की कमी से जूझते हुए न दिखें. उन्होंने कहा, “जब आप इस बारे में सोचते हैं, तो ये काफी अजीब लगता है कि लोग ऐसी चीज के लिए कर्ज ले रहे हैं, जिसे बिना किसी प्रेशर के एंजॉय करना चाहिए.”
नंदिता के हिसाब से डेट्स अब ये फील करवाने लगे है कि आपके पास देने को क्या है और किसे किस चीज का ध्यान रखना पड़ेगा. उन्होंने आगे कहा, “अब लोग डेटिंग की शुरुआत में ही ये बातचीत करने लगे हैं कि क्या सामने वाला ऐसा पार्टनर ढूंढ रहा है, जो उसका खर्च उठाए और फाइनेंशियली उसकी मदद करे. यानी, किसी रिश्ते में आगे बढ़ने या एक-दूसरे को जानने से पहले ही लोग ये साफ करना चाहते हैं कि दूसरा इंसान रिश्ते में क्या रोल निभाना चाहता है.”