मेरठ के 'नीला ड्रम हत्याकांड' में दोषी पाए जाने के बाद आज कोर्ट ने मुस्कान को मौत की सजा सुनाई है. मुस्कान ने मामले के दूसरे दोषी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर सौरभ राजपूत की हत्या कर दी थी. फिर प्लास्टिक के नीले ड्रम में सीमेंट डालकर सौरभ की बॉडी को जमा दिया था. मेरठ नीला ड्रम केस की दोषी मुस्कान और साहिल दोनों मौत की सजा मिली है.
ऐसे कुछ गिने- चुने ही मौके हैं, जब किसी महिला को फांसी की सजा सुनाई गई हो या दी गई हो. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत में पहले किसी महिला को फांसी पर लटकाया गया है? इसका जवाब है - हां. आजाद होने के बाद से अब तक भारत में फांसी पर सिर्फ एक महिला को लटकाया गया है. वैसे कई ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई है, लेकिन अब तक फांसी पर नहीं लटकाया गया है. चलिए जानते हैं भारत में फांसी पर लटकाई गई पहली महिला की कहानी क्या है?
एशियन सेंटर फॉर ह्युमन राइट्स की रिपोर्ट 'इंडिया: डेथ पेनाल्टी' के मुताबिक, आजाद भारत में 3 जनवरी 1955 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में पहली बार किसी महिला को फांसी दी गई थी. इस महिला का नाम रतनबाई जैन था. रतनबाई पर तीन महिलाओं को जहर देकर मारने का आरोप था.
अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बताया जाता है कि रतन बाई दिल्ली की एक फर्टिलिटी क्लिनिक में काम करती थी. उस वक्त वह एक आत्मनिर्भर महिला था. उसे शक था कि उसके पति का अवैध संबंध उन पीड़ित तीन महिलाओं से है, जिसकी रतनबाई ने बाद में हत्या की.
यह भी पढ़ें: मुस्कान से पहले इन महिलाओं को भी सुनाई गई मौत की सजा, लेकिन नहीं हुई फांसी!
इस तिहरे हत्याकांड को गुस्से में आकर अचानक से अंजाम नहीं दिया गया था. रतनबाई ने इसके लिए बाकायदा प्लानिंग की. उसने तीनों महिलाओं के खाने में जहर मिलाकर किसी तरह खिला दिया. इस वजह से तीनों की मौत हुई थी.
रतनबाई को फांसी पर लटकाए जाने के बाद से आजतक दोबारा किसी और महिला को भारत में फांसी नहीं दी गई है. रतनबाई एकलौती हैं, जिसे फांसी पर लटकाया गया था. इसके बाद कई महिला आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन उन्हें आजतक फांसी दी नहीं जा सकी है.