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संदेसरा ब्रदर्स को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सेटलमेंट के बाद 13 हजार करोड़ का फ्रॉड केस बंद

सुप्रीम कोर्ट ने संदेसरा बंधुओं से जुड़े ₹13,300 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले को बंद कर दिया है. इस फैसले के बाद उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही भी रद्द कर दी गई है.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि संदेसरा बंधुओं पर आगे की कार्यवाही से कोई खास फायदा नहीं होगा. (File Photo: ITG)
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में माना कि संदेसरा बंधुओं पर आगे की कार्यवाही से कोई खास फायदा नहीं होगा. (File Photo: ITG)

सुप्रीम कोर्ट ने स्टर्लिंग बायोटेक के प्रमोटर नितिन और चेतन संदेसरा से जुड़े ₹13,300 करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले को बंद कर दिया है, क्योंकि उन्होंने ₹5,100 करोड़ रुपए के भुगतान और बाकी रकम 8100 करोड़ रुपए का सेटलमेंट यानी समझौता कर लिया है.

इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है. संदेसरा बंधुओं ने लगभग ₹5,100 करोड़ जमा किए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में माना है कि आगे की कार्यवाही से कोई खास फायदा नहीं होगा. इसलिए आपराधिक मामलों को बंद करने पर सहमति जताई.

संदेसरा बंधुओं पर भारतीय बैंकों से भारी ऋण लेने और 2017 में देश छोड़कर भागने का आरोप था. इसके बाद इन्हें भगोड़ा और आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था.

बैंकों ने संकेत दिया कि वे इस सेटलमेंट के माध्यम से अपने बकाया की वसूली के साथ आगे बढ़ सकते हैं. यह समझौता 2025 के अंत में एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में सामने आया, जिसमें बकाया के मुकाबले एक बड़ी राशि जमा करने पर इन पर चल रहे आपराधिक मामलों को बंद कर दिया गया.

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₹9,800 करोड़ की वसूली

सुप्रीम कोर्ट ने भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट प्रस्तावों में से एक के तहत ₹9,800 करोड़ की वसूली के साथ नितिन संदेसरा का मामला बंद कर दिया है. भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे रचनात्मक और विस्तृत वित्तीय संकल्पों में से एक स्टर्लिंग बायोटेक मामले में ₹9,800 करोड़ के मूल्य की संपत्ति को अनलॉक में परिणत किया है.

अरबपति उद्योगपति नितिन जे. संदेसरा और उनके समूह द्वारा दिया गया, यह ऐतिहासिक पुनर्भुगतान भारतीय बैंकिंग प्रणाली में बड़े पैमाने पर बढ़ावा देता है. केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई में दर्ज प्रारंभिक प्रथम सूचना रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि 5,383 करोड़ रुपये की बकाया राशि का विवाद है. हालांकि, सालों से समूह के वित्तीय अनुपालन की सावधानीपूर्वक समीक्षा से सॉल्वेंसी और बहाली के प्रति निष्ठा का पता चलता है.

कार्यवाही के दौरान, संदेसरा समूह ने सीधे 3,507 करोड़ रुपये ऋण देने वाले कंसोर्टियम को हस्तांतरित किए. इसके तहत परिसमापन तंत्र के माध्यम से अतिरिक्त 1,192 करोड़ रुपये सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए.

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने निश्चित, अंतिम निपटान जमा का सत्यापन किया. 17 दिसंबर, 2025 के अपने अनुपालन आदेश में, सर्वोच्च न्यायालय ने आधिकारिक तौर पर कहा कि कुल राशि 51 अरब 11 करोड़ 43 लाख 36 हजार 390 रुपये है. जब एकत्रित किया जाए तो कुल वसूली लगभग इतनी होती है.

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बैंकों ने 5,100 करोड़ रुपये जारी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. यह राशि स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड और उसके समूह की कंपनियों के लिए एक समझौते का हिस्सा है.

कुल बकाया कर्ज 19,283.77 करोड़ रुपये है. ऋणदाताओं ने वितरण फॉर्मूले पर सहमति व्यक्त की. अदालत जल्द ही इस मामले की सुनवाई कर सकती है. इस कदम का उद्देश्य बकाया राशि का एक हिस्सा वसूलना है.

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